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परिजनों ने रोहतक-दादरी मुख्यमार्ग किया जाम
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Fri, 01 Jul 2016 12:13 AM IST
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान तोड़फोड़, फायरिंग और लूटपाट के आरोपी की जहरीले पदार्थ के सेवन से वीरवार को पीजीआई रोहतक में मौत हो गई। सांवड़ निवासी आरोपी केस दर्ज होने के बाद से ही अपने ससुराल रोहतक में रह रहा था। 24 जून को उसने संदिग्ध परिस्थितियों में अपने ससुराल में ही जहर का सेवन किया था। मनीराम की मौत पर नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने आक्रोश जताया। रोहतक पुलिस ने परिजनों के बयान पर एक हार्डवेयर स्टोर संचालक पर आत्महत्या के लिए विवश करने का मामला दर्ज किया है। उधर पीजीआई से गांव पहुंचकर परिजनों और ग्रामीणों ने शव बस अड्डे पर रखकर रोहतक-दादरी मुख्यमार्ग जाम कर दिया। करीब डेढ़ घंटे बाद प्रशासन द्वारा परिजनों की मांगें मानने पर जाम खुला।
यह है मामला
फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान गांव सांवड़ स्थित पेट्रोल पंप पर आगजनी और तोड़फोड़ की गई थी। वहीं पेट्रोल पंप मालिक के हार्डवेयर स्टोर में भी उपद्रवियों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की। स्टोर मालिक मंजीत सांगवान और इंद्रजीत ने हवाई फायरिंग सहित तीन गाड़ियों को आग लगाने की शिकायत भी पुलिस को दी थी। शिकायत में पीड़ित ने 20 नामजद लोगों सहित अन्य कई लोगों की संलिप्ता भी बताई थी। इस संबंध में पुलिस ने मामला दर्ज कर तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें सांवड़ निवासी संजय, लाला और सांजरवास निवासी वेदप्रकाश शामिल हैं। गांव सांवड़ निवासी मनीराम भी इसी मामले का नामजद आरोपी था। बताया जा रहा है कि मामला दर्ज होने के बाद से ही वह अपनी ससुराल रोहतक में रह रहा था। 24 जून को उसने ससुराल में घर पर ही जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। परिजनों ने उसे पीजीआई में उपचार के लिए भर्ती करवाया। वीरवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों के बयान दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम करवाया। शव को परिजन और ग्रामीण पीजीआई से गांव लेकर पहुंचे और सांवड़ मुख्य अड्डे पर शव रख दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने मौके पर डीसी और एसपी को बुलाने की मांग रखी। व्यस्तता के कारण दोनों प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे तो खफा परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर मुख्यमार्ग जाम कर दिया। इसके बाद तहसीलदार और दादरी डीएसपी ने मौके पर पहुंचकर जिला उपायुक्त से बात कर ग्रामीणों की कुछ मांगे मानकर करीब डेढ़ घंटे बाद जाम खुलवाया।
तहसीलदार के सामने रखी ग्रामीणों ने तीन मांगें
मामले की सूचना पाकर दादरी तहसीलदार राजकुमार अरोड़ा मौके पर पहुंचे। जाम खोलने के लिए उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की तो ग्रामीणों ने उनके सामने तीन मांगें रखीं। इनमें हार्डवेयर स्टोर मालिक मंजीत और इंद्रजीत की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी और मुआवजा, बौंद थाने में दर्ज मामले की दोबारा जांच कर निर्दोषों पर दर्ज केस वापस लेना शामिल है। तहसीलदार ने आत्महत्या का हवाला देकर मुआवजा से साफ इंकार कर दिया।
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यह है मामला
फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान गांव सांवड़ स्थित पेट्रोल पंप पर आगजनी और तोड़फोड़ की गई थी। वहीं पेट्रोल पंप मालिक के हार्डवेयर स्टोर में भी उपद्रवियों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की। स्टोर मालिक मंजीत सांगवान और इंद्रजीत ने हवाई फायरिंग सहित तीन गाड़ियों को आग लगाने की शिकायत भी पुलिस को दी थी। शिकायत में पीड़ित ने 20 नामजद लोगों सहित अन्य कई लोगों की संलिप्ता भी बताई थी। इस संबंध में पुलिस ने मामला दर्ज कर तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें सांवड़ निवासी संजय, लाला और सांजरवास निवासी वेदप्रकाश शामिल हैं। गांव सांवड़ निवासी मनीराम भी इसी मामले का नामजद आरोपी था। बताया जा रहा है कि मामला दर्ज होने के बाद से ही वह अपनी ससुराल रोहतक में रह रहा था। 24 जून को उसने ससुराल में घर पर ही जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। परिजनों ने उसे पीजीआई में उपचार के लिए भर्ती करवाया। वीरवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों के बयान दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम करवाया। शव को परिजन और ग्रामीण पीजीआई से गांव लेकर पहुंचे और सांवड़ मुख्य अड्डे पर शव रख दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने मौके पर डीसी और एसपी को बुलाने की मांग रखी। व्यस्तता के कारण दोनों प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे तो खफा परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर मुख्यमार्ग जाम कर दिया। इसके बाद तहसीलदार और दादरी डीएसपी ने मौके पर पहुंचकर जिला उपायुक्त से बात कर ग्रामीणों की कुछ मांगे मानकर करीब डेढ़ घंटे बाद जाम खुलवाया।
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तहसीलदार के सामने रखी ग्रामीणों ने तीन मांगें
मामले की सूचना पाकर दादरी तहसीलदार राजकुमार अरोड़ा मौके पर पहुंचे। जाम खोलने के लिए उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की तो ग्रामीणों ने उनके सामने तीन मांगें रखीं। इनमें हार्डवेयर स्टोर मालिक मंजीत और इंद्रजीत की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी और मुआवजा, बौंद थाने में दर्ज मामले की दोबारा जांच कर निर्दोषों पर दर्ज केस वापस लेना शामिल है। तहसीलदार ने आत्महत्या का हवाला देकर मुआवजा से साफ इंकार कर दिया।
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