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Bhiwani News: जिला मुख्यालय का सरकारी अस्पताल, नहीं 27 चिकित्सक 32 नर्स, व्यवस्था भी बदहाल
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नागरिक अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सक कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। नागरिक अस्पताल में रोग विशेषज्ञ चिकित्सक, मेडिकल ऑफिसर और स्टाफ नर्सों की कमी के कारण मरीजों का दर्द बढ़ रहा है। ऐसे में मरीज उपचार के लिए पीजीआईएमएस रोहतक व निजी अस्पतालों में जा रहे हैं। नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों के 74 में से 27 पद खाली है, जिनमें एसएमओ के छह और मेडिकल ऑफिसर के 21 पद शामिल हैं। वहीं, स्टाफ नर्स के भी 32 पद खाली हैं। वहीं अस्पताल में न्यूरो सर्जन का पद लंबे समय से खाली पड़ा है, जबकि बाल रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ भी महज एक-एक है।
ऐसे में ओपीडी में आने वाले मरीजों का उपचार करने में चिकित्सकों के पसीने छूट जाते हैं। ओपीडी के साथ वार्ड, आपातकालीन सेवाएं और पोस्टमार्टम ड्यूटी के कारण चिकित्सकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को पीजीआई रेफर करना पड़ रहा है। साथ ही ओपीडी में दवाइयों की कमी बनी हुई है, जिसके कारण मरीजों को मेडिकल स्टोर से रुपये देकर दवाइयां लेनी पड़ रही है।
एंबुलेंस लगा रही रोजाना रोहतक के 15 से 20 चक्कर
नागरिक अस्पताल में चार एडवांस लाइफ स्पॉट एंबुलेंस हैं, जिनमें वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सहित सभी आधुनिक सुविधाएं है। जबकि बच्चों के लिए एक नियो नेटल एंबुलेंस है। वहीं एंबुलेंस पर 15 चालक और 12 ईएमटी तैनात है। नागरिक अस्पताल में रोजाना एंबुलेंस सहायता के लिए औसतन 65 कॉल आती है। इनमें से 15 से 20 कॉल पीजीआईएमएस रोहतक के लिए आती है, जबकि अन्य कॉल गर्भवती महिलाओं, जच्चा-बच्चा, सड़क दुर्घटना में घायलों सहित अन्य आपातकालीन कारणों की है। ऐसे में एक गाड़ी तीन से चार चक्कर रोजाना पीजीआईएमएस रोहतक के लगा रही है।
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ओपीडी में आ रहे रोजाना 1200 से अधिक मरीज
नागरिक अस्पताल की ओपीडी में विभिन्न बीमारियों के रोजाना 1200 से अधिक मरीज जांच करवाने पहुंच रहे हैं। इनमें से 200 से 250 मरीज फिजिशियन कक्ष, 200 से 220 मरीज बाल रोग विशेषज्ञ, 210 से 220 मरीज महिला रोग विशेषज्ञ, ईएनटी के 80 से 100, नेत्र रोग विशेषज्ञ के 100 से 120 मरीज, दंत रोग चिकित्सक से 70 से 80, सर्जन से 120 से 130 सहित विभिन्न बीमारियों की जांच करवाने पहुंच रहे हैं। वहीं, मरीजों को बेहतर चिकित्सक सुविधा नहीं मिल पाने के कारण वे पीजीआई रोहतक या फिर निजी अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। निजी अस्पतालों में 200 से लेकर 400 रुपये ओपीडी फीस लग रही है। इसमें दवाइयों का खर्च एक हजार रुपये से अधिक रहता है।
नागरिक अस्पताल में स्टाफ की स्थिति
पद स्वीकृत कार्यरत खाली
एसएमओ 08 02 06
डिप्टी मेडिकल सुपरिडेंट 02 00 02
एमओ 66 45 21
मेटरन 01 00 01
एसिस्टेंट 02 00 02
नर्सिंग सिस्टर 14 07 07
स्टाफ नर्स 143 111 32
