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बिजली गुल तो दोबारा होगी पेयजल की सप्लाई
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Mon, 22 May 2017 01:13 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बिजली निगम और जन स्वास्थ्य विभाग के आपसी तालमेल में गड़बड़ी से अब उपभोक्ताओं को परेशानियां नहीं झेलनी पड़ेगी। दोनों विभागों की नई योजना के मुताबिक फीडर की बिजली सप्लाई के मुताबिक ही पेयजल सप्लाई छोड़ी जाएगी। बिजली निगम के पावर कटों में राहत देने के बाद अब जन स्वास्थ्य विभाग ने भी नई योजना तैयार कर ली है।
विभागीय अधिकारियों ने फीडर की बत्ती गुल होने पर दोबारा पेयजल सप्लाई छोड़ने का खाका तैयार किया है। इससे शहर की करीब 18 कॉलोनियों के दस हजार लोगों को पेयजल संकट से निजात मिलेगा। इससे पहले पेयजल सप्लाई आने पर बिजली गुल व बिजली सप्लाई बहाल होने पर पेयजल सप्लाई बंद होने की समस्या से शहरवासी परेशान थे। यहां तक की फीडर पर लगाए जाने वाले पावर कट की जानकारी निगम के अधिकारी जन स्वास्थ्य विभाग को समय रहते दे देंगे। इससे उस फीडर की पेयजल सप्लाई प्रतिदिन की तरह निर्धारित समय पर न छोड़कर बिजली आने पर ही छोड़ी जाएगी।
शहर में इस समय जलघरों में पानी की कमी नहीं है लेकिन बिजली कटों की वजह से पानी की आपूर्ति का शेड्यूल बिगड़ गया है। हालांकि जनस्वास्थ्य विभाग इस समय एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति कर रहा हैै। इसके अलावा बिजली निगम व जन स्वास्थ्य विभाग का आपसी तालमेल गड़बड़ाने से शहर के करीब तीन हजार पेयजल उपभोक्ताओं को परेशानी भुगतनी पड़ रही थी। इस समय पूरे शहर में करीब साढ़े 11 हजार पेयजल कनेक्शन हैं। बिजली निगम ने बिजली आपूर्ति का अपना शेडयूल बना रखा है।
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बिजली निगम लाइन लॉस के अनुरूप ही फीडर पर बिजली की आपूर्ति कर रहा है ताकि निगम को घाटे से निजात मिल सके। 30 प्रतिशत से कम लाइन लोस वाले क्षेत्रों में निगम अब 22 घंटे तक बिजली की आपूर्ति कर रहा है। फीडर वाइज निगम ने लाइन लोस के मुताबिक कटों का शेडयूल बना रखा हैै। फिलहाल घिकाड़ा रोड फीडर, रावलधी फीडर, पुराना शहर, वार्ड नंबर दो, कबीर बस्ती, वाल्मीकि बस्ती, वार्ड नंबर 12 सहित करीब एक दर्जन अन्य कॉलोनियों में पेयजल व बिजली सप्लाई दोनों ही प्रभावित है।
पेयजल आपूर्ति पर पड़ रहा प्रभाव
शहर के बिजली संकट का सीधा असर पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग सुबह पांच बजे पानी की सप्लाई शुरू करता है जो देर रात नौ बजे तक जारी रहती है उसके बावजूद भी शहर मेें सभी वार्डों में नियमित पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। पावर कटों की वजह से पेयजल आपूर्ति चरमराई हुई है। जिस एरिया में पानी सप्लाई होता है उस समय वहां बिजली आपूर्ति नहीं होती जिससे लोगों को पानी नहीं मिल पाता। अधिकतर पेयजल उपभोक्ता बिजली मोटर से ही पानी का उठान करते हैं। एक घंटे के पावर कट के दौरान ही पेयजल सप्लाई आकर चली जाती है और घरों के बर्तन खाली ही रह जाते हैं।
बिजली निगम के शेड्यूल के अनुसार काम करेगा जनस्वास्थ्य विभाग
अब जनस्वास्थ्य विभाग बिजली निगम के शेड्यूल के अनुसार काम करेगा। जिन भागों में पावर कट चल रही हो वहां पानी की सप्लाई न छोड़े जाने की योजना विभागीय अधिकारियों ने बनाई है। जब तक इस क्षेत्र की बिजली सप्लाई बाधित रहेगी तब तक दूसरे क्षेत्र में पानी की आपूर्ति कर दी जाएगी। बिजली आपूर्ति होने पर ही पानी की आपूर्ति उस फीडर पर छोड़ने का प्रावधान भी इसी प्लानिंग का हिस्सा है। हालांकि विभाग के कर्मचारियों की भागदौड़ जरूरी बढ़ेगी लेकिन इससे पानी की आपूर्ति में सुधार जरूर आएगा।
एक दिन छोड़कर हो रही है पानी की आपूर्ति
इस समय जनस्वास्थ्य विभाग शहर मेें एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि नहरी पानी की उपलब्धता कम रहती है इस वजह से पानी की एक-एक बूंद को बचाया जाना जरूरी है। इतना ही नहीं विभाग जलघर में बोरिंग ट्यूबवेलों के पानी को मिलाकर सप्लाई कर रहा है ताकि जलघरों में स्टोरेज नहरी पानी की कमी नहीं होने पाए। इस समय शहर में 20 दिन का पानी स्टोरेज में है। चंपापुरी जलघर से 60 प्रतिशत एरिया व रामनगर जलघर से 40 प्रतिशत भाग में पानी की आपूर्ति की जाती है। मेन चंपापुरी जलघर की क्षमता 2450 लाख लीटर है जबकि रामनगर जलघर की क्षमता 1250 लाख लीटर है। शहर में रोजाना की पानी की खपत 10 लाख लीटर है।
विभागों के आपसी तालमेल से खत्म होगी किल्लत
--शहरवासी नवीन ने बताया कि बिजली निगम के कटों के कारण लगातार पेयजल सप्लाई पर असर पड़ रहा है। पेयजल सप्लाई आने के दौरान बिजली की सप्लाई बंद हो जाती है। जिससे पानी की किल्लत बनी रहती है।
--शहरवासी टीनू ने बताया गर्मी के मौसम में पानी की अधिक आवश्कता होती है। ऐसे मेें बिजली कटों के कारण पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ता था।
बिजली विभाग को पेयजल सप्लाई के दौरान बिजली देनी चाहिए।
-- दीपक ने बताया बिजली के पावर कटों के कारण मोटरें नहीं चल पा रही थी। पेयजल सप्लाई आने पर बिजली गुल हो जाती है तो बिजली आने पर पेयजल सप्लाई चली जाती है। घरों में पानी के टैंकरों से काम चलना पड़ रहा है।
-- वेदपाल ने बताया कि शहर में बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है। नियमित रूप से बिजली न मिलने के कारण पानी की सप्लाई पर भी गहरा असर पड़ रहा है।
पानी व बिजली दोनों का बिल दे रहे हैं लेकिन दोनों जरूरत मुताबिक नहीं मिल रही।
विभाग कर्मचारी विशेष ध्यान रखेंगे कि जिस एरिया मेें पावर कट लगा है वहां पानी की सप्लाई पावर सप्लाई शुरू होने के बाद ही की जाए ताकि सभी 21 वार्डों में पर्याप्त मात्रा में पेयजल आपूर्ति हो सके। शहर में पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी। लोगों को भी पानी की बचत करनी चाहिए।
एसडीओ रामपाल, जनस्वास्थ्य विभाग
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विभागीय अधिकारियों ने फीडर की बत्ती गुल होने पर दोबारा पेयजल सप्लाई छोड़ने का खाका तैयार किया है। इससे शहर की करीब 18 कॉलोनियों के दस हजार लोगों को पेयजल संकट से निजात मिलेगा। इससे पहले पेयजल सप्लाई आने पर बिजली गुल व बिजली सप्लाई बहाल होने पर पेयजल सप्लाई बंद होने की समस्या से शहरवासी परेशान थे। यहां तक की फीडर पर लगाए जाने वाले पावर कट की जानकारी निगम के अधिकारी जन स्वास्थ्य विभाग को समय रहते दे देंगे। इससे उस फीडर की पेयजल सप्लाई प्रतिदिन की तरह निर्धारित समय पर न छोड़कर बिजली आने पर ही छोड़ी जाएगी।
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शहर में इस समय जलघरों में पानी की कमी नहीं है लेकिन बिजली कटों की वजह से पानी की आपूर्ति का शेड्यूल बिगड़ गया है। हालांकि जनस्वास्थ्य विभाग इस समय एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति कर रहा हैै। इसके अलावा बिजली निगम व जन स्वास्थ्य विभाग का आपसी तालमेल गड़बड़ाने से शहर के करीब तीन हजार पेयजल उपभोक्ताओं को परेशानी भुगतनी पड़ रही थी। इस समय पूरे शहर में करीब साढ़े 11 हजार पेयजल कनेक्शन हैं। बिजली निगम ने बिजली आपूर्ति का अपना शेडयूल बना रखा है।
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बिजली निगम लाइन लॉस के अनुरूप ही फीडर पर बिजली की आपूर्ति कर रहा है ताकि निगम को घाटे से निजात मिल सके। 30 प्रतिशत से कम लाइन लोस वाले क्षेत्रों में निगम अब 22 घंटे तक बिजली की आपूर्ति कर रहा है। फीडर वाइज निगम ने लाइन लोस के मुताबिक कटों का शेडयूल बना रखा हैै। फिलहाल घिकाड़ा रोड फीडर, रावलधी फीडर, पुराना शहर, वार्ड नंबर दो, कबीर बस्ती, वाल्मीकि बस्ती, वार्ड नंबर 12 सहित करीब एक दर्जन अन्य कॉलोनियों में पेयजल व बिजली सप्लाई दोनों ही प्रभावित है।
