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टमाटर के भाव नहीं मिले तो किसानों ने फसल पर फेरा ट्रैक्टर
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तोशाम। टमाटर के भाव में आई भारी गिरावट के कारण किसानों ने खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया है। किसान खरकड़ी माखवान निवासी सुखबीर व छत्रपाल ने करीब दस एकड़ में खड़ी टमाटर की फसल को ट्रैक्टर से जमीन में दबा दिया है। अगले एक-दो दिन में 4-5 किसान और भी अपनी टमाटर की फसल को ट्रैक्टर चलाकर जमीन में दबाने की योजना बना रहे हैं।
टमाटर उत्पादक किसान रमेश पंघाल, राजकुमार, सुखबीर व छत्रपाल का कहना है कि टमाटर की अच्छी पैदावार हुई है। लेकिन लगातार दूसरे वर्ष कोरोना की सीधी मार किसान पर पड़ रही है। कोरोना के कारण पिछले साल लाखों का नुकसान हुआ था। इस साल भी भारी नुकसान हो गया है। किसान कर्ज में डूब गया है। लागत ज्यादा होने के कारण फसल पर ट्रैक्टर चलाने के सिवाए उनके पास कोई चारा नहीं है। टमाटर बेचकर मजदूरी भी पूरी नहीं हो रही। उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ टमाटर की फसल पर सिर्फ पकने तक 85 से 90 हजार रुपये तक का खर्च आता है। तुड़ाई, छंटाई, किराया आदि करके प्रति एकड़ पर 50 हजार रुपये का खर्च हो जाता है। इस तरह प्रति एकड़ डेढ़ लाख तक का खर्चा है। एक एकड़ में लगभग 500 कैरेट पड़ जाती हैं। आज एक कैरेट 80 से सौ रुपये की ही बिक रही है। जबकि प्रति कैरेट पर पकाने से मंडी भेजने तक 250 से 300 रुपये का खर्चा हो रहा है। किसान को लागत भी नहीं मिल रही है। फसल बहुत अच्छी थी लेकिन भाव न होने के कारण ट्रैक्टर से फसल जमीन में दबानी पड़ रही है। किसान सुखबीर ने करीब आठ एकड़ व छत्रपाल ने दो एकड़ में खड़ी टमाटर की फसल को जमीन में दबा दिया है। दोनों किसानों को दस लाख रुपये का नुकसान हो गया है। किसानों का कहना है कि सरकार भी उनके नुकसान को लेकर चिंतित नहीं है।
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टमाटर उत्पादक किसान रमेश पंघाल, राजकुमार, सुखबीर व छत्रपाल का कहना है कि टमाटर की अच्छी पैदावार हुई है। लेकिन लगातार दूसरे वर्ष कोरोना की सीधी मार किसान पर पड़ रही है। कोरोना के कारण पिछले साल लाखों का नुकसान हुआ था। इस साल भी भारी नुकसान हो गया है। किसान कर्ज में डूब गया है। लागत ज्यादा होने के कारण फसल पर ट्रैक्टर चलाने के सिवाए उनके पास कोई चारा नहीं है। टमाटर बेचकर मजदूरी भी पूरी नहीं हो रही। उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ टमाटर की फसल पर सिर्फ पकने तक 85 से 90 हजार रुपये तक का खर्च आता है। तुड़ाई, छंटाई, किराया आदि करके प्रति एकड़ पर 50 हजार रुपये का खर्च हो जाता है। इस तरह प्रति एकड़ डेढ़ लाख तक का खर्चा है। एक एकड़ में लगभग 500 कैरेट पड़ जाती हैं। आज एक कैरेट 80 से सौ रुपये की ही बिक रही है। जबकि प्रति कैरेट पर पकाने से मंडी भेजने तक 250 से 300 रुपये का खर्चा हो रहा है। किसान को लागत भी नहीं मिल रही है। फसल बहुत अच्छी थी लेकिन भाव न होने के कारण ट्रैक्टर से फसल जमीन में दबानी पड़ रही है। किसान सुखबीर ने करीब आठ एकड़ व छत्रपाल ने दो एकड़ में खड़ी टमाटर की फसल को जमीन में दबा दिया है। दोनों किसानों को दस लाख रुपये का नुकसान हो गया है। किसानों का कहना है कि सरकार भी उनके नुकसान को लेकर चिंतित नहीं है।
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