फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   Even after the advice of the embassy, ??the university was saying that everything is fine, then strike can leave Ukraine: Ekta

एंबेसी की सलाह के बाद भी यूनिवर्सिटी कह रही थी सब ठीक है, हड़ताल की तब यूक्रेन से निकल सके : एकता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 11:14 PM IST
विज्ञापन
Even after the advice of the embassy, ??the university was saying that everything is fine, then strike can leave Ukraine: Ekta
रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचने में चोटिल होने के कारण सिवानी अस्पताल में उपचाराधीन एकता श्योराण। सं - फोटो : Bhiwani
बहल। यूक्रेन में रूसी हमले से मची अफरातफरी के बीच बहल के सुमित खुंडिया के बाद ओबरा गांव की एकता श्योराण भी अपने घर सकुशल पहुंच गई हैं। एकता ने बताया कि एक तरफ जान बचाने की जद्दोजहद और दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी से बाहर होने के डर के बीच उन्होंने सुरक्षित जीवन को ही प्राथमिकता दी और वहां से निकल आए।
विज्ञापन

यूक्रेन के हालातों के बारे में एकता ने बताया कि एंबेसी द्वारा देश छोड़ने की एडवाइजरी के बावजूद उनको विश्वविद्यालय द्वारा आश्वस्त किया जाता रहा कि यहां सब सुरक्षित है। उनको किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। इसके बाद विद्यार्थियों ने 23 फरवरी को यूनिवर्सिटी में स्ट्राइक की और यूनिवर्सिटी को इस बात के लिए झुका लिया कि हालात सही होने तक कम से कम दो सप्ताह की ऑनलाइन क्लासेज का प्रावधान किया जाए। 24 फरवरी की शाम को यूक्रेन में जगह-जगह पर ब्लास्ट हुए तो सभी विद्यार्थियों ने निश्चय कर लिया कि यूनिवर्सिटी चाहे जो भी कहे, वे अब अपनी जान जोखिम में नहीं डाल सकते। फिर तो बस सभी विद्यार्थियों में वहां से निकलने की होड़ सी लग गई।
विज्ञापन

एक भी हाजिरी कम हुई तो रीवर्क करो, एक पेपर में फेल तो निष्कासित
एकता ने बताया कि वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी समस्या यूनिवर्सिटी के नियमों को लेकर थी। अगर एक दिन भी क्लास से अनुपस्थित होने का मतलब था कि 100 प्रतिशत हाजिरी पूरी नहीं होना। अगर हाजिरी पूरी नहीं है तो वो उसे रीवर्क करो। इसके अलावा किसी भी पेेपर में फेल होने का मतलब है कि यूनिवर्सिटी से एक्स्पेल (निष्कासित) होना। विद्यार्थियों के लिए यही एक कशमकश थी कि डिग्री बचाएं या जान। आखिर, सभी ने यही निर्णय लिया कि एकजुट होकर निकलेंगे तो जान बच जाएगी। डिग्री तो फिर भी पूरी हो सकती है पर जान ही नहीं बची तो डिग्री को कौन लेगा। वहीं, एकता की सकुशल वापसी के लिए एक-एक पल इंतजार में गुजारने वाले पापा विरेंद्र श्योराण, माता बिमला देवी, भाई अमरजीत, विक्रांत, विशाल, शिव, विशेष के अलावा बहन मनीषा बेहद खुश हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

भारी भीड़, खाने को कुछ नहीं और ऊपर से बर्फबारी
एकता ने बताया कि वह यूक्रेन के इवानो शहर में इवानो फ्रैंकिव्स्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष की विद्यार्थी है और यूनिवर्सिटी हॉस्टल में ही रहती है। यूनिवर्सिटी ने पहले 24 फिर 25 और आखिर में 26 फरवरी को टैक्सी आने का आश्वासन दिया तो विद्यार्थियों का धैर्य टूट गया। 25 फरवरी को करीब 500 विद्यार्थियों ने हॉस्टल छोड़ दिया और टैक्सी से रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। वहां लड़कियों को आठ से दस घंटे व लड़कों को दो-दो दिन तक रोमानिया एयरपोर्ट तक आने का इंतजार करना पड़ा। एक-एक गेट से करीब पांच-पांच हजार विद्यार्थियों की पहले निकलने की जद्दोजहद में कई विद्यार्थी चोटिल हो गए। खुद उसके भी पूरे शरीर में जकड़न हो गई और वो सिवानी में फिजियो से अपना इलाज करवा रही है, जहां उसे दो सप्ताह का बेड रेस्ट बताया है। एकता ने बताया कि यूक्रेन से रोमानिया बॉर्डर तक जान आफत में रहती है, लेकिन आगे भारत सरकार द्वारा पूरे इंतजाम किए हैं। एकता ने कहा कि भारत सरकार को यूक्रेन में भारतीय विद्यार्थियों की रोमानिया बॉर्डर तक सकुशल पहुंच के लिए प्रबंध करने चाहिए।

यूक्रेन से सुरक्षित वापसी पर परिवार के साथ खुशी के माहौल में एकता श्योराण। संवाद

यूक्रेन से सुरक्षित वापसी पर परिवार के साथ खुशी के माहौल में एकता श्योराण। संवाद- फोटो : Bhiwani

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed