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पूर्व मुख्यमंत्री औमप्रकाश चौटाला ने रोहनात धरने पर पहुंच किया समर्थन
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बवानीखेड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी ओमप्रकाश चौटाला बुधवार को गांव रोहनात में पिछले कई दिनों से अपनी मांगो को लेकर ग्रामीणों द्वारा चलाए जा रहे धरने पर पहुंचे और अपना समर्थन दिया। उन्होंने ग्रामीणों की मांग को जायज बताया। पूर्व मुख्यमंत्री चौटाला ने आरोप लगाया कि सरकार यहां के ग्रामीणों की मांगों की अनदेखी कर रही है। इससे ग्रामीणों को उनका पूरा हक नहीं मिल पा रहा।
उन्होंने कहा कि गांव रोहनात के लोगों ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़ कर भाग लिया था और इस दौरान मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस गांव का इतिहास बढ़ा गौरवशाली है। सरकार को प्राथमिकता के आधार पर यहां के ग्रामीणों की मांग पूरी करनी चाहिए। इस दौरान कमेटी के अध्यक्ष मा. प्रदीप कौशिक व धर्मवीर फौजी ने मांगों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा। पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगर प्रदेश में उनकी सरकार बनती है तो पहली कलम से ही सभी मांगों को पूरा किया जाएगा।
बता दें कि गांव रोहनात के ग्रामीण गत 10 अगस्त से अपनी मांगों को लेकर 36 दिन से लगातार धरनारत हैं। 17 अगस्त को धरने पर बैठे ग्रामीण संतलाल की मौत हो गई थी। संललाल कि मौत के बाद ग्रामीण उसके शव के साथ 10 दिन तक धरना दिया था। बाद में जिला प्रशासन से सहमति के बाद संतलाल के शव का अंतिम संस्कार किया गया था। इसके बाद भी अपनी लंबित मांगो को लेकर ग्रामीणों का धरना जारी है। वे अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए प्रशासन व सरकार से अनुरोध कर रहे हैं। कमेटी अध्यक्ष प्रदीप कौशिक ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने परिवार को सहायता राशि के नाम पर कुछ राशि मुहैया करवाई है। उसके बाद जिला उपायुक्त का स्थानांतरण हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानांतरण के बाद नवनियुक्त अधिकारी उनकी मांगों को पूरा करने में आनाकानी कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों में प्रशासन व सरकार के खिलाफ रोष पनपता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं की गई तो एक बार फिर से बड़ा आंदोलन हो सकता है। वहीं दूसरी ओर बुधवार सायं को ग्रामीणों ने गांव में कैंडल मार्च भी निकाला और 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले ग्रामीणों को नमन किया। संवाद
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उन्होंने कहा कि गांव रोहनात के लोगों ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़ कर भाग लिया था और इस दौरान मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस गांव का इतिहास बढ़ा गौरवशाली है। सरकार को प्राथमिकता के आधार पर यहां के ग्रामीणों की मांग पूरी करनी चाहिए। इस दौरान कमेटी के अध्यक्ष मा. प्रदीप कौशिक व धर्मवीर फौजी ने मांगों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा। पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगर प्रदेश में उनकी सरकार बनती है तो पहली कलम से ही सभी मांगों को पूरा किया जाएगा।
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बता दें कि गांव रोहनात के ग्रामीण गत 10 अगस्त से अपनी मांगों को लेकर 36 दिन से लगातार धरनारत हैं। 17 अगस्त को धरने पर बैठे ग्रामीण संतलाल की मौत हो गई थी। संललाल कि मौत के बाद ग्रामीण उसके शव के साथ 10 दिन तक धरना दिया था। बाद में जिला प्रशासन से सहमति के बाद संतलाल के शव का अंतिम संस्कार किया गया था। इसके बाद भी अपनी लंबित मांगो को लेकर ग्रामीणों का धरना जारी है। वे अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए प्रशासन व सरकार से अनुरोध कर रहे हैं। कमेटी अध्यक्ष प्रदीप कौशिक ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने परिवार को सहायता राशि के नाम पर कुछ राशि मुहैया करवाई है। उसके बाद जिला उपायुक्त का स्थानांतरण हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानांतरण के बाद नवनियुक्त अधिकारी उनकी मांगों को पूरा करने में आनाकानी कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों में प्रशासन व सरकार के खिलाफ रोष पनपता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं की गई तो एक बार फिर से बड़ा आंदोलन हो सकता है। वहीं दूसरी ओर बुधवार सायं को ग्रामीणों ने गांव में कैंडल मार्च भी निकाला और 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले ग्रामीणों को नमन किया। संवाद
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