फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   Digital option stalled, government school staff again caught paper-pen

डिजिटल ऑप्शन ठप, सरकारी स्कूल स्टाफ ने फिर पकड़े कागज-कलम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2022 12:03 AM IST
विज्ञापन
Digital option stalled, government school staff again caught paper-pen
राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल। संवाद - फोटो : Bhiwani
भिवानी। भले ही नई-नई तकनीक आने से आमजन और विभागों का काम आसान और पेपरलेस हो गया है, लेकिन जब डिजिटल प्लेटफॉर्म ठप हो जाता है, तब पुरानी शैली ही काम आती है। ऐसा ही शिक्षा विभाग के एमआईएस पोर्टल ठप होने के बाद हालात नजर आ रहे हैं। एमआईएस पोर्टल पिछले करीब 12 दिन से बंद है। इसकी वजह से स्कूल स्टाफ ने फिर से कलम और कागज उठाकर विद्यार्थियों के दाखिले शुरू किए हैं।
विज्ञापन

पोर्टल बंद होने की वजह से विद्यार्थियों के दाखिले ऑनलाइन नहीं हो पा रहे हैं। जो विद्यार्थी निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूल में आ रहे हैं, उन्हें दाखिला देने से स्टाफ कतरा रहा है। स्टाफ को भय है कि कहीं किसी विद्यार्थी ने निजी स्कूल में फीस का भुगतान न किया हो और उन्हें सरकारी स्कूल में दाखिला दे दिया तो एसएलसी (स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट) जमा करवाना आफत बन सकता है। ऐसे में काफी अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला करवाने के लिए स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं। तो वहीं कुछ स्कूलों ने तो मजबूरी में मैन्युअली दाखिला करना ही शुरू कर दिया।
विज्ञापन

विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने नई शिक्षा नीति की गाइडलाइन जारी की है। बच्चों के निजी स्कूलों के ड्यूज क्लियर को लेकर शिक्षक असमंजस की स्थिति में हैं। विद्यालय शिक्षा निदेशालय के अनुसार स्कूलों में दाखिल होने वाले बच्चों का रिकॉर्ड एमआईएस पोर्टल दर्ज करना है। अध्यापकों का कहना है कि पोर्टल के सही से काम नहीं करने के कारण यह पता नहीं लग पा रहा है कि जो बच्चे दाखिला ले रहा है, उसने पिछले स्कूल की फीस क्लियर की है या नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पोर्टल न चलने कारण ये हो रही परेशानी:
मैनुअल दाखिले करने में परेशानी नहीं है, लेकिन पोर्टल से ये भी पता चलता है कि जो विद्यार्थी दाखिला लेने आया है उसके पिछले स्कूल की फीस का भुगतान हुआ है या नहीं।
स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट अधिकतर विद्यार्थी साथ नहीं ला रहे है। पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है। उनको पता नहीं लग पा रहा है कि किसके ड्यूज रूके हुए हैं।
पोर्टल पर निजी स्कूलों को भी डाटा देना होता है। इसलिए बाद में एडमिशन रद्द न करना पड़ जाए।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति वर्ष 2020 की गाइडलाइन नई आई है। इसके अनुसार सरकारी स्कूलों में अब छह साल की आयु के बच्चे का दाखिला होना है। गाइडलाइन से ही पता लगेगा कि इस साल से इन बच्चों को दाखिला देना है कि नहीं।
ये दस्तावेज जरूरी: जन्म प्रमाण पत्र, रिहायशी प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, परिवार पहचान पत्र, विभाग द्वारा तैयार किया गया आवेदन फार्म।
ये बोले अभिभावक:
स्कूल में बच्चों के दाखिला करवाने के लिए कई बार जा चुके है, मगर एमआईएस पोर्टल में आई दिक्कतों की वजह से ऑनलाइन दाखिला नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। काम छोड़कर बच्चों का दाखिला करवाने के लिए स्कूल जाते है, जहां से सिर्फ निराशा मिल रही है। - बिजेंद्र शर्मा, अभिभावक।
सरकारी स्कूल में बच्चों का दाखिला करवाने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से एमआईएस पोर्टल की व्यवस्था की है। जो बच्चे निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में आ रहे हैं, उनकी जानकारी एमआईएस पोर्टल पर दी जाती है। अब पोर्टल ठीक से काम न करने की वजह से बच्चों की जानकारी नहीं मिल पा रही है और उन्हें बिना दाखिला करवाए ही लौटना पड़ता है। - मनोज कुमार, अभिभावक।

पिछले कुछ दिनों से एमआईएस पोर्टल में दिक्कत आ रखी है। इसकी वजह से विद्यार्थियों का ऑनलाइन दाखिला नहीं हो पा रहा। एडमिशन कमेटी से बातचीत कर मैन्युअली दाखिला प्रक्रिया शुरू की है। अब भी पोर्टल शुरू होगा, तभी से ऑनलाइन दाखिला कर दिया जाएगा। जो विद्यार्थी निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में आ रहे हैं, उन्हें पिछले फीस जमा करवानी आवश्यक है, ताकि दाखिला में कोई दिक्कत न आए। - सविता घनघस, प्राचार्य, सेठ किरोड़ीमल राजकीय मॉडल संस्कृति वमावि, भिवानी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed