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Bhiwani News: सिंचाई विभाग की लापरवाही से डूबे गांव धनाना समेत पांच गांवों के खेत
Sun, 14 Sep 2025 10:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 14 Sep 2025 10:53 PM IST
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धनाना ड्रेन की सफाई करती मशीन।
भिवानी। गांव धनाना के खेतों में लगभग दो माह से बरसाती पानी का जलभराव बना हुआ है जिससे किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। खेतों में लगभग चार से पांच फीट तक पानी भरा हुआ है जिससे अगली फसल की बुवाई भी असंभव हो रही है। परेशान किसानों ने शनिवार को जींद-भिवानी मार्ग पर जाम लगाया था। इसके बाद सिंचाई विभाग ने रविवार से पानी निकासी के लिए ड्रेन की गहराई और सफाई का कार्य शुरू किया। समय पर ड्रेन की सफाई और खोदाई न होने के कारण खेतों से पानी की निकासी नहीं हो सकी।
मई-जून माह में सिंचाई विभाग ने गांव धनाना से निंगाना फीडर तक जाने वाली ड्रेन की मनरेगा मजदूरों से सफाई करवाई थी लेकिन विभाग ने इसे केवल खानापूर्ति में बदल दिया। ड्रेन की गहराई नहीं बढ़ाई गई और काटे गए खरपतवार को ड्रेन के किनारों पर ही फेंक दिया गया जिससे वे वापस पानी में चले गए। थोड़े ही समय में नई खरपतवार उग गई और ड्रेन गहरी न होने के कारण बरसाती पानी नहर तक नहीं पहुंच सका। इसका असर आसपास के धनाना, बडेसरा, जताई, मिताथल और तालू गांवों के खेतों पर भी पड़ा। सिंचाई विभाग ने शनिवार को जींद-भिवानी मार्ग पर जाम लगाने के बाद ड्रेन की गहराई और सफाई का काम शुरू किया जिससे किसानों को जल्द ही पानी कम होने की उम्मीद बनी है।
ड्रेन की सही से खोदाई व सफाई होती तो नहीं होता जलभराव
यदि सिंचाई विभाग ने समय पर ड्रेन की सफाई और खोदाई करवा दी होती तो खेतों में अनावश्यक पानी जमा नहीं होता। यदि सितंबर माह में पानी की निकासी नहीं हुई तो अगली फसल की बुवाई भी संभव नहीं होगी जिससे किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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यदि सिंचाई विभाग द्वारा समय पर ड्रेन की सफाई और खोदाई करवा दी जाती तो हमें हमारी फसलें खराब नहीं होती। ड्रेन से पानी आगे सप्लाई न होने के कारण दूसरे गांव का पानी भी हमारे खेतों में आकर जमा हो गया है। -रविंद्र घणघस, किसान, गांव धनाना
गांव धनाना से निंगाना फीडर तक जाने वाली ड्रेन की जून माह में सफाई करवा दी गई थी। अब किसानों की मांग पर ड्रेन की खोदाई करके गहरा करवाया जा रहा है। जल्द ही धनाना के खेतों से पानी निकाल दिया जाएगा। -जितेंद्र मान, कार्यकारी अभियंता, भिवानी वाटर सर्विसेज, सिंचाई विभाग
ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण करने का अंतिम दिन आज
जलभराव से किसानों की फसलों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने ई क्षतिपूर्ति पोर्टल 15 सितंबर तक खोला है। किसान अपनी फसल खराबी की जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। डीसी साहिल गुप्ता ने बताया कि जिला राजस्व अधिकारी पोर्टल पर प्राप्त दावों का विशेष गिरदावरी के माध्यम से सत्यापन करेंगे और निर्धारित मानकों के अनुसार मुआवजा जारी करेंगे। प्रभावित किसान के दावे के बाद संबंधित राजस्व अधिकारी, पटवारी, कानूनगो, सर्कल राजस्व अधिकारी, जिला राजस्व अधिकारी और उपमंडल अधिकारी नुकसान का आकलन करेंगे।
मंढाणा में पानी भरने से स्कूल, बैंक, अस्पताल सब बंद, फसलें खत्म
भिवानी। जिले के कई गांवों में जलमग्न होने से बाढ़ जैसे हालात बन चुके हैं। गांव मंढाणा के चारों तरफ जलभराव हो चुका है। सारी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और ग्रामीण सरकार से मदद की मांग कर रहे हैं। गांव मंढाणा में प्रवेश करने वाले सभी रास्ते और सड़कें जलमग्न हैं। सरकारी स्कूल, बैंक, अस्पताल और खेल स्टेडियम पानी भरने के कारण बंद पड़े हैं। खेतों की स्थिति और भी गंभीर है। कपास और बाजरे की फसलें पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। ग्रामीण हवासिंह और हरिराम ने बताया कि उनका गांव दो नहरों और दो ड्रेनों के केंद्र में स्थित है। चारों तरफ से पानी आकर गांव में जमा हो रहा है। प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है लेकिन वास्तविक समाधान नहीं हुआ। खेतों में अगली फसल की बुवाई मुश्किल है और बच्चों का भविष्य अंधकारमय नजर आता है। फसलें बर्बाद होने और अगली बुवाई न होने से गांव में भुखमरी के हालात पैदा हो गए हैं।
