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हर दूसरे दिन दंपती के रिश्तों में आ रही खटास
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कार्यशाला को संबोधित करते डॉ. मंजीत क्लिनिकल साइक्लॉजिस्ट। विज्ञप्ति
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। वर्तमान समय पर बदल रहे जीवनशैली और कोरोना काल का प्रभाव अब दंपती के रिश्तों में भी देखने को मिला रहा है। आए दिन हो रही परिवारों में अनबन की वजह से रिश्तों में खटास आ रही है। इसकी वजह से दंपती के ऊपर मानसिक दबाव बना रहता है, जिससे वे न तो ठीक से अपना काम कर पाते हैं और न ही शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे पाते हैं। आखिर में वे मानसिक शांति और इस तनाव को दूर करने के लिए मनोवैज्ञानिक के पास पहुंच रहे हैं।
कोरोना काल से पहले अगर पति-पत्नी के रिश्तों की बात करें तो ऐसे मामले बहुत कम मनोवैज्ञानिक के पास काउंसिलिंग करवाने पहुंच रहे थे। पहले आमतौर पर युवा अपने भविष्य, पढ़ाई, रोगजार से संबंधित आए मानसिक दबाव के निवारण के लिए काउंसिलिंग करवाते थे। मगर अब कोरोना काल के बाद हर दूसरे दिन एक दंपती काउंसिलिंग के लिए मनोवैज्ञानिक के पास पहुंच रहे हैं। इसकी वजह से नागरिक अस्पताल में भी स्वास्थ्य विभाग ने मनोवैज्ञानिक की व्यवस्था की है, जो मरीजों की समय पर काउंसिलिंग कर सके। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में एक माह करीब 15 मरीज काउंसिलिंग करवाने पहुंच रहे हैं। इनमें 90 फीसदी दंपती हैं, जो मानसिक तनाव के शिकार हैं।
अहम और एक-दूसरे के प्रति कम समझ से खराब हो रहे रिश्ते
इस संबंध में मनोरोग विशेषज्ञों ने बताया कि अगर दंपती के रिश्तों की बात करें तो अधिक मामलों में अहम और एक-दूसरे के प्रति कम समझ रिश्तों को खराब कर रहे हैं। कभी पति तो कभी पत्नी अपनी बात को ऊपर रखने के लिए आमतौर पर गुस्सा हो जाते हैं। इसकी वजह से उनमें लंबी बहस हो जाती है। रिश्तों में एक दूसरे के प्रति कम समझ, एक दूसरे से बातचीत के दौरान मिस कम्युनिकेशन की वजह से रिश्ते खराब हो रहे हैं।
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ओपीडी टाइम में करवा सकते है काउंसिलिंग
नागरिक अस्पताल की ओपीडी में कमरा नंबर 19 में काउंसिलिंग की व्यवस्था की हुई है। इसमें सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक विशेषज्ञ रोजाना मरीजों को परामर्श और काउंसिलिंग करते हैं। आमतौर पर एक काउंसिलिंग में 30 से 40 मिनट का समय लगता है। अगर कोई मरीज अधिक मानसिक तनाव में हो तो उसकी दो से तीन बार भी कांउसिलिंग की जाती है।
छोटी सी कही बात की वजह से रिश्ते खराब हो जाते हैं
सामान्य तौर पर देखने को मिलता है कि छोटी सी कही बात की वजह से रिश्ते खराब हो जाते हैं। इसकी मुख्य कारण है मानसिक रूप से शांत न होता। अपने जीवन को सामान्य रखें और अपनी दिनचर्या में योग, संतुलित आहार को शामिल रखें। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में काउंसिलिंग के एक माह में करीब 15 मामले आ जाते हैं, जिनमें अधिकतर दंपती के केस होते हैं।
- डॉ. मंजीत, क्लीनिकल साइक्लॉजिस्ट, नागरिक अस्पताल
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कोरोना काल से पहले अगर पति-पत्नी के रिश्तों की बात करें तो ऐसे मामले बहुत कम मनोवैज्ञानिक के पास काउंसिलिंग करवाने पहुंच रहे थे। पहले आमतौर पर युवा अपने भविष्य, पढ़ाई, रोगजार से संबंधित आए मानसिक दबाव के निवारण के लिए काउंसिलिंग करवाते थे। मगर अब कोरोना काल के बाद हर दूसरे दिन एक दंपती काउंसिलिंग के लिए मनोवैज्ञानिक के पास पहुंच रहे हैं। इसकी वजह से नागरिक अस्पताल में भी स्वास्थ्य विभाग ने मनोवैज्ञानिक की व्यवस्था की है, जो मरीजों की समय पर काउंसिलिंग कर सके। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में एक माह करीब 15 मरीज काउंसिलिंग करवाने पहुंच रहे हैं। इनमें 90 फीसदी दंपती हैं, जो मानसिक तनाव के शिकार हैं।
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अहम और एक-दूसरे के प्रति कम समझ से खराब हो रहे रिश्ते
इस संबंध में मनोरोग विशेषज्ञों ने बताया कि अगर दंपती के रिश्तों की बात करें तो अधिक मामलों में अहम और एक-दूसरे के प्रति कम समझ रिश्तों को खराब कर रहे हैं। कभी पति तो कभी पत्नी अपनी बात को ऊपर रखने के लिए आमतौर पर गुस्सा हो जाते हैं। इसकी वजह से उनमें लंबी बहस हो जाती है। रिश्तों में एक दूसरे के प्रति कम समझ, एक दूसरे से बातचीत के दौरान मिस कम्युनिकेशन की वजह से रिश्ते खराब हो रहे हैं।
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ओपीडी टाइम में करवा सकते है काउंसिलिंग
नागरिक अस्पताल की ओपीडी में कमरा नंबर 19 में काउंसिलिंग की व्यवस्था की हुई है। इसमें सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक विशेषज्ञ रोजाना मरीजों को परामर्श और काउंसिलिंग करते हैं। आमतौर पर एक काउंसिलिंग में 30 से 40 मिनट का समय लगता है। अगर कोई मरीज अधिक मानसिक तनाव में हो तो उसकी दो से तीन बार भी कांउसिलिंग की जाती है।
छोटी सी कही बात की वजह से रिश्ते खराब हो जाते हैं
सामान्य तौर पर देखने को मिलता है कि छोटी सी कही बात की वजह से रिश्ते खराब हो जाते हैं। इसकी मुख्य कारण है मानसिक रूप से शांत न होता। अपने जीवन को सामान्य रखें और अपनी दिनचर्या में योग, संतुलित आहार को शामिल रखें। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में काउंसिलिंग के एक माह में करीब 15 मामले आ जाते हैं, जिनमें अधिकतर दंपती के केस होते हैं।
- डॉ. मंजीत, क्लीनिकल साइक्लॉजिस्ट, नागरिक अस्पताल