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Bhiwani News: सांग से बिखरे हरियाणवी संस्कृति के रंग, कलाकारों ने बांधा समा
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सीबीएलयू में आयोजित सांग कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार।
भिवानी। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय और उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय ‘विरासत कला उत्सव’ के तीसरे दिन हरियाणवी लोक संस्कृति के प्रतीक सांग की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जींद से आए प्रसिद्ध सांग कलाकार जसबीर सिंह व उनके दल ने पारंपरिक वेशभूषा, रागनियों और दमदार संवादों के माध्यम से हरियाणवी संस्कृति, वीरता और नैतिक मूल्यों की जीवंत झलक पेश की।
कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी के दिशा-निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुलसचिव प्रो. भावना शर्मा रहीं। कलाकारों की चुटीली रागनियों और प्रभावशाली संवादों पर छात्र-छात्राओं ने तालियों से उत्साह बढ़ाया। पूरे सभागार में हरियाणवी बोली और लोक संस्कृति का रंग छाया रहा। कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सांग से सामाजिक सरोकारों का दिया संदेश
सांग की प्रस्तुति देने वाली बेटियों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, नशामुक्त भारत, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, शिक्षा और संस्कार जैसे विषयों पर संदेश दिया। कुलसचिव प्रो. भावना शर्मा ने कहा कि सांग केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है बल्कि लोक शिक्षा की पाठशाला है। यह लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है और सांग प्रस्तुत करने वाली बेटियों के प्रयास सराहनीय हैं।
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अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. सुरेश मलिक ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए क्योंकि शिक्षा के साथ ऐसी गतिविधियां उनके सर्वांगीण विकास में सहायक होती हैं। कार्यक्रम में कलाकार सतीश शर्मा, मोनिका, शमीना, सोनू भगाना, राजेश और सुमित ने भी प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर हरियाणा कला परिषद के स्टेट कोऑर्डिनेटर रविंद्र श्योराण, एनसीजेडसीसी प्रयागराज के कोऑर्डिनेटर मंथन, मुकेश शर्मा बापोड़ा, संदीप राठी, रामफल और सियाराम शर्मा मौजूद रहे।
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कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी के दिशा-निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुलसचिव प्रो. भावना शर्मा रहीं। कलाकारों की चुटीली रागनियों और प्रभावशाली संवादों पर छात्र-छात्राओं ने तालियों से उत्साह बढ़ाया। पूरे सभागार में हरियाणवी बोली और लोक संस्कृति का रंग छाया रहा। कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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सांग से सामाजिक सरोकारों का दिया संदेश
सांग की प्रस्तुति देने वाली बेटियों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, नशामुक्त भारत, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, शिक्षा और संस्कार जैसे विषयों पर संदेश दिया। कुलसचिव प्रो. भावना शर्मा ने कहा कि सांग केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है बल्कि लोक शिक्षा की पाठशाला है। यह लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है और सांग प्रस्तुत करने वाली बेटियों के प्रयास सराहनीय हैं।
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अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. सुरेश मलिक ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए क्योंकि शिक्षा के साथ ऐसी गतिविधियां उनके सर्वांगीण विकास में सहायक होती हैं। कार्यक्रम में कलाकार सतीश शर्मा, मोनिका, शमीना, सोनू भगाना, राजेश और सुमित ने भी प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर हरियाणा कला परिषद के स्टेट कोऑर्डिनेटर रविंद्र श्योराण, एनसीजेडसीसी प्रयागराज के कोऑर्डिनेटर मंथन, मुकेश शर्मा बापोड़ा, संदीप राठी, रामफल और सियाराम शर्मा मौजूद रहे।