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Manisha Death Case: मनीषा मौत मामले में भिवानी पुलिस ने दर्ज की दो एफआईआर, पुलिस अधीक्षक ने दी चेतावनी

Tue, 09 Sep 2025 08:09 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा) Published by: अंकेश ठाकुर Updated Tue, 09 Sep 2025 08:09 PM IST
सार

शिक्षिका मनीषा की मौत मामले की जांच सीबीआई कर रही है। सीबीआई मनीषा के लापता होने से लेकर उसकी मौत में हत्या या आत्महत्या की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। 

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Bhiwani police registered two FIRs in Manisha death case
Manisha murder case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा के भिवानी में शिक्षिका मनीषा मौत मामले में सिविल लाइन पुलिस भिवानी ने दो नई एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने एफआईआर नंबर 199 के तहत छह सितंबर को धारा 196(1), 223(2), 356(2), 353(2) भारतीय न्याय संहिता व 67 ए, 72 आईटी एक्ट 2000 में केस दर्ज किया है। जबकि सिविल लाइन थाना में एफआईआर नंबर 201 के तहत सात सितंबर को धारा 196(1), 223(2), 356(2), 353(2) भारतीय न्याय संहिता में 67 ए 72 आईटी एक्ट 2000 के तहत केस दर्ज किया है। यह दोनों मामले सोशल मीडिया पर भड़काऊ और झूठी पोस्ट डालने वालों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। 

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पुलिस अधीक्षक भिवानी सुमित कुमार के आदेश पर साइबर सैल द्वारा मनीषा मौत प्रकरण में भड़काऊ व झूठी पोस्ट डालने की लगातार मॉनिटरिंग कराई जा रही है। इसके चलते साइबर सैल भिवानी द्वारा मनीषा मौत प्रकरण में बिना किसी आधिकारिक तथ्यों के झूठी व भड़काऊ पोस्ट प्रकाशित करने व मृतका के चरित्र पर टिप्पणी करने और उसकी हत्या में उसकी परिवारजन व पिता की भूमिका पर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर प्रकाशित करने का मामला पकड़ में आया। इसके बाद इस मामले में थाना सिविल लाइन पुलिस भिवानी ने केस दर्ज किया है। 
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पिस्तौल दिखा मनीषा के लिए मांगा न्याय, जांच में मिला लाइटर
वहीं एक अन्य मामले में ढिगावा जाटान निवासी चार युवकों द्वारा मनीषा प्रकरण मामले में पिस्तौल दिखाकर मनीषा को न्याय दिलाने के बारे में एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाली गई थी। पुलिस द्वारा तुरंत फेसबुक अकाउंट संचालक से पूछताछ व जांच करने पर पाया कि युवकों द्वारा जो पिस्टल वीडियो में दिखाई गई थी वह महज एक लाइटर था। जो पिस्तौल की तरह दिखाई दे रहा था।
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क्या कहती है पुलिस
भिवानी पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार का कहना जिले के आम नागरिक और सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों से आग्रह किया जा रहा है कि बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के कोई भी भड़काऊ व झूठी वीडियो या खबर सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकाशित न करें, ऐसा करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त व प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

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