{"_id":"65e36c52650f1ffb4c027e82","slug":"hailstorm-in-haryana-agriculture-minister-said-farmers-do-not-need-to-worry-about-losses-2024-03-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा में ओलावृष्टि: कृषि मंत्री बोले- नुकसान के लिए किसान को चिंता करने की जरूरत नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा में ओलावृष्टि: कृषि मंत्री बोले- नुकसान के लिए किसान को चिंता करने की जरूरत नहीं
Sat, 02 Mar 2024 11:43 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sat, 02 Mar 2024 11:43 PM IST
सार
हरियाणा में जमकर बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों को चिंता में डाल दिया है। किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। कई जगह फसलें बिछ गई हैं तो कई जगह सरसों पकी खड़ी थी।
विज्ञापन
ओलावृष्टि के बाद बसाधाम को जाने वाली सड़क पर बिछी ओलों की सफेद चादर।
- फोटो : संवाद
विस्तार
हरियाणा के कृषि एवं पशुपालन मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि ओलावृष्टि से फसलों में हुए नुकसान के लिए किसान को चिंता करने की जरूरत नहीं है। ओलावृष्टि से किसानों को नहीं सरकार को नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि लोहारू, भिवानी क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में ओलावृष्टि से जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई के लिए भिवानी के उपायुक्त को निर्देश दे दिए गए हैं।
विज्ञापन
पूरे जिले में ओलावृष्टि से हुए नुकसान का आकलन करके रिपोर्ट सरकार को भिजवाई जाएगी, ताकि किसानों को मुआवजा राशि देकर फसल नुकसान की भरपाई की जा सके।
हिसार में किसानों के अरमानों पर शनिवार को तीसरी बार ओले गिरे हैं। जिले के 60 से अधिक गांवों में ओले गिरने की शिकायत प्रशासन के पास पहुंची है। आदमपुर, बालसमंद, उकलाना, बरवाला, नलवा क्षेत्र में सरसों, गेहूं, जौ, चना आदि फसलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। दोपहर 2 से शाम 4 बजे के बीच बारिश के साथ ओले गिरे हैं।
विज्ञापन
शनिवार को 25.6 एमएम बारिश भी दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को हल्की बारिश के आसार हैं। प्रदेश के अधिकतर जिलों में बादलों का प्रभाव रहेगा। आसमान में छाए काले बादल अब किसानों को डराने लगे हैं। किसी किसान को बीमा क्लेम नहीं मिलेगा।
विज्ञापन
पश्चिमी विक्षोभ के चलते शनिवार सुबह से ही आसमान में बादल छा गए थे। कुछ देर के लिए धूप खिली, दोपहर बाद तेज हवा चलने के साथ बादल भी गहराने लगे। दोपहर करीब 2 बजे बूंदाबांदी शुरू हो गई। ग्रामीण इलाकों में कई जगहों पर तेज बारिश के साथ भीषण ओलावृष्टि हुई।
इससे पहले जिले में 19 फरवरी को ओले गिरे थे, जिसमें 26 से अधिक गांवों में फसलों में नुकसान दर्ज किया गया था। एक मार्च को भी जिले के कुछ गांवों में ओलावृष्टि हुई थी। जिले में 5.52 लाख एकड़ में गेंहू, 2.25 लाख एकड़ में सरसों, 40 हजार एकड़ में चना, 35 हजार एकड़ में जौ की फसल है। कुल करीब 8.60 लाख एकड़ में फसलें हैं।
इस बार सर्दी के दिसंबर-जनवरी महीने में बारिश शून्य रही थी। दो महीनों में सामान्य तौर पर 17.3 एमएम बारिश होती है। दिसंबर-जनवरी महीने में एक अच्छी बारिश होने से किसानों को करोड़ों रुपये की बचत होती है। बारिश होने के बाद किसानों को सिंचाई के लिए डीजल इंजन व बिजली खर्च पर रुपये खर्च नहीं करने पड़ते।
इस बार अक्तूबर से जनवरी के चार महीने में केवल 5.5 एमएम बारिश हुई। औसतन इन चार महीनों में 30.2 एमएम बारिश होनी चाहिए थी। चार महीने में सामान्य से मुकाबले 85 प्रतिशत बारिश कम रही। बारिश होने से फसलों को सबसे अधिक फायदा होता है। जिसमें गेंहू, सरसों, चना, जौ की फसल को सबसे अधिक लाभ पहुंचता है। जिले में सबसे अधिक क्षेत्र में गेंहू व सरसों की फसल लगाई जाती है।