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सांग से होती है हरियाणवी संस्कृति की पहचान : हनुमान कौशिक
Mon, 11 Nov 2024 10:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 11 Nov 2024 10:26 PM IST
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गांव धारेडू में आयोजित सांग समारोह के दौरान मौजूद उपस्थित लोग।
भिवानी। म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान कौशिक ने गांव धारेडू में आयोजित सांग समारोह को संबोधित किया। हनुमान कौशिक ने कहा कि सांग से हरियाणवी संस्कृति की पहचान होती है।
उन्होंने कहा कि सांग एक ऐसी विधा है, जिसको सूर्य कवि पंडित लख्मीचंद, पंडित मांगेराम, बाजे भगत और धनपत सिंह निंदाना ने सांग की असली गायन शैली में लोगों का न केवल मनोरंजन किया बल्कि पौराणिक और आध्यात्मिक विचारधारा से अवगत करवाया। प्राचीन जमाने के राजाओं-महाराजाओं के किस्से कहानियां भी सांग के माध्यम से हमारे समक्ष प्रस्तुत किए हैं। इससे समाज को अच्छी दिशा मिली, प्रेम और भाईचारे का सामाजिक समावेश हुआ।
सूर्य कवि पंडित लख्मीचंद के सुपौत्र पंडित विष्णु दत्त जांटी ने कहा कि दादा पंडित लख्मीचंद ने शाही लकड़हारा, सेठ ताराचंद, गोपीचंद भरथरी, पूर्णमल, राजा नल दमयंती, पद्मावत जैसे सांग अपनी लेखनी से लिखे और लोगों के अंदर प्रचारित और प्रसारित किए। जिन्हें आज भी लोग उमंग व उत्साह के साथ देखते व सुनते हैं। इस अवसर पर डा. सुरेन्द्र कादियान बडेसरा, हर्ष लांबा, धर्मवीर नागर, सरपंच बजरंग धारेडू, भूरा फौजी उमरावत, ईश्वर उमरावत, सुभाष उमरावत, सुनील शर्मा उमरावत उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि सांग एक ऐसी विधा है, जिसको सूर्य कवि पंडित लख्मीचंद, पंडित मांगेराम, बाजे भगत और धनपत सिंह निंदाना ने सांग की असली गायन शैली में लोगों का न केवल मनोरंजन किया बल्कि पौराणिक और आध्यात्मिक विचारधारा से अवगत करवाया। प्राचीन जमाने के राजाओं-महाराजाओं के किस्से कहानियां भी सांग के माध्यम से हमारे समक्ष प्रस्तुत किए हैं। इससे समाज को अच्छी दिशा मिली, प्रेम और भाईचारे का सामाजिक समावेश हुआ।
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सूर्य कवि पंडित लख्मीचंद के सुपौत्र पंडित विष्णु दत्त जांटी ने कहा कि दादा पंडित लख्मीचंद ने शाही लकड़हारा, सेठ ताराचंद, गोपीचंद भरथरी, पूर्णमल, राजा नल दमयंती, पद्मावत जैसे सांग अपनी लेखनी से लिखे और लोगों के अंदर प्रचारित और प्रसारित किए। जिन्हें आज भी लोग उमंग व उत्साह के साथ देखते व सुनते हैं। इस अवसर पर डा. सुरेन्द्र कादियान बडेसरा, हर्ष लांबा, धर्मवीर नागर, सरपंच बजरंग धारेडू, भूरा फौजी उमरावत, ईश्वर उमरावत, सुभाष उमरावत, सुनील शर्मा उमरावत उपस्थित रहे।
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