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Bhiwani News: चेहरे से छीन रही मासूमियत, पीठ पर लदे बस्ते के बोझ तले दब रहा बचपन

Sun, 09 Apr 2023 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sun, 09 Apr 2023 11:33 PM IST
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Innocence being snatched from the face, childhood being buried under the burden of the backpack
भिवानी। घर से स्कूल के लिए पीठ पर लदे बस्ते के वजन ने बच्चों के चेहरे की मासूमियत छीन ली है। किताबों के बोझ तले बचपन भी दब रहा है। हरियाणा स्कूली शिक्षा विभाग ने 2018 में कक्षा वार बच्चों की किताबों को लेकर हिदायतें जारी की थी और किताबों के साथ बस्ते का वजन भी निर्धारित कर दिया था। लेकिन छोटी कक्षा के बच्चों की पीठ पर भी 10 से 15 किलो किताबों का बोझ बढ़ा है। जिसकी वजह से बच्चों पर मानसिक तनाव और शारीरिक पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
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हरियाणा स्कूली शिक्षा विभाग ने कक्षा पहली से दूसरी और कक्षा तीसरी से पांचवीं, छठी से आठवीं, आठवीं से नौवीं और दसवीं से बारहवीं तक की कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों की किताबों का वजन एक से डेढ़ किलो ग्राम से लेकर अधिकतम पांच किलोग्राम तक निर्धारित किया हुआ है। बच्चे के पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ साथ अन्य शैक्षणिक सामग्री भी इसी वजन में निर्धारित की गई है। लेकिन प्राइवेट स्कूलों में नियमों के विरुद्ध निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को लागू किए जाने की वजह से बच्चे की पीठ पर बस्ते का वजन बढ़ा है। स्कूली शिक्षा विभाग ने केवल एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की पुस्तकें लागू किए जाने के आदेश हैं। ये पुस्तकें बेहद ही मामूली मूल्य पर बाजार में आसानी से उपलब्ध भी हैं, मगर निजी स्कूल कमीशनखोरी के चक्कर में निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों को लागू कर रहे हैं। इन पुस्तकों के निजी स्कूलों की मिलीभगत से पुस्तक विक्रेता मनमाने दाम भी वसूल रहे हैं। अभिभावकों को बेवकूफ बनाने के लिए निजी प्रकाशकों की पुस्तकों पर छूट की लूट का झांसा भी दिया जा रहा है। कक्षा नर्सरी के बच्चे की किताबों को भी पांच से सात हजार रुपये का सेट बेचा जा रहा है। जबकि अन्य कक्षाओं की पुस्तकें 10 से 12 हजार रुपये में अभिभावकों को खरीदने पर मजबूर होना पड़ता है। कमीशन के इस खेल को रोकने वाला भी कोई नहीं है। क्योंकि शिक्षा विभाग के अधिकारी भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, किसी भी निजी स्कूल में अब तक किसी भी अधिकारी ने बस्ते का न तो वजन जांचा है न किसी निजी स्कूल पर अब तक कोई कार्रवाई हुई है।
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कोई भी निजी स्कूल निर्धारित एनसीईआरटी से बाहर की पुस्तकें लागू नहीं कर सकता है। न ही स्कूल परिसर के अंदर पुस्तकों और स्कूल ड्रेस की बिक्री कर सकता है। ऐसा करना नियम के खिलाफ और गैर कानूनी भी है। मगर अधिकांश स्कूलों में ऐसा ही धंधा चल रहा है। शिक्षा अधिकारियों को भी संगठन की तरफ से शिकायतें दी गई, मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई हैं। अभिभावकों को इस तरह के अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। बस्ते का वजन होने पर हमने पहले भी शिकायत दी था इसमें 15 स्कूल दोषी पाए गए थे लेकिन किसी स्कूल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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- बृजपाल सिंह परमार, प्रदेश अध्यक्ष, स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन।
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