एलटी 47 20 27
सहायक 27 14 13
क्लर्क 10 06 04
ओपीडी में 40 से अधिक तरह की नहीं दवाइयां
नागरिक अस्पताल में दवाइयों को भी टोटा हो गया है। मजबूरन मरीजों को महंगे दामों पर बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। नागरिक अस्पताल में गैस, बीपी, मनोरोग, दर्द की जेल, आंखों सहित बच्चों को बुखार में पीने के लिए देने वाली दवा नहीं है। अस्पताल में सेफेक्सीम टैबलेट, ओफ्लोक्सासिन टैबलेट, मेट्रोनिडाजोल टैबलेट, सिल्वर सल्फाडाइजिन क्रीम, डाइक्लोफिनेक सोडियम टेबलेट, डाइक्लोफिनेक जैल, आइबुप्रोफेन टैबलेट, सिप्रोफ्लोक्सासिन आई ड्रॉप नहीं है। वहीं ओमेप्राजोल कैप्सूल, रैनिटिडिन टेबलेट, एंटी एलर्जी क्रीम, कफ सिरप, एसिटाइलसैलिसाइलिक एसिड, एमोक्सिलिन 250 एमजी, एनोवेट क्रीम, बुडेसोनिड, कैल्शियम ऑरल सॉल्यूशन, कैल्शियम साल्ट सिरप सहित 40 से अधिक तरह की दवाइयां नहीं हैं।
ओपीडी के बाद बंद हो रहा एक्स-रे कक्ष
अस्पताल में मरीजों के टेस्ट करने के लिए महज एक एक्स-रे मशीन है, जिस पर सरकारी नियमानुसार 50 से 60 एक्स-रे करने होते हैं। मगर मरीज अधिक होने के कारण इस मशीन पर रोजाना 200 से अधिक एक्स-रे हो रहे हैं। साथ ही एक्स-रे करने के लिए आठ रेडियोग्राफर की पोस्ट हैं जिन पर सिर्फ दो रेडियोग्राफर नियुक्त हैं। ऐसे में महज दो रेडियोग्राफर के कंधों पर ही कार्य का भार है। पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण एक्सरे की सुविधा सिर्फ ओपीडी टाइमिंग में है। इसके बाद मरीजों को एक्स-रे के लिए निजी लैब में अपनी जेब कटवानी पड़ रही है।
अस्पताल में चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ के पद लंबे समय से खाली है। चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र लिख चुकी है। उम्मीद है जल्द ही नए चिकित्सक व अन्य स्टाफ के रिक्त पद भर जाएंगे। मरीजों को उपचार के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है।
- डॉ. एडविन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।
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ऐसे में ओपीडी में आने वाले मरीजों का उपचार करने में चिकित्सकों के पसीने छूट जाते हैं। ओपीडी के साथ वार्ड, आपातकालीन सेवाएं और पोस्टमार्टम ड्यूटी के कारण चिकित्सकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को पीजीआई रेफर करना पड़ रहा है। साथ ही ओपीडी में दवाइयों की कमी बनी हुई है, जिसके कारण मरीजों को मेडिकल स्टोर से रुपये देकर दवाइयां लेनी पड़ रही है।
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एंबुलेंस लगा रही रोजाना रोहतक के 15 से 20 चक्कर
नागरिक अस्पताल में चार एडवांस लाइफ स्पॉट एंबुलेंस हैं, जिनमें वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सहित सभी आधुनिक सुविधाएं है। जबकि बच्चों के लिए एक नियो नेटल एंबुलेंस है। वहीं एंबुलेंस पर 15 चालक और 12 ईएमटी तैनात है। नागरिक अस्पताल में रोजाना एंबुलेंस सहायता के लिए औसतन 65 कॉल आती है। इनमें से 15 से 20 कॉल पीजीआईएमएस रोहतक के लिए आती है, जबकि अन्य कॉल गर्भवती महिलाओं, जच्चा-बच्चा, सड़क दुर्घटना में घायलों सहित अन्य आपातकालीन कारणों की है। ऐसे में एक गाड़ी तीन से चार चक्कर रोजाना पीजीआईएमएस रोहतक के लगा रही है।
