{"_id":"6654c72db242ecd1990aef92","slug":"guruji-roamed-from-street-to-street-offering-prayers-to-the-students-yet-the-class-remained-empty-bhiwani-news-c-125-1-shsr1009-117918-2024-05-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhiwani News: गुरुजी ने गली-गली घूमकर विद्यार्थियों की खूब लगाई अरदास, फिर भी खाली रह गई क्लास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhiwani News: गुरुजी ने गली-गली घूमकर विद्यार्थियों की खूब लगाई अरदास, फिर भी खाली रह गई क्लास
Mon, 27 May 2024 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 27 May 2024 11:17 PM IST
विज्ञापन
भिवानी। भले ही सरकार ने प्ले स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में भी बाल वाटिका खोलकर बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने की तरफ सराहनीय कदम उठाया है, लेकिन इसके बावजूद अभिभावकों का रुझान अभी इनकी तरफ नहीं है। भिवानी जिले में 40 राजकीय प्राथमिक और मिडिल स्कूल ऐसे हैं, जिनकी बाल वाटिका और कक्षा पहली से आठवीं में एक भी बच्चा दाखिल नहीं हुआ है।
अब बाल वाटिका और पहली कक्षा में शून्य दाखिला वाले राजकीय प्राथमिक स्कूलों की रिपोर्ट शिक्षा अधिकारियों ने मुख्यालय को भेजने का निर्णय लिया है। वहीं इन स्कूलों के मुखियाओं को भी नोटिस थमा दिया है। बता दें कि दाखिला को लेकर सरकारी स्कूलों के टीचरों ने डोर टू डोर अभियान भी चलाया था, लेकिन इसके बावजूद भी बच्चों का दाखिला नहीं हुआ।
भिवानी जिले में करीब 450 राजकीय प्राथमिक पाठशाला हैं। सरकार ने इसी साल से जिले के 270 प्राथमिक स्कूलों में बाल वाटिका की शुरुआत की है। बाल वाटिका के अंदर आंगनबाड़ी से ऊपर और पहली कक्षा से नीचे यानी पांच से छह साल के बीच के बच्चे का दाखिला किया जा रहा है। बाल वाटिका के बाद बच्चे की उम्र छह साल होते ही उसे पहली कक्षा में दाखिला भी दिया जा रहा है। मगर प्ले स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में खुली बाल वाटिका में अभिभावकों का बच्चों को दाखिल कराने के प्रति कम ही रुझान है।
विज्ञापन
अभिभावक प्ले स्कूलों में ही अपने बच्चों को भेजना पसंद करते हैं, हालांकि बिना मान्यता के ही अधिकांश प्राइवेट स्कूलों ने प्ले विंग भी आरंभ कर दी हैं, जबकि प्राइवेट स्कूल में प्ले विंग चलाने के लिए अलग भवन और महिला एवं बाल विकास विभाग से इसके लिए अलग से एक साल के लिए संचालन की मान्यता लेना अनिवार्य है। संवाद
22 बाल वाटिका और 18 प्राइमरी स्कूलों में दाखिला शून्य
जिले की 22 बाल वाटिका में शिक्षा सत्र 2024-25 में कोई भी बच्चा दाखिल नहीं हुआ है। इसी तरह 18 ऐसे स्कूल हैं जिनमें कक्षा पहली से आठवीं तक कोई भी विद्यार्थी दाखिल नहीं हैं, जबकि इन स्कूलों में पर्याप्त टीचर भी दिए हुए हैं। अधिकांश बाल वाटिका और प्राइमरी स्कूल गांव से दूर ढाणियों में हैं, लेकिन कुछ प्राइमरी स्कूल शहर में हैं, जहां एक भी बच्चा दाखिल नहीं हो पाया।
अब गर्मियों की छुट्टियों में गुरुजी को तलाशने होंगे दाखिला के लिए बच्चे
शिक्षा विभाग द्वारा शून्य दाखिला वाले प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को अब ग्रीष्म कालीन अवकाश के दौरान दाखिला के लिए बच्चों की तलाश करनी पड़ेगी। क्योंकि विभाग द्वारा एक भी बच्चे का दाखिला नहीं कर पाने के बाद शिक्षा विभाग ने इन्हें नोटिस थमा दिया है, जिसका जवाब देने से पहले शिक्षकों को जल्द से जल्द विद्यार्थियों के दाखिला भी दर्शाने होंगे। दरअसल, बच्चों को मिले अनिवार्य रूप से शिक्षा अधिकार के तहत कक्षा पहली से आठवीं तक अगस्त तक दाखिला प्रक्रिया जारी रहेगी। इस अवधि के दौरान कोई भी बच्चा सरकारी स्कूल में दाखिला ले सकता है।
