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सुदामा पेट के लिए नहीं बल्कि आत्मा के लिए कर रहे थे कर्म : अनिता शास्त्री
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भागवत कथा का गुणगान करती कथा वाचक अनिता शास्त्री। विज्ञप्ति
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। दिनोद गेट स्थित गोमती गिरी अखाड़ा मंदिर में जारी श्रीमद्भागवत महापुराण कथा की कड़ी में रुकमणी विवाह की कथा का वाचन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व विधायक डॉ. शिवशंकर भारद्वाज ने शिरकत की। वहीं मंगलवार को कृष्ण-सुदामा की कथा का वाचन किया गया।
श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में सान्निध्य गीता भवन प्रबंधक महंत भग्गु गिरी महाराज का रहा। बृजमोहन कौशिक ने कहा कि कथा को सुनने के लिए रोजाना सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सच्चे मन से जो काम करते हैं, उसकी मदद ईश्वर भी करते हैं। कथा वाचिका बाल व्यास अनिता शास्त्री ने कहा कि सुदामा के दरिद्र होने का कारण यह नहीं था कि वे धन का अर्जन नहीं कर सकते थे। मगर सुदामा पेट के लिए नहीं बल्कि आत्मा के लिए कर्म कर रहे थे। पत्नी के कहने पर सुदामा का द्वारिका आगमन और प्रभु द्वारा सुदामा के सत्कार पर स्वामी ने कहा कि यह व्यक्ति का नहीं व्यक्तित्व का सत्कार है, यह चित की नहीं चरित्र की पूजा है। मित्रता में बदले की भावना का स्थान नहीं होना चाहिए। इस दौरान कृष्ण-सुदामा की मनोहारी झांकी के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप ने जैसे ही सुदामा बने स्वरूप के पैर धोए पंडाल में मौजूद श्रोता भावुक हो गए। कथा के दौरान भजनामृत की फुहार पर श्रोताओं का तन-मन झूम उठा।
इस मौके पर महंत भग्गु गिरी महाराज ने कहा कि देश की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना से शुरू की गई श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का समापन 16 नवंबर को हवन-यज्ञ एवं भंडारे के साथ किया जाएगा। इस अवसर पर नारायण नाथ महाराज, धर्मपाल शर्मा, सामाजिक समरसता मंच जिला संयोजक प्रेमनाथ कौशिक, नरेंद्र सिंह तवर, विकास शर्मा, आशु सेन, अंशु लोहिया, राजेंद्र भरतवाल, शिव कुमार, राहुल गौड़, शिवकांत पाराशर अनिल, फूल कुमार पाराशर, उदय नारायण दुबे, अधिवक्ता नवीन, मुकेश अग्रोहिया, अशोक मिश्रा मौजूद रहे। संवाद
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श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में सान्निध्य गीता भवन प्रबंधक महंत भग्गु गिरी महाराज का रहा। बृजमोहन कौशिक ने कहा कि कथा को सुनने के लिए रोजाना सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सच्चे मन से जो काम करते हैं, उसकी मदद ईश्वर भी करते हैं। कथा वाचिका बाल व्यास अनिता शास्त्री ने कहा कि सुदामा के दरिद्र होने का कारण यह नहीं था कि वे धन का अर्जन नहीं कर सकते थे। मगर सुदामा पेट के लिए नहीं बल्कि आत्मा के लिए कर्म कर रहे थे। पत्नी के कहने पर सुदामा का द्वारिका आगमन और प्रभु द्वारा सुदामा के सत्कार पर स्वामी ने कहा कि यह व्यक्ति का नहीं व्यक्तित्व का सत्कार है, यह चित की नहीं चरित्र की पूजा है। मित्रता में बदले की भावना का स्थान नहीं होना चाहिए। इस दौरान कृष्ण-सुदामा की मनोहारी झांकी के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप ने जैसे ही सुदामा बने स्वरूप के पैर धोए पंडाल में मौजूद श्रोता भावुक हो गए। कथा के दौरान भजनामृत की फुहार पर श्रोताओं का तन-मन झूम उठा।
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इस मौके पर महंत भग्गु गिरी महाराज ने कहा कि देश की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना से शुरू की गई श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का समापन 16 नवंबर को हवन-यज्ञ एवं भंडारे के साथ किया जाएगा। इस अवसर पर नारायण नाथ महाराज, धर्मपाल शर्मा, सामाजिक समरसता मंच जिला संयोजक प्रेमनाथ कौशिक, नरेंद्र सिंह तवर, विकास शर्मा, आशु सेन, अंशु लोहिया, राजेंद्र भरतवाल, शिव कुमार, राहुल गौड़, शिवकांत पाराशर अनिल, फूल कुमार पाराशर, उदय नारायण दुबे, अधिवक्ता नवीन, मुकेश अग्रोहिया, अशोक मिश्रा मौजूद रहे। संवाद
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