पेयजल आपूर्ति पर पड़ रहा प्रभाव
शहर के बिजली संकट का सीधा असर पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग सुबह पांच बजे पानी की सप्लाई शुरू करता है जो देर रात नौ बजे तक जारी रहती है उसके बावजूद भी शहर मेें सभी वार्डों में नियमित पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। पावर कटों की वजह से पेयजल आपूर्ति चरमराई हुई है। जिस एरिया में पानी सप्लाई होता है उस समय वहां बिजली आपूर्ति नहीं होती जिससे लोगों को पानी नहीं मिल पाता। अधिकतर पेयजल उपभोक्ता बिजली मोटर से ही पानी का उठान करते हैं। एक घंटे के पावर कट के दौरान ही पेयजल सप्लाई आकर चली जाती है और घरों के बर्तन खाली ही रह जाते हैं।
बिजली निगम के शेड्यूल के अनुसार काम करेगा जनस्वास्थ्य विभाग
अब जनस्वास्थ्य विभाग बिजली निगम के शेड्यूल के अनुसार काम करेगा। जिन भागों में पावर कट चल रही हो वहां पानी की सप्लाई न छोड़े जाने की योजना विभागीय अधिकारियों ने बनाई है। जब तक इस क्षेत्र की बिजली सप्लाई बाधित रहेगी तब तक दूसरे क्षेत्र में पानी की आपूर्ति कर दी जाएगी। बिजली आपूर्ति होने पर ही पानी की आपूर्ति उस फीडर पर छोड़ने का प्रावधान भी इसी प्लानिंग का हिस्सा है। हालांकि विभाग के कर्मचारियों की भागदौड़ जरूरी बढ़ेगी लेकिन इससे पानी की आपूर्ति में सुधार जरूर आएगा।
एक दिन छोड़कर हो रही है पानी की आपूर्ति
इस समय जनस्वास्थ्य विभाग शहर मेें एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि नहरी पानी की उपलब्धता कम रहती है इस वजह से पानी की एक-एक बूंद को बचाया जाना जरूरी है। इतना ही नहीं विभाग जलघर में बोरिंग ट्यूबवेलों के पानी को मिलाकर सप्लाई कर रहा है ताकि जलघरों में स्टोरेज नहरी पानी की कमी नहीं होने पाए। इस समय शहर में 20 दिन का पानी स्टोरेज में है। चंपापुरी जलघर से 60 प्रतिशत एरिया व रामनगर जलघर से 40 प्रतिशत भाग में पानी की आपूर्ति की जाती है। मेन चंपापुरी जलघर की क्षमता 2450 लाख लीटर है जबकि रामनगर जलघर की क्षमता 1250 लाख लीटर है। शहर में रोजाना की पानी की खपत 10 लाख लीटर है।
विभागों के आपसी तालमेल से खत्म होगी किल्लत
--शहरवासी नवीन ने बताया कि बिजली निगम के कटों के कारण लगातार पेयजल सप्लाई पर असर पड़ रहा है। पेयजल सप्लाई आने के दौरान बिजली की सप्लाई बंद हो जाती है। जिससे पानी की किल्लत बनी रहती है।
--शहरवासी टीनू ने बताया गर्मी के मौसम में पानी की अधिक आवश्कता होती है। ऐसे मेें बिजली कटों के कारण पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ता था।
बिजली विभाग को पेयजल सप्लाई के दौरान बिजली देनी चाहिए।
-- दीपक ने बताया बिजली के पावर कटों के कारण मोटरें नहीं चल पा रही थी। पेयजल सप्लाई आने पर बिजली गुल हो जाती है तो बिजली आने पर पेयजल सप्लाई चली जाती है। घरों में पानी के टैंकरों से काम चलना पड़ रहा है।
-- वेदपाल ने बताया कि शहर में बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है। नियमित रूप से बिजली न मिलने के कारण पानी की सप्लाई पर भी गहरा असर पड़ रहा है।
पानी व बिजली दोनों का बिल दे रहे हैं लेकिन दोनों जरूरत मुताबिक नहीं मिल रही।
विभाग कर्मचारी विशेष ध्यान रखेंगे कि जिस एरिया मेें पावर कट लगा है वहां पानी की सप्लाई पावर सप्लाई शुरू होने के बाद ही की जाए ताकि सभी 21 वार्डों में पर्याप्त मात्रा में पेयजल आपूर्ति हो सके। शहर में पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी। लोगों को भी पानी की बचत करनी चाहिए।
एसडीओ रामपाल, जनस्वास्थ्य विभाग