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शहर के बीचों-बीच चल रहा था गर्भपात का खेल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Apr 2016 12:08 AM IST
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गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर के बीचों बीच कृष्ण कॉलोनी में घर में ही गर्भपात का खेल चल रहा था। वह भी बिना किसी डिग्री-डिप्लोमा के। सुबह-सवेरे ही एक महिला का गर्भपात किया गया। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने साढ़े तीन माह की एक गर्भवती महिला को डम्मी मरीज बनाकर भेजा और महज आठ हजार में गर्भपात कर रही फर्जी डाक्टर को दबोच लिया। घर से ही गर्भपात में प्रयोग की जाने वाली एमटीपी किट, इंजेक्शन भी बरामद किए गए। महिला के खिलाफ एमटीपी, धोखाधड़ी व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
मामला बुधवार सुबह करीब आठ बजे का है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को लगातार सूचना मिल रही थी कि कृष्णा कॉलोनी में गर्भपात का खेल चल रहा है। एक शिकायत पर बुधवार सुबह सिविल सर्जन डॉ. रणदीप पूनिया ने एक टीम का गठन किया। टीम ने सुबह करीब आठ बजे साढ़े तीन माह की गर्भवती डम्मी मरीज को गर्भपात कराने के बहाने उक्त फर्जी डाक्टर के पास घर में भेजा। फर्जी डाक्टर ने मरीज से गर्भपात के लिए आठ हजार रुपये की मांग की। सिविल सर्जन के हस्ताक्षर वाले नोट डम्मी महिला मरीज को पहले ही दिए जा चुके थे। फर्जी डाक्टर ने गर्भपात से पहले दी जाने वाली दवाएं मरीज को दी। इसी दौरान मरीज ने डाक्टर को मिस कॉल की और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अचानक छापा मार फर्जी डाक्टर कुसुमलता को दबोच लिया। घर पर जांच की तो वहां गर्भपात में प्रयोग होने वाली एमटीपी किट, दवाइयां, इंजेक्शन मिले। जिन्हें स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सील किया।
करीब दो घंटे जांच के बाद महिला को सिटी थाना लाया गया। इस दौरान शहर थाना पुलिस भी मौजूद रही। महिला को घर से पुलिस जिप में बैठाते समय गली में देखने वालों की भीड़ लग गई। स्वास्थ्य विभाग की छापेमार टीम में डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. मीना बरबर, डिप्टी सिविल सर्जन डा. सुनील कुमार, एसएमओ डा. अनीता गुलिया, जिला औषधि नियंत्रक अधिकारी संदीप हुड्डा, संजय वत्स, पुलिस टीम मौजूद रही।
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15 साल प्राइवेट अस्पताल में काम किया और फिर खुद शुरू किया
महिला बिना किसी डिग्री-डिप्लोमा के गर्भपात के अलावा मरीजों की जांच करती थी। चिकित्सकों की टीम ने इसकी जांच की और पाया कि महिला ने 15 वर्ष तक एक प्राइवेट अस्पताल में काम किया था। वहां के बाद पिछले कुछ वर्षों से घर में ही गर्भपात का खेल चला रही थी।
आठ महीने पहले बची, फिर भी नहीं लिया सबक
स्वास्थ्य विभाग की टीम को करीब आठ महीने पहले भी उक्त फर्जी महिला चिकित्सक और गर्भपात किए जाने की शिकायत मिली थी। उस समय विभाग की टीम ने दो जगह छापेमारी की। कुसुमलता तो बच गई मगर उस समय कांता नामक महिला को टीम ने गर्भपात के मामले में पकड़ा। यहां बचने के बाद भी महिला ने सबक नहीं लिया और गर्भपात का खेल जारी रखा। आखिरकार बुधवार को पकड़ी गई। गर्भपात कराने के आरोप में पकड़ी गई फर्जी डाक्टर महिला के स्वयं को दो बेटियां है।
सुबह और मंगलवार शाम को किया गर्भपात
छापेमार टीम की जांच में सामने आया कि फर्जी महिला डाक्टर ने बुधवार सुबह और मंगलवार सायं को भी दो महिलाओं का गर्भपात करवाया है। महज आठ से 10 हजार रुपये में गर्भपात का खेल चल रहा था। राशि मरीज की आर्थिक हालत देखकर तय की जाती थी।
दवाइयां व उपकरण बरामद
जिला औषधि नियंत्रण अधिकारी संदीप हुड्डा ने बताया कि जब उन्होंने छापा मारा, उस समय मिजोपोस्ट नामक दो गोलियां महिला के शरीर में रखने के लिए दी गई थी। इनके अलावा दस तरह की दवाएं व दो-तीन उपकरण भी बरामद किए गए हैं। इस मामले में एमटीपी, आईएमसी, ड्रग एक्ट व आईपीसी के तहत मामला दर्ज करवाया गया है