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बच्चों को दें पौष्टिक आहार, उन पर न हो कोरोना का वार
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नागरिक अस्पताल में बच्चें के वजन चेक करते स्वास्थ्य कर्मी। विज्ञप्ति
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। कोरोना की तीसरी लहर और ओमिक्रॉन की आशंका के साथ ही अभिभावकों को अपने बच्चों की सेहत के प्रति चिंता बढ़ने लगी है। इनमें विशेषतौर पर मां अपने लाड़ले और लाड़ली की सेहत को बेहतर करने के लिए हर संभव प्रयास में जुट गई हैं। इसके लिए कोई अपने बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के लिए गूगल पर ज्ञानवर्धक सामग्री सर्च कर रहा है तो वहीं कुछ अभिभावक अस्पताल में आहार विशेषज्ञ की सलाह लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
नागरिक अस्पताल में इन दिनों बाल रोग विशेषज्ञ और काउंसलर के पास बच्चों के संतुलित आहार की जानकारी लेने के लिए अधिक अभिभावक आने लगे हैं। पहले सामान्यत: माह में पांच से 10 अभिभावक अपने बच्चों के आहार के बारे में जानकारी लेने आते थे, मगर इन दिनों में हर माह 50 से 60 अभिभावक अस्पताल में पहुंच रहे हैं। हर कोई अपने बच्चे को कोरोना की आशंकित तीसरी लहर से सुरक्षित करने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में जुटा हुआ है। आहार विशेषज्ञों और बच्चों के काउंसलरों का कहना है कि कोरोना के इस दौर में बच्चों को दुकानों पर मिलने वाले डब्बा बंद खाद्य सामग्री से परहेज करवाएं और अपने घर की रसोई में बना पौष्टिक आहार ही खिलाएं, जोकि बच्चों के लिए अधिक फायदेमंद होगा। इसके साथ ही कुछ अभिभावक अपने बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के चक्कर में उन्हें दिनभर खिलाते रहते हैं, जिसकी वजह से बच्चों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है। ऐसे में बच्चों को अधिक खाना खिलाने की बजाय तय समय पर व उचित आहार दें, जो उन्हें स्वस्थ रख सके। इसके साथ ही अभिभावक इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बच्चों को जो कुछ भी खिला रहे हैं, उस आहार की सूची जरूर बनाएं। उस सूची के अनुरूप ही सुबह से लेकर शाम तक का खाना खिलाएं। इसमें ध्यान रहे की खाने की सूची में समय-समय पर बदलाव करते रहें, ताकि बच्चे खाने से परहेज न करें।
हरी सब्जियों का प्रयोग ज्यादा करें
बच्चों को पत्तागोभी, फूलगोभी, पालक और बथुआ जैसी पत्तेदार सब्जियां ज्यादा खिलाएं। ये संक्रमण से लड़ने में सहायता करती हैं। इनके साथ ही अदरक, काली मिर्च, शहद, गिलोय का पानी, आंवले का मुरब्बा, हल्दी का दूध, बादाम, सूप, दूध, दही को आहार सूची में शामिल करें। साथ में संतरा, नींबू जैसे खट्टे फल जरूर दें। अभिभावक इस बाद का ध्यान रखें की बच्चे खाने से ऊब न जाएं, इसलिए खाने में बदलाव करते रहें।
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इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- ज्यादा खाना खाने से सेहत नहीं बढ़ती बल्कि पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। इसलिए कम खाना दें, लेकिन जो दें पौष्टिक हो।
- सब्जियों को ज्यादा न पकाएं। इससे महत्वपूर्ण विटामिन की हानि हो सकती है।
- चीनी और नमक बच्चों का कम ही दें।
- ध्यान रहे बच्चों को मसालेदार भोजन न दें।
- ट्रांसफैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ जैसे तले हुए खाद्य पदार्थ, पिज्जा, बर्गर, चाउमीन सहित सभी फास्ट फूड देने से परहेज करें।
पौष्टिक आहार खिलाएं
इन दिनों काफी अभिभावक अपने बच्चों के खाने-पीने की समस्या को लेकर काउंसिलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। बच्चे लगातार एक ही तरह के खाने से ऊब जाते हैं, जिसकी वजह से कई बार खाना नहीं खाते। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों की पसंद का विशेष ध्यान रखें और उन्हें पौष्टिक आहार खिलाएं। ठीक से खाना न खाने की वजह से बच्चे के स्वास्थ्य पर उसका काफी असर पड़ता है, जिसकी वजह से बच्चे का वजन और कद बढ़ने में भी परेशानी हो सकती है तो ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
- बबीता, काउंसलर, नागरिक अस्पताल।
पांच साल से कम उम्र के बच्चे का न लगाएं मास्क