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मई-जून माह में सिंचाई विभाग ने गांव धनाना से निंगाना फीडर तक जाने वाली ड्रेन की मनरेगा मजदूरों से सफाई करवाई थी लेकिन विभाग ने इसे केवल खानापूर्ति में बदल दिया। ड्रेन की गहराई नहीं बढ़ाई गई और काटे गए खरपतवार को ड्रेन के किनारों पर ही फेंक दिया गया जिससे वे वापस पानी में चले गए। थोड़े ही समय में नई खरपतवार उग गई और ड्रेन गहरी न होने के कारण बरसाती पानी नहर तक नहीं पहुंच सका। इसका असर आसपास के धनाना, बडेसरा, जताई, मिताथल और तालू गांवों के खेतों पर भी पड़ा। सिंचाई विभाग ने शनिवार को जींद-भिवानी मार्ग पर जाम लगाने के बाद ड्रेन की गहराई और सफाई का काम शुरू किया जिससे किसानों को जल्द ही पानी कम होने की उम्मीद बनी है।
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ड्रेन की सही से खोदाई व सफाई होती तो नहीं होता जलभराव
यदि सिंचाई विभाग ने समय पर ड्रेन की सफाई और खोदाई करवा दी होती तो खेतों में अनावश्यक पानी जमा नहीं होता। यदि सितंबर माह में पानी की निकासी नहीं हुई तो अगली फसल की बुवाई भी संभव नहीं होगी जिससे किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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यदि सिंचाई विभाग द्वारा समय पर ड्रेन की सफाई और खोदाई करवा दी जाती तो हमें हमारी फसलें खराब नहीं होती। ड्रेन से पानी आगे सप्लाई न होने के कारण दूसरे गांव का पानी भी हमारे खेतों में आकर जमा हो गया है। -रविंद्र घणघस, किसान, गांव धनाना
गांव धनाना से निंगाना फीडर तक जाने वाली ड्रेन की जून माह में सफाई करवा दी गई थी। अब किसानों की मांग पर ड्रेन की खोदाई करके गहरा करवाया जा रहा है। जल्द ही धनाना के खेतों से पानी निकाल दिया जाएगा। -जितेंद्र मान, कार्यकारी अभियंता, भिवानी वाटर सर्विसेज, सिंचाई विभाग
ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण करने का अंतिम दिन आज
जलभराव से किसानों की फसलों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने ई क्षतिपूर्ति पोर्टल 15 सितंबर तक खोला है। किसान अपनी फसल खराबी की जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। डीसी साहिल गुप्ता ने बताया कि जिला राजस्व अधिकारी पोर्टल पर प्राप्त दावों का विशेष गिरदावरी के माध्यम से सत्यापन करेंगे और निर्धारित मानकों के अनुसार मुआवजा जारी करेंगे। प्रभावित किसान के दावे के बाद संबंधित राजस्व अधिकारी, पटवारी, कानूनगो, सर्कल राजस्व अधिकारी, जिला राजस्व अधिकारी और उपमंडल अधिकारी नुकसान का आकलन करेंगे।
मंढाणा में पानी भरने से स्कूल, बैंक, अस्पताल सब बंद, फसलें खत्म
भिवानी। जिले के कई गांवों में जलमग्न होने से बाढ़ जैसे हालात बन चुके हैं। गांव मंढाणा के चारों तरफ जलभराव हो चुका है। सारी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और ग्रामीण सरकार से मदद की मांग कर रहे हैं। गांव मंढाणा में प्रवेश करने वाले सभी रास्ते और सड़कें जलमग्न हैं। सरकारी स्कूल, बैंक, अस्पताल और खेल स्टेडियम पानी भरने के कारण बंद पड़े हैं। खेतों की स्थिति और भी गंभीर है। कपास और बाजरे की फसलें पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। ग्रामीण हवासिंह और हरिराम ने बताया कि उनका गांव दो नहरों और दो ड्रेनों के केंद्र में स्थित है। चारों तरफ से पानी आकर गांव में जमा हो रहा है। प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है लेकिन वास्तविक समाधान नहीं हुआ। खेतों में अगली फसल की बुवाई मुश्किल है और बच्चों का भविष्य अंधकारमय नजर आता है। फसलें बर्बाद होने और अगली बुवाई न होने से गांव में भुखमरी के हालात पैदा हो गए हैं।