Bhiwani: चुनावी रंजिश में छह साल में छह लोगों के खून से लिख डाली बड़ेसरा हत्याकांड की कहानी, पढ़ें ये रिपोर्ट
भिवानी के बहुचर्चित बड़ेसरा हत्याकांड की कहानी सुनते ही हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। चुनावी रंजिश से शुरू हुए इस खूनी संघर्ष में छह लोगों ने अपनी जान गंवाई है। इस हत्याकांड में एक ही परिवार के 18 लोगों को जेल तक हो गई।
विस्तार
चुनावी रंजिश को लेकर छह साल में छह लोगों के खून से बड़ेसरा हत्याकांड की कहानी लिख डाली। बहुचर्चित बलजीत बड़ेसरा हत्याकांड बदले की आग का वो काला इतिहास है, जिससे आज भी पूरा गांव दहशत से भरा है। इस रंजिश में जो कभी अपने थे, उन्हीं का खून बहाकर इस हत्याकांड में एक ही परिवार के 18 लोगों को जेल तक हो गई।
गांव बड़ेसरा में चल रहे खूनी संघर्ष को लेकर पुलिस ने बनाई हुई है स्थायी चेकपोस्ट
मंगलवार को एडीजे रजनी यादव की कोर्ट ने 2017 के बलजीत हत्याकांड में एक ही परिवार के 18 लोगों को हत्याकांड में दोषी करार दिया है, जिन्हें वीरवार को सजा भी तय हो जाएगी। बड़ेसरा में दो पक्षों के खूनी संघर्ष की वजह से आज भी गांव में पुलिस की स्थायी चेकपोस्ट है। इस पर चौबीसों घंटे सशस्त्र पुलिस कर्मचारी तैनात हैं। बड़ेसरा हत्याकांड में एक पक्ष के पांच व दूसरे पक्ष के एक व्यक्ति की हत्या हो चुकी है। दो गवाहों को भी गोली मारकर मौत के घाट उतारा जा चुका है।
ऐसे शुरू हुआ खूनी संघर्ष
गांव में बड़ेसरा में जेल में बंद आनंद उर्फ बबलू पूर्व सरपंच का चाचा सरपंच है। महिला सरपंच सुदेश की आरटीआई लगाने से साल 2017 में शुरू हुआ गांव बड़ेसरा में खूनी खेल छह साल बाद भी नहीं थमा है। अब तक इस खूनी खेल में छह लोगों को मौत के घाट उतारा जा चुका है। एक पक्ष के पांच और दूसरे पक्ष के एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई है।
चुनाव में समर्थन करने वाले महेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई
इसमें दो गवाहों को भी गोली मारकर मौत की नींद सुलाया जा चुका है। वर्ष 2022 में सरपंच के चुनाव हुए हैं, जिसमें जेल के अंदर बंद पूर्व सरपंच बबलू का चाचा भूप सिंह गांव का सरपंच बना है। चुनाव के कुछ दिन बाद ही बबलू के चाचा भूप सिंह के चुनाव में समर्थन करने वाले महेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि मास्टर अजीत उर्फ बालिया गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया था।
तिहरे हत्याकांड में बलजीत के साथ ताऊ व चाचा की कर दी गई थी हत्या
गांव बड़ेसरा निवासी बलजीत ने 2017 में गांव की सरपंच सुदेश के खिलाफ आरटीआई लगाई थी। उसमें सुदेश की दसवीं कक्षा की मार्कशीट फर्जी पाई गई थी। इसके बाद से दोनों पक्षों में रंजिश हो गई थी। इसके बाद बलजीत और उसके परिवार के पांच लोगों की हत्या की जा चुकी है। 2017 में बलजीत व उसके चाचा भल्लेराम और ताऊ महेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अक्तूबर 2019 में पूर्व सरपंच पवन की भी हत्या कर दी गई थी। 2020 में बलजीत के ताऊ की घर के सामने ही तीन गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
हत्याकांड में गवाह राजकुमार पर भी हुआ था कातिलाना हमला
2017 में तिहरे हत्याकांड के बाद दो गवाहों की भी हत्या की गई थी। पूर्व सरपंच पवन की हत्या में गवाह सूबे सिंह की भी हत्या हुई थी। हत्याकांड के मुख्य गवाह राजकुमार पर 13 जुलाई 2021 को जानलेवा हमला हुआ था। इसके तार जेल से जुड़े थे। बाद में सोनीपत के चार बदमाशों को पुलिस ने पकड़ा तो खुलासा हुआ कि जेल में बंद पूर्व सरपंच आनंद ने जेल से ही अजय निवासी फाजिलपुर सोनीपत, दीपक उर्फ बॉक्सर निवासी देवसर, रोहित उर्फ काला निवासी फाजिलपुर सोनीपत, अमन उर्फ रसगुल्ला निवासी बंदेपुर सोनीपत को उसकी हत्या की सुपारी दी थी। बदमाशों को इसके लिए जेल में रहते हुए ही 2.73 लाख रुपए दिए गए थे।