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Bhiwani News: पंचायतों में आधी आबादी लिख रही सामाजिक बदलाव की गाथा

Sun, 27 Apr 2025 10:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sun, 27 Apr 2025 10:50 PM IST
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Half the population in panchayats is writing the story of social change
सुषमा देवी।
भिवानी। परिवार के पुरुष सदस्यों के इशारे पर काम करने वाली छवि को तोड़ते हुए महिला सरपंच अब सामाजिक बदलाव की कहानी लिखने लगी हैं। ये महिला प्रतिनिधि गांव के विकास की बागडोर तो संभाल ही रही हैं, अनूठे और लीक से हटकर निर्णय लेकर बदलाव का वाहक भी बन रही हैं। भिवानी की ढाणी बीरण, सुमराखेड़ा, गुजरानी और जूई बिचली ऐसी पंचायतों में शुमार हैं, जहां की महिला सरपंचों ने अपने फैसलों से पूरे प्रदेश में नजीर पेश की है। इससे न केवल गांवों में झगड़े कम हुए बल्कि कुप्रथाओं को मिटाने की राह में भी बड़ा काम हुआ है।
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गांव गुजरानी में महिला सरपंच ने युवाओं के गांव के सार्वजनिक स्थलों पर कच्छा व कैपरी पहनकर घूमने पर पाबंदी लगाई। इसी तरह ढाणी बीरण में महिला सरपंच ने पूरे गांव की महिलाओं को घूंघट की ओट से छुटकारा दिलाया। गांव सुमराखेड़ा की महिला सरपंच की ग्राम पंचायत ने तो भाईचारा की पूरे प्रदेश में मिसाल पेश की, जहां गांव का कोई भी केस पुलिस थाना में दर्ज नहीं हुआ। इसी तरह जूई बिचली की महिला सरपंच की ग्राम पंचायत ने सरकारी तंत्र की तरह ही गांव के विकास के लिए पंचों को विभागों का बंटवारा तक कर डाला।
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सुमराखेड़ा में भाईचारे से निपटाते हैं मामला, पुलिस थाने तक नहीं जाते केस
बवानीखेड़ा क्षेत्र के गांव सुमराखेड़ा की महिला सरपंच बिमला देवी ने बताया कि गांव में किसी भी तरह का कोई विवाद होता है तो उसे पंचायत स्तर पर आपसी भाईचारा में सुलझा लिया जाता है। गांव की करीब 2500 की आबादी है, ग्रामीण अमन पसंद हैं। मनमुटाव की यदि गांव में कोई छोटी-मोटी बात हो भी जाती है तो बुजुर्ग व्यक्ति अपने स्तर पर सुलझा लेते हैं। बवानीखेड़ा पुलिस थाना एसएचओ निरीक्षक शिवकुमार सैनी का कहना है कि सुमराखेड़ा में लंबे समय से कोई भी मामला थाना में दर्ज नहीं है।
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गुजरानी में सार्वजनिक स्थल पर युवाओं के कच्छा और कैपरी पहनने पर पाबंदी
गांव गुजरानी में समाजसेवी सुरेश शर्मा की पुत्रवधू 36 वर्षीय रेनु शर्मा गांव की सरपंच हैं। रेनु शर्मा ने जून 2024 में ग्राम पंचायत में प्रस्ताव पास कर मुनादी कराई कि सार्वजनिक स्थल पर कोई भी युवा कच्छा व कैपरी पहनकर नहीं घूमेगा। ऐसा करने पर जुर्माना लगेगा और पंचायत उस पर कानूनी कार्रवाई भी कराएगी। गुजरानी गांव में करीब 3800 मतदाता हैं, इसमें 50 फीसदी महिलाएं हैं। पंचायत के इस फैसले से गांव में लड़ाई झगड़े कम हुए और महिलाओं को भी सार्वजनिक स्थलों पर शर्मसार होने से मुक्ति मिल गई।

कुप्रथा पर चोट से अब ढाणी बीरण में महिलाओं पर नहीं घूंघट की ओट
जिले के गांव ढाणी बीरण में कुप्रथा पर चोट से अब महिलाओं पर घूंघट की ओट हट गई है। गांव की महिला सरपंच कविता देवी न केवल अब खुद घूंघट से बाहर आ गई हैं, बल्कि उन्होंने पूरे गांव की महिलाओं को घूंघट से आजादी दिला दी है। गांव के बुजुर्ग लोगों ने खुद डीसी महावीर कौशिक के सामने यह एलान किया है कि वे अपनी बहुओं को घूंघट के लिए बाध्य नहीं करेंगे। ढाणी बीरन छोटा सा गांव है, जिसके अंदर महज 600 मतदाता हैं। इसमें महिलाएं भी बराबर की भागीदारी में हैं। पंचायत चुनाव में मात्र 287 वोट और प्रतिद्वंद्वी से महज 37 वोट के अंतर से कविता देवी ने जीत दर्ज कर सरपंची हासिल की। पर्दा जैसी कुप्रथा से महिलाओं को मुक्ति दिलाने के लिए इस छोटे से गांव की कविता ने बदलाव की नई लकीर खींच दी है।


सरकारी तंत्र के विभाग की तरह काम करते हैं गांव के पंच
जूई बिचली की महिला सरपंच सुषमा देवी ने बताया कि गांव में करीब 2500 मतदाता हैं। गांव के पास एक इंच भी पंचायती भूमि नहीं है। गांव की सभी गलियां पक्की हैं और बिजली पानी की समुचित व्यवस्था है। गांव के प्रत्येक पंच को सरकारी तंत्र की तर्ज पर एक विभाग की तरह जिम्मेदारी सौंपी गई है। काम का पंचों में समान रूप से बंटवारा किया गया है, जिससे ग्रामीणों की अधिकांश समस्याएं समय से निपट जाती हैं। इनको लेकर कोई हीलाहवाली नहीं रहती। शहरों की तर्ज पर घर-घर कूड़ा उठान किया जा रहा है। हर पंच अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाता है, जिससे ग्रामीणों का जीवन स्तर भी ऊंचा उठा है।
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