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Bhiwani News: बल्क वेस्ट उठान का झंझट होगा खत्म, एजेंसी उठाएगी कचरा
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शहर में नगर निगम की गाड़ी में कचरा डालते हुए शहरवासी।
हिसार। शहर में बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों यानी बल्क वेस्ट जनरेटर्स को कचरा निस्तारण से बड़ी राहत मिलने वाली है। नगर निगम ने कचरा निस्तारण की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। निगम प्रशासन एजेंसी को नियुक्त करेगा और बल्क वेस्ट जनरेटर्स अपने स्तर पर करार करेंगे। इस व्यवस्था से शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार होने के साथ ही सार्वजनिक कचरा डंपिंग पॉइंट्स पर दबाव कम होने की उम्मीद है। प्रशासन ने जांच और तकनीकी मानकों की समीक्षा के बाद एक एजेंसी का आवेदन निरस्त कर तीन से कार्यप्रणाली, कचरा प्रसंस्करण तकनीक और संसाधन प्रबंधन से संबंधित प्लान मांगा है।
एजेंसी चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम सीधे किसी एक एजेंसी को स्थायी ठेका देने के बजाय पहले उसकी कार्यक्षमता का आकलन करेगा। निगम अधिकारियों की देखरेख में तीनों एजेंसियों का 45 दिनों तक ट्रायल लिया जाएगा। इस अवधि में एजेंसियों की कार्यक्षमता, कचरा उठाने की नियमितता, वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण और शिकायतों के समाधान का मूल्यांकन किया जाएगा। ट्रायल की रिपोर्ट और अधिकारियों के आकलन के आधार पर अंतिम रूप से एक एजेंसी का चयन किया जाएगा।
शहर में 100 से अधिक बल्क वेस्ट जनरेटर्स
प्रतिदिन 100 किलोग्राम या इससे अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों को बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा जाता है। इसके अलावा निर्धारित क्षेत्रफल और पानी की खपत के मानकों को पूरा करने वाले संस्थान भी इस श्रेणी में आते हैं। हिसार में ऐसे लगभग 100 संस्थानों को चिन्हित किया है। इनमें गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, जिंदल अस्पताल, सिविल अस्पताल, जिंदल इंडस्ट्री, डीसीएम मिल, शीशमहल, सनसिटी, मिडटाउन, सीएमसी अस्पताल, सर्वोदय अस्पताल, वेदा और सर्वेश अस्पताल सहित कई बड़े शैक्षणिक संस्थान, सरकारी व निजी अस्पताल, होटल, मॉल और व्यावसायिक परिसर शामिल हैं।
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क्यों पड़ी इस व्यवस्था की जरूरत
अब तक शहर के बड़े संस्थानों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण में कई चुनौतियां सामने आ रही थीं। नियमों के अनुसार बल्क वेस्ट जनरेटर्स को अपने परिसर में ही कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना होता है या इसके लिए किसी अधिकृत एजेंसी की सेवाएं लेनी होती हैं। नई व्यवस्था के तहत इन संस्थानों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को परिसर से ही अलग-अलग कर उठाया जाएगा। गीले कचरे से जैविक खाद बनाई जाएगी जबकि सूखे कचरे का सुरक्षित तरीके से प्रसंस्करण कर उसे री-साइकिलिंग के लिए भेजा जाएगा। इससे नगर निगम की गाड़ियों और सफाईकर्मियों पर अतिरिक्त बोझ कम होगा। साथ ही सड़कों के किनारे और खुले स्थानों पर कचरा डालने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
खुद करना होता है कचरे का निस्तारण
नियमों के मुताबिक प्रत्येक बल्क वेस्ट जनरेटर को अपने स्तर पर कचरे का निस्तारण करना होता है। हालांकि, शहर में यह काम एजेंसी के माध्यम से करवाया जाता रहा है। करीब एक माह पहले पुरानी एजेंसी का टेंडर समाप्त होने के बाद निगम ने नई एजेंसी को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की है। चार एजेंसियों ने आवेदन किया जिनमें से एक का आवेदन निरस्त कर दिया। कचरे का निस्तारण नहीं करने पर अब तक किसी बल्क वेस्ट जनरेटर के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।