भिवानी जिले में 22 बाल वाटिका के अंदर छात्रों का दाखिला शून्य है। इसी तरह करीब 18 राजकीय प्राथमिक और मिडिल विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें कक्षा पहली से आठवीं तक कोई दाखिला नहीं हुआ है। इन स्कूलों के मुखियाओं को शिक्षा विभाग की तरफ से नोटिस दिया गया है, वहीं उन्हें जल्द से जल्द इन कक्षाओं में बच्चों के दाखिला करने की सख्त हिदायतें दी हैं, अगर दाखिला नहीं होते हैं तो फिर विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। आरटीई के तहत अगस्त तक बच्चों का आठवीं तक की कक्षाओं में दाखिला कराया जा सकता है।
-संतोष नागर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, भिवानी।
विज्ञापन
अब बाल वाटिका और पहली कक्षा में शून्य दाखिला वाले राजकीय प्राथमिक स्कूलों की रिपोर्ट शिक्षा अधिकारियों ने मुख्यालय को भेजने का निर्णय लिया है। वहीं इन स्कूलों के मुखियाओं को भी नोटिस थमा दिया है। बता दें कि दाखिला को लेकर सरकारी स्कूलों के टीचरों ने डोर टू डोर अभियान भी चलाया था, लेकिन इसके बावजूद भी बच्चों का दाखिला नहीं हुआ।
विज्ञापन
भिवानी जिले में करीब 450 राजकीय प्राथमिक पाठशाला हैं। सरकार ने इसी साल से जिले के 270 प्राथमिक स्कूलों में बाल वाटिका की शुरुआत की है। बाल वाटिका के अंदर आंगनबाड़ी से ऊपर और पहली कक्षा से नीचे यानी पांच से छह साल के बीच के बच्चे का दाखिला किया जा रहा है। बाल वाटिका के बाद बच्चे की उम्र छह साल होते ही उसे पहली कक्षा में दाखिला भी दिया जा रहा है। मगर प्ले स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में खुली बाल वाटिका में अभिभावकों का बच्चों को दाखिल कराने के प्रति कम ही रुझान है।
विज्ञापन
अभिभावक प्ले स्कूलों में ही अपने बच्चों को भेजना पसंद करते हैं, हालांकि बिना मान्यता के ही अधिकांश प्राइवेट स्कूलों ने प्ले विंग भी आरंभ कर दी हैं, जबकि प्राइवेट स्कूल में प्ले विंग चलाने के लिए अलग भवन और महिला एवं बाल विकास विभाग से इसके लिए अलग से एक साल के लिए संचालन की मान्यता लेना अनिवार्य है। संवाद
22 बाल वाटिका और 18 प्राइमरी स्कूलों में दाखिला शून्य
जिले की 22 बाल वाटिका में शिक्षा सत्र 2024-25 में कोई भी बच्चा दाखिल नहीं हुआ है। इसी तरह 18 ऐसे स्कूल हैं जिनमें कक्षा पहली से आठवीं तक कोई भी विद्यार्थी दाखिल नहीं हैं, जबकि इन स्कूलों में पर्याप्त टीचर भी दिए हुए हैं। अधिकांश बाल वाटिका और प्राइमरी स्कूल गांव से दूर ढाणियों में हैं, लेकिन कुछ प्राइमरी स्कूल शहर में हैं, जहां एक भी बच्चा दाखिल नहीं हो पाया।
अब गर्मियों की छुट्टियों में गुरुजी को तलाशने होंगे दाखिला के लिए बच्चे
शिक्षा विभाग द्वारा शून्य दाखिला वाले प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को अब ग्रीष्म कालीन अवकाश के दौरान दाखिला के लिए बच्चों की तलाश करनी पड़ेगी। क्योंकि विभाग द्वारा एक भी बच्चे का दाखिला नहीं कर पाने के बाद शिक्षा विभाग ने इन्हें नोटिस थमा दिया है, जिसका जवाब देने से पहले शिक्षकों को जल्द से जल्द विद्यार्थियों के दाखिला भी दर्शाने होंगे। दरअसल, बच्चों को मिले अनिवार्य रूप से शिक्षा अधिकार के तहत कक्षा पहली से आठवीं तक अगस्त तक दाखिला प्रक्रिया जारी रहेगी। इस अवधि के दौरान कोई भी बच्चा सरकारी स्कूल में दाखिला ले सकता है।
भिवानी जिले में 22 बाल वाटिका के अंदर छात्रों का दाखिला शून्य है। इसी तरह करीब 18 राजकीय प्राथमिक और मिडिल विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें कक्षा पहली से आठवीं तक कोई दाखिला नहीं हुआ है। इन स्कूलों के मुखियाओं को शिक्षा विभाग की तरफ से नोटिस दिया गया है, वहीं उन्हें जल्द से जल्द इन कक्षाओं में बच्चों के दाखिला करने की सख्त हिदायतें दी हैं, अगर दाखिला नहीं होते हैं तो फिर विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। आरटीई के तहत अगस्त तक बच्चों का आठवीं तक की कक्षाओं में दाखिला कराया जा सकता है।
-संतोष नागर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, भिवानी।