कोरोना संक्रमण की आशंकित तीसरी लहर को लेकर अभिभावक अपने बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरत रहे हैं। यह बहुत बढ़िया बात है। अभिभावक ध्यान रखें कि बच्चों को पौष्टिक आहार खिलाएं और फास्ट फूड से परहेज करें। साथ ही पांच साल से कम उम्र के बच्चे को मास्क न लगाएं। अगर बच्चों को कोरोना के लक्षण हैं तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क कर जांच करवाएं। यह डरने का समय नहीं है, बल्कि सावधानी रखने का समय है।
- डॉ. रीटा सिसोदिया, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल।
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नागरिक अस्पताल में इन दिनों बाल रोग विशेषज्ञ और काउंसलर के पास बच्चों के संतुलित आहार की जानकारी लेने के लिए अधिक अभिभावक आने लगे हैं। पहले सामान्यत: माह में पांच से 10 अभिभावक अपने बच्चों के आहार के बारे में जानकारी लेने आते थे, मगर इन दिनों में हर माह 50 से 60 अभिभावक अस्पताल में पहुंच रहे हैं। हर कोई अपने बच्चे को कोरोना की आशंकित तीसरी लहर से सुरक्षित करने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में जुटा हुआ है। आहार विशेषज्ञों और बच्चों के काउंसलरों का कहना है कि कोरोना के इस दौर में बच्चों को दुकानों पर मिलने वाले डब्बा बंद खाद्य सामग्री से परहेज करवाएं और अपने घर की रसोई में बना पौष्टिक आहार ही खिलाएं, जोकि बच्चों के लिए अधिक फायदेमंद होगा। इसके साथ ही कुछ अभिभावक अपने बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के चक्कर में उन्हें दिनभर खिलाते रहते हैं, जिसकी वजह से बच्चों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है। ऐसे में बच्चों को अधिक खाना खिलाने की बजाय तय समय पर व उचित आहार दें, जो उन्हें स्वस्थ रख सके। इसके साथ ही अभिभावक इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बच्चों को जो कुछ भी खिला रहे हैं, उस आहार की सूची जरूर बनाएं। उस सूची के अनुरूप ही सुबह से लेकर शाम तक का खाना खिलाएं। इसमें ध्यान रहे की खाने की सूची में समय-समय पर बदलाव करते रहें, ताकि बच्चे खाने से परहेज न करें।
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हरी सब्जियों का प्रयोग ज्यादा करें
बच्चों को पत्तागोभी, फूलगोभी, पालक और बथुआ जैसी पत्तेदार सब्जियां ज्यादा खिलाएं। ये संक्रमण से लड़ने में सहायता करती हैं। इनके साथ ही अदरक, काली मिर्च, शहद, गिलोय का पानी, आंवले का मुरब्बा, हल्दी का दूध, बादाम, सूप, दूध, दही को आहार सूची में शामिल करें। साथ में संतरा, नींबू जैसे खट्टे फल जरूर दें। अभिभावक इस बाद का ध्यान रखें की बच्चे खाने से ऊब न जाएं, इसलिए खाने में बदलाव करते रहें।
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इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- ज्यादा खाना खाने से सेहत नहीं बढ़ती बल्कि पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। इसलिए कम खाना दें, लेकिन जो दें पौष्टिक हो।
- सब्जियों को ज्यादा न पकाएं। इससे महत्वपूर्ण विटामिन की हानि हो सकती है।
- चीनी और नमक बच्चों का कम ही दें।
- ध्यान रहे बच्चों को मसालेदार भोजन न दें।
- ट्रांसफैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ जैसे तले हुए खाद्य पदार्थ, पिज्जा, बर्गर, चाउमीन सहित सभी फास्ट फूड देने से परहेज करें।
पौष्टिक आहार खिलाएं
इन दिनों काफी अभिभावक अपने बच्चों के खाने-पीने की समस्या को लेकर काउंसिलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। बच्चे लगातार एक ही तरह के खाने से ऊब जाते हैं, जिसकी वजह से कई बार खाना नहीं खाते। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों की पसंद का विशेष ध्यान रखें और उन्हें पौष्टिक आहार खिलाएं। ठीक से खाना न खाने की वजह से बच्चे के स्वास्थ्य पर उसका काफी असर पड़ता है, जिसकी वजह से बच्चे का वजन और कद बढ़ने में भी परेशानी हो सकती है तो ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
- बबीता, काउंसलर, नागरिक अस्पताल।
पांच साल से कम उम्र के बच्चे का न लगाएं मास्क
कोरोना संक्रमण की आशंकित तीसरी लहर को लेकर अभिभावक अपने बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरत रहे हैं। यह बहुत बढ़िया बात है। अभिभावक ध्यान रखें कि बच्चों को पौष्टिक आहार खिलाएं और फास्ट फूड से परहेज करें। साथ ही पांच साल से कम उम्र के बच्चे को मास्क न लगाएं। अगर बच्चों को कोरोना के लक्षण हैं तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क कर जांच करवाएं। यह डरने का समय नहीं है, बल्कि सावधानी रखने का समय है।
- डॉ. रीटा सिसोदिया, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल।