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Bhiwani News: फर्स्ट एड बॉक्स खाली, मुश्किल में सवारी
Fri, 08 Sep 2023 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 08 Sep 2023 11:21 PM IST
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भिवानी। रोडवेज बसों में अगर कोई चोटिल हो जाए तो उसके लिए न पट्टी मिलेगी न जख्मों पर लगाने के लिए कोई मलहम। बसों के खाली फर्स्ट एड बॉक्स व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
भिवानी डिपो में 220 बस लंबी दूरी और लोकल रूटों पर दौड़ रही हैं, लेकिन किसी भी बस में फर्स्ट एड बॉक्स की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। डिपो को हाल ही में 61 नई बस भी मिली हैं, इनके अंदर फर्स्ट एड बॉक्स तो लगे हैं, मगर अंदर सामान गायब है। बसों में लगे ये बॉक्स खाली हैं। जबकि डिपो में 159 बस पुरानी हैं, इनके अंदर तो फर्स्ट एड बॉक्स ही गायब है।
हरियाणा राज्य परिवहन विभाग नई बसों को डिपो को सुपुर्द करने के दौरान उनमें फर्स्ट एड बॉक्स सहित यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े उपकरण भी मुहैया कराता है। जबकि पुरानी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स सहित अन्य सुरक्षा प्रबंधों के लिए सामान की खरीद डिपो स्तर पर ही गठित कमेटी की ओर से की जाती है। इससे इन बसों में सुरक्षा मानकों को पूरा किया जा सके। भिवानी डिपो में आयशर कंपनी की 21 मिनी बस भी हाल ही में शामिल हुई हैं। इन बसों में इमरजेंसी के दौरान अलार्म, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र के अलावा आपात स्थिति में एग्जिट विंडो और डोर भी दिए गए हैं।
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पड़ताल के दौरान जब इन बसों के अंदर फर्स्ट एड बॉक्स की स्थिति जांची तो ये बॉक्स अंदर से खाली मिले। किसी बॉक्स के अंदर बीड़ी के रैपर पड़े थे तो किसी बॉक्स के अंदर कुरकुरे खाने के बाद उसका कचरा अंदर भरा हुआ था। पुरानी बसों के अंदर तो न बॉक्स था न अन्य सुरक्षा के कोई मानक। भिवानी डिपो में भिवानी बस स्टैंड से 130 बसों का संचालन हो रहा है। लोहारू सब डिपो से 46 और तोशाम सब डिपो से 44 रोडवेज बसें चल रही हैं। इनमें भिवानी बस स्टैंड से 13 मिनी बसें, तोशाम और लोहारू से चार-चार मिनी बसों का संचालन हो रहा है। रोडवेज की करीब 25 बस तो दूसरे राज्यों तक भी दौड़ लगा रही हैं। इन बसों में तो फस्ट एड बॉक्स के अंदर सामान बेहद जरूरी है।
मैं अक्सर रोडवेज बसों में सफर रहता हूं। लेकिन मैंने आज तक किसी भी रोडवेज बस में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं देखा। एक बार तो बस में चढ़ते समय महिला को बस के एक उखड़े हुए हिस्से की पत्ती से खरोंच आ गई। इसका खून भी बह रहा था। मगर उसको बांधने के लिए न पट्टी मिली न मलहम। दूसरी महिला ने अपने दुपट्टा फाड़कर उसके हाथ से बह रहे खून को रोका। अगर फर्स्ट एड बॉक्स में सामान होता तो महिला को तुरंत प्राथमिक उपचार मिल सकता था।
-महेंद्र श्योराण, वरिष्ठ नागरिक सेक्टर 13 निवासी।
बसों की पासिंग होती है तब सभी सुरक्षा मानकों की जांच होती है। लेकिन जब ये बसें सड़क पर दौड़ती हैं तब उनके अंदर अधिकांश सुरक्षा मानक पूरे नहीं होते। इन्हीं में एक है फर्स्ट एड बॉक्स। ये मानक बेहद जरूरी इसलिए है कि इससे आपात स्थिति में किसी मुसाफिर की जान जाने से बचाई जा सकती है। फर्स्ट एड बॉक्स के अंदर कुछ जरूरी दवाएं रखना अनिवार्य किया गया है। जो समय पर अगर मिल जाए तो उसे अस्पताल ले जाने तक बचाया जा सकता है।
-अभिषेक बंसल, युवा व्यापारी
सभी रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स के सामान मुहैया कराया गया है। इस सामान की जिम्मेदारी बस के चालक और परिचालक को दी गई है। अगर किसी बस में फर्स्ट एड का सामान नहीं है तो नाजीर से प्राप्त कर सकता है। कर्मशाला प्रबंधक की तरफ से भी बसों में सुरक्षा मानक पूरे किए जाने की व्यवस्थाएं कराई गई हैं। अगर फिर भी कहीं कोई कमी है तो उसे जल्द दूर कराएंगे।
- डॉ. नेत्रपाल खत्री, महाप्रबंधक, भिवानी डिपो हरियाणा राज्य परिवहन विभाग।
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भिवानी डिपो में 220 बस लंबी दूरी और लोकल रूटों पर दौड़ रही हैं, लेकिन किसी भी बस में फर्स्ट एड बॉक्स की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। डिपो को हाल ही में 61 नई बस भी मिली हैं, इनके अंदर फर्स्ट एड बॉक्स तो लगे हैं, मगर अंदर सामान गायब है। बसों में लगे ये बॉक्स खाली हैं। जबकि डिपो में 159 बस पुरानी हैं, इनके अंदर तो फर्स्ट एड बॉक्स ही गायब है।
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हरियाणा राज्य परिवहन विभाग नई बसों को डिपो को सुपुर्द करने के दौरान उनमें फर्स्ट एड बॉक्स सहित यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े उपकरण भी मुहैया कराता है। जबकि पुरानी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स सहित अन्य सुरक्षा प्रबंधों के लिए सामान की खरीद डिपो स्तर पर ही गठित कमेटी की ओर से की जाती है। इससे इन बसों में सुरक्षा मानकों को पूरा किया जा सके। भिवानी डिपो में आयशर कंपनी की 21 मिनी बस भी हाल ही में शामिल हुई हैं। इन बसों में इमरजेंसी के दौरान अलार्म, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र के अलावा आपात स्थिति में एग्जिट विंडो और डोर भी दिए गए हैं।
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पड़ताल के दौरान जब इन बसों के अंदर फर्स्ट एड बॉक्स की स्थिति जांची तो ये बॉक्स अंदर से खाली मिले। किसी बॉक्स के अंदर बीड़ी के रैपर पड़े थे तो किसी बॉक्स के अंदर कुरकुरे खाने के बाद उसका कचरा अंदर भरा हुआ था। पुरानी बसों के अंदर तो न बॉक्स था न अन्य सुरक्षा के कोई मानक। भिवानी डिपो में भिवानी बस स्टैंड से 130 बसों का संचालन हो रहा है। लोहारू सब डिपो से 46 और तोशाम सब डिपो से 44 रोडवेज बसें चल रही हैं। इनमें भिवानी बस स्टैंड से 13 मिनी बसें, तोशाम और लोहारू से चार-चार मिनी बसों का संचालन हो रहा है। रोडवेज की करीब 25 बस तो दूसरे राज्यों तक भी दौड़ लगा रही हैं। इन बसों में तो फस्ट एड बॉक्स के अंदर सामान बेहद जरूरी है।
मैं अक्सर रोडवेज बसों में सफर रहता हूं। लेकिन मैंने आज तक किसी भी रोडवेज बस में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं देखा। एक बार तो बस में चढ़ते समय महिला को बस के एक उखड़े हुए हिस्से की पत्ती से खरोंच आ गई। इसका खून भी बह रहा था। मगर उसको बांधने के लिए न पट्टी मिली न मलहम। दूसरी महिला ने अपने दुपट्टा फाड़कर उसके हाथ से बह रहे खून को रोका। अगर फर्स्ट एड बॉक्स में सामान होता तो महिला को तुरंत प्राथमिक उपचार मिल सकता था।
-महेंद्र श्योराण, वरिष्ठ नागरिक सेक्टर 13 निवासी।
बसों की पासिंग होती है तब सभी सुरक्षा मानकों की जांच होती है। लेकिन जब ये बसें सड़क पर दौड़ती हैं तब उनके अंदर अधिकांश सुरक्षा मानक पूरे नहीं होते। इन्हीं में एक है फर्स्ट एड बॉक्स। ये मानक बेहद जरूरी इसलिए है कि इससे आपात स्थिति में किसी मुसाफिर की जान जाने से बचाई जा सकती है। फर्स्ट एड बॉक्स के अंदर कुछ जरूरी दवाएं रखना अनिवार्य किया गया है। जो समय पर अगर मिल जाए तो उसे अस्पताल ले जाने तक बचाया जा सकता है।
-अभिषेक बंसल, युवा व्यापारी
सभी रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स के सामान मुहैया कराया गया है। इस सामान की जिम्मेदारी बस के चालक और परिचालक को दी गई है। अगर किसी बस में फर्स्ट एड का सामान नहीं है तो नाजीर से प्राप्त कर सकता है। कर्मशाला प्रबंधक की तरफ से भी बसों में सुरक्षा मानक पूरे किए जाने की व्यवस्थाएं कराई गई हैं। अगर फिर भी कहीं कोई कमी है तो उसे जल्द दूर कराएंगे।
- डॉ. नेत्रपाल खत्री, महाप्रबंधक, भिवानी डिपो हरियाणा राज्य परिवहन विभाग।