{"_id":"61c377d439e71b1f7860fcce","slug":"governor-will-honor-mukesh-a-woman-farmer-of-gopalwas-who-does-organic-farming-bhiwani-news-hsr6201188169","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऑर्गेनिक खेती करने वाली गोपालवास की महिला किसान मुकेश का आज राज्यपाल करेंगे सम्मानित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऑर्गेनिक खेती करने वाली गोपालवास की महिला किसान मुकेश का आज राज्यपाल करेंगे सम्मानित
विज्ञापन
मुकेश ।
- फोटो : Bhiwani
बहल (भिवानी)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह की 119 वीं जयंती पर वीरवार को आयोजित किसान दिवस पर जिन 19 प्रगतिशील महिला किसानों को राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के हाथों सम्मान मिलेगा। उसमें बहल क्षेत्र के गोपालवास गांव की मुकेश पत्नी मंदीप भी शामिल हैं।
मुकेश पिछले तीन साल से लगातार ऑर्गेनिक खेती कर क्षेत्र के किसानों के लिए नजीर बनी हैं। राज्यपाल के हाथों मिलने वाले सम्मान को लेकर उत्साहित मुकेश ने बताया कि उसे पता नहीं था कि उसके द्वारा खेती में किए गए बदलाव से जहां उसका परिवार आर्थिक रूप से संबल होगा। वहीं प्रदेश स्तर पर इतना बड़ा सम्मान मिलेगा। मुकेश ने बताया कि वह पिछले तीन साल से अपनी जमीन में पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती कर रही हैं। पेस्ट्सिाइड्स का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं करते हैं। घर की साढे़ तीन एकड़ जमीन के अलावा ठेके पर लेकर जमीन में खेती करते हुए ऑर्गेनिक गेहूं और चना की फसल ले रहे हैं, जिससे परिवार की स्थिति काफी सुदृढ़ हुई हैं।
खेती छोड़ने का मन बना लिया था, फिर मिले कृषि
वैज्ञानिक मुकेश ने बताया कि कम जोत और ज्यादा खर्च के कारण वे एक बार तो खेती को छोड़कर दूसरा व्यवसाय अपनाने का मन बना चुके थे। इत्तफाक से उनकी मुलाकात कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से हुई तो उनका इरादा फिर से बदल गया। वैज्ञानिकों ने उनको पेस्टिसाइड्स रहित ऑर्गेनिक खेती करने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने उनकी सलाह मानकर इसे अपनाया। आज उनकी आर्थिक स्थिति पहले से काफी बेहतर है और वे इसके लिए दूसरे किसानों को प्रेरित कर रहे हैं। पहले उनको फसल बेचने के लिए बाजार देखना पड़ता था, जबकि अब उनकी फसल बोने के समय से ही खरीददार मिल रहे हैं। मुकेश ने बताया कि ऑर्गेनिक से बेशक औसत पैदावार कम बैठती है, पर भाव इतने अच्छे मिलते हैं कि खेती के खर्चे निकालकर अच्छी बचत हाथ में आ जाती है।
विज्ञापन
खेती के अलावा पशुपालन से जुड़े, आय का नया मुकाम मिला
मुकेश ने बताया कि वो पिछले तीन साल से जहां जहां पेस्टिसाइड्स आधारित खेती व्यवस्था से हटकर नए प्रयोग से खेती से जुड़े हैं। वहीं पशुपालन व्यवसाय से जुड़े हैं। मुर्राह नस्ल की भैंसों को अपनी डेयरी में शामिल कर उन्होंने अच्छी आमदनी अर्जित की है। मुकेश ने बताया कि आज खेती को वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो खेती घाटे का सौदा नहीं, वरन आमदनी का सबसे बढ़िया स्रोत बन सकता है।
विज्ञापन
मुकेश पिछले तीन साल से लगातार ऑर्गेनिक खेती कर क्षेत्र के किसानों के लिए नजीर बनी हैं। राज्यपाल के हाथों मिलने वाले सम्मान को लेकर उत्साहित मुकेश ने बताया कि उसे पता नहीं था कि उसके द्वारा खेती में किए गए बदलाव से जहां उसका परिवार आर्थिक रूप से संबल होगा। वहीं प्रदेश स्तर पर इतना बड़ा सम्मान मिलेगा। मुकेश ने बताया कि वह पिछले तीन साल से अपनी जमीन में पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती कर रही हैं। पेस्ट्सिाइड्स का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं करते हैं। घर की साढे़ तीन एकड़ जमीन के अलावा ठेके पर लेकर जमीन में खेती करते हुए ऑर्गेनिक गेहूं और चना की फसल ले रहे हैं, जिससे परिवार की स्थिति काफी सुदृढ़ हुई हैं।
विज्ञापन
खेती छोड़ने का मन बना लिया था, फिर मिले कृषि
वैज्ञानिक मुकेश ने बताया कि कम जोत और ज्यादा खर्च के कारण वे एक बार तो खेती को छोड़कर दूसरा व्यवसाय अपनाने का मन बना चुके थे। इत्तफाक से उनकी मुलाकात कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से हुई तो उनका इरादा फिर से बदल गया। वैज्ञानिकों ने उनको पेस्टिसाइड्स रहित ऑर्गेनिक खेती करने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने उनकी सलाह मानकर इसे अपनाया। आज उनकी आर्थिक स्थिति पहले से काफी बेहतर है और वे इसके लिए दूसरे किसानों को प्रेरित कर रहे हैं। पहले उनको फसल बेचने के लिए बाजार देखना पड़ता था, जबकि अब उनकी फसल बोने के समय से ही खरीददार मिल रहे हैं। मुकेश ने बताया कि ऑर्गेनिक से बेशक औसत पैदावार कम बैठती है, पर भाव इतने अच्छे मिलते हैं कि खेती के खर्चे निकालकर अच्छी बचत हाथ में आ जाती है।
विज्ञापन
खेती के अलावा पशुपालन से जुड़े, आय का नया मुकाम मिला
मुकेश ने बताया कि वो पिछले तीन साल से जहां जहां पेस्टिसाइड्स आधारित खेती व्यवस्था से हटकर नए प्रयोग से खेती से जुड़े हैं। वहीं पशुपालन व्यवसाय से जुड़े हैं। मुर्राह नस्ल की भैंसों को अपनी डेयरी में शामिल कर उन्होंने अच्छी आमदनी अर्जित की है। मुकेश ने बताया कि आज खेती को वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो खेती घाटे का सौदा नहीं, वरन आमदनी का सबसे बढ़िया स्रोत बन सकता है।