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ओपीडी में आ रहे रोजाना 1200 से अधिक मरीज
नागरिक अस्पताल की ओपीडी में विभिन्न बीमारियों के रोजाना 1200 से अधिक मरीज जांच करवाने पहुंच रहे हैं। इनमें से 200 से 250 मरीज फिजिशियन कक्ष, 200 से 220 मरीज बाल रोग विशेषज्ञ, 210 से 220 मरीज महिला रोग विशेषज्ञ, ईएनटी के 80 से 100, नेत्र रोग विशेषज्ञ के 100 से 120 मरीज, दंत रोग चिकित्सक से 70 से 80, सर्जन से 120 से 130 सहित विभिन्न बीमारियों की जांच करवाने पहुंच रहे हैं। वहीं, मरीजों को बेहतर चिकित्सक सुविधा नहीं मिल पाने के कारण वे पीजीआई रोहतक या फिर निजी अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। निजी अस्पतालों में 200 से लेकर 400 रुपये ओपीडी फीस लग रही है। इसमें दवाइयों का खर्च एक हजार रुपये से अधिक रहता है।
नागरिक अस्पताल में स्टाफ की स्थिति
पद स्वीकृत कार्यरत खाली
एसएमओ 08 02 06
डिप्टी मेडिकल सुपरिडेंट 02 00 02
एमओ 66 45 21
मेटरन 01 00 01
एसिस्टेंट 02 00 02
नर्सिंग सिस्टर 14 07 07
स्टाफ नर्स 143 111 32
एलटी 47 20 27
सहायक 27 14 13
क्लर्क 10 06 04
ओपीडी में 40 से अधिक तरह की नहीं दवाइयां
नागरिक अस्पताल में दवाइयों को भी टोटा हो गया है। मजबूरन मरीजों को महंगे दामों पर बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। नागरिक अस्पताल में गैस, बीपी, मनोरोग, दर्द की जेल, आंखों सहित बच्चों को बुखार में पीने के लिए देने वाली दवा नहीं है। अस्पताल में सेफेक्सीम टैबलेट, ओफ्लोक्सासिन टैबलेट, मेट्रोनिडाजोल टैबलेट, सिल्वर सल्फाडाइजिन क्रीम, डाइक्लोफिनेक सोडियम टेबलेट, डाइक्लोफिनेक जैल, आइबुप्रोफेन टैबलेट, सिप्रोफ्लोक्सासिन आई ड्रॉप नहीं है। वहीं ओमेप्राजोल कैप्सूल, रैनिटिडिन टेबलेट, एंटी एलर्जी क्रीम, कफ सिरप, एसिटाइलसैलिसाइलिक एसिड, एमोक्सिलिन 250 एमजी, एनोवेट क्रीम, बुडेसोनिड, कैल्शियम ऑरल सॉल्यूशन, कैल्शियम साल्ट सिरप सहित 40 से अधिक तरह की दवाइयां नहीं हैं।
ओपीडी के बाद बंद हो रहा एक्स-रे कक्ष
अस्पताल में मरीजों के टेस्ट करने के लिए महज एक एक्स-रे मशीन है, जिस पर सरकारी नियमानुसार 50 से 60 एक्स-रे करने होते हैं। मगर मरीज अधिक होने के कारण इस मशीन पर रोजाना 200 से अधिक एक्स-रे हो रहे हैं। साथ ही एक्स-रे करने के लिए आठ रेडियोग्राफर की पोस्ट हैं जिन पर सिर्फ दो रेडियोग्राफर नियुक्त हैं। ऐसे में महज दो रेडियोग्राफर के कंधों पर ही कार्य का भार है। पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण एक्सरे की सुविधा सिर्फ ओपीडी टाइमिंग में है। इसके बाद मरीजों को एक्स-रे के लिए निजी लैब में अपनी जेब कटवानी पड़ रही है।
अस्पताल में चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ के पद लंबे समय से खाली है। चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र लिख चुकी है। उम्मीद है जल्द ही नए चिकित्सक व अन्य स्टाफ के रिक्त पद भर जाएंगे। मरीजों को उपचार के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है।
- डॉ. एडविन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।