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बल्क वेस्ट जनरेटर्स के कचरे के निस्तारण के लिए एजेंसी का चयन किया जाएगा। तीन एजेंसियों से वर्क प्लान मांगा है। बल्क वेस्ट जनरेटर्स अपने परिसर में या एजेंसी के परिसर में कचरे का निस्तारण करवा सकेंगे। उनके पास विकल्प होगा कि वे स्वयं कचरे का निस्तारण करें या एजेंसी की सेवाएं लें। - डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगम आयुक्त, नगर निगम
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एजेंसी चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम सीधे किसी एक एजेंसी को स्थायी ठेका देने के बजाय पहले उसकी कार्यक्षमता का आकलन करेगा। निगम अधिकारियों की देखरेख में तीनों एजेंसियों का 45 दिनों तक ट्रायल लिया जाएगा। इस अवधि में एजेंसियों की कार्यक्षमता, कचरा उठाने की नियमितता, वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण और शिकायतों के समाधान का मूल्यांकन किया जाएगा। ट्रायल की रिपोर्ट और अधिकारियों के आकलन के आधार पर अंतिम रूप से एक एजेंसी का चयन किया जाएगा।
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शहर में 100 से अधिक बल्क वेस्ट जनरेटर्स
प्रतिदिन 100 किलोग्राम या इससे अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों को बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा जाता है। इसके अलावा निर्धारित क्षेत्रफल और पानी की खपत के मानकों को पूरा करने वाले संस्थान भी इस श्रेणी में आते हैं। हिसार में ऐसे लगभग 100 संस्थानों को चिन्हित किया है। इनमें गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, जिंदल अस्पताल, सिविल अस्पताल, जिंदल इंडस्ट्री, डीसीएम मिल, शीशमहल, सनसिटी, मिडटाउन, सीएमसी अस्पताल, सर्वोदय अस्पताल, वेदा और सर्वेश अस्पताल सहित कई बड़े शैक्षणिक संस्थान, सरकारी व निजी अस्पताल, होटल, मॉल और व्यावसायिक परिसर शामिल हैं।
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क्यों पड़ी इस व्यवस्था की जरूरत
अब तक शहर के बड़े संस्थानों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण में कई चुनौतियां सामने आ रही थीं। नियमों के अनुसार बल्क वेस्ट जनरेटर्स को अपने परिसर में ही कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना होता है या इसके लिए किसी अधिकृत एजेंसी की सेवाएं लेनी होती हैं। नई व्यवस्था के तहत इन संस्थानों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को परिसर से ही अलग-अलग कर उठाया जाएगा। गीले कचरे से जैविक खाद बनाई जाएगी जबकि सूखे कचरे का सुरक्षित तरीके से प्रसंस्करण कर उसे री-साइकिलिंग के लिए भेजा जाएगा। इससे नगर निगम की गाड़ियों और सफाईकर्मियों पर अतिरिक्त बोझ कम होगा। साथ ही सड़कों के किनारे और खुले स्थानों पर कचरा डालने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
खुद करना होता है कचरे का निस्तारण
नियमों के मुताबिक प्रत्येक बल्क वेस्ट जनरेटर को अपने स्तर पर कचरे का निस्तारण करना होता है। हालांकि, शहर में यह काम एजेंसी के माध्यम से करवाया जाता रहा है। करीब एक माह पहले पुरानी एजेंसी का टेंडर समाप्त होने के बाद निगम ने नई एजेंसी को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की है। चार एजेंसियों ने आवेदन किया जिनमें से एक का आवेदन निरस्त कर दिया। कचरे का निस्तारण नहीं करने पर अब तक किसी बल्क वेस्ट जनरेटर के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।
बल्क वेस्ट जनरेटर्स के कचरे के निस्तारण के लिए एजेंसी का चयन किया जाएगा। तीन एजेंसियों से वर्क प्लान मांगा है। बल्क वेस्ट जनरेटर्स अपने परिसर में या एजेंसी के परिसर में कचरे का निस्तारण करवा सकेंगे। उनके पास विकल्प होगा कि वे स्वयं कचरे का निस्तारण करें या एजेंसी की सेवाएं लें। - डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगम आयुक्त, नगर निगम