{"_id":"66a7c8bc75b8080c3b094209","slug":"haryana-minor-children-were-made-to-work-for-nine-hours-by-paying-just-rs-20-a-day-rescued-2024-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Haryana: मात्र Rs 20 रोजाना दे नौ घंटे नाबालिग बच्चों से करा रहे थे काम, ऑपरेशन मुस्कान के तहत किया रेस्क्यू","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
Haryana: मात्र Rs 20 रोजाना दे नौ घंटे नाबालिग बच्चों से करा रहे थे काम, ऑपरेशन मुस्कान के तहत किया रेस्क्यू
Mon, 29 Jul 2024 10:22 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 29 Jul 2024 10:22 PM IST
सार
ऑपरेशन मुस्कान के तहत मानव तस्करी निरोधक राज्य अपराध शाखा और बाल कल्याण समिति की टीम ने रेस्क्यू किया है।
विज्ञापन
बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों के साथ बाल कल्याण समिति के अधिकारी।
- फोटो : संवाद
विस्तार
हरियाणा के भिवानी में काम की तलाश में आए नाबालिगों का शोषण किया जा रहा है। कहीं मात्र 50 रुपये में तो कहीं 20 रुपये में रोजाना नौ घंटे नाबालिगों से बाइक रिपेयरिंग की दुकान पर काम कराया जा रहा था। ऑप्रेशन मुस्कान के तहत मानव तस्करी निरोधक राज्य अपराध शाखा एवं बाल कल्याण समिति की संयुक्त टीम ने तीनों नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया और उनका नागरिक अस्पताल में मेडिकल कराने के बाद उन्हें बाल कल्याण समिति कार्यालय लाकर काउंसलिंग कराई। इसके बाद, इन बच्चों के पुनर्वास की दिशा में कदम उठाया गया।
विज्ञापन
ऑप्रेशन मुस्कान के तहत मानव तस्करी निरोधक राज्य अपराध शाखा इकाई भिवानी के प्रधान सिपाही राजबीर और जयबीर सिंह के साथ बाल कल्याण समिति सदस्य सतेंद्र तंवर ने देवसर चुंगी के समीप एक बाइक रिपेयरिंग की दुकान पर एक किशोर (16) को बाल श्रम करते हुए पाया।
विज्ञापन
पूछताछ में किशोर ने बताया कि वह सुबह से शाम तक रोजाना नौ घंटे यहां काम करता है। उसे इसके बदले पारिश्रमिक के रूप में रोजाना 50 रुपये मिलते हैं। इसी तरह दिनोद गेट क्षेत्र पर भी बाइक रिपेयरिंग की दुकान पर दो नाबालिग बच्चों से बाल श्रम कराया जा रहा था।
विज्ञापन
पूछताछ में इन बच्चों ने बताया कि मूल रूप से वे बिहार के रहने वाले हैं, लेकिन हाल फिलहाल शहर की एक कॉलोनी में रहते हैं। बच्चों ने बताया कि रोजाना नौ घंटे काम के बदले रोजाना मात्र 20 रुपये मिलते हैं। इन तीनों ही बच्चों को रेस्क्यू करने के बाद टीम जिला नागरिक अस्पताल लेकर पहुंची, जहां तीनों का मेडिकल कराने के बाद बाल कल्याण समिति कार्यालय में उनकी काउंसलिंग कराई।
जिला बाल कल्याण समिति सदस्य सतेंद्र तंवर ने बताया कि ऑप्रेशन मुस्कान के तहत जुलाई माह के दौरान बाल श्रम में फंसे बच्चों को रेस्क्यू करने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान काफी बच्चों को बाल श्रम से बाहर निकाल उनका पुनर्वास किया गया है। वहीं, अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजें और उनका बचपन न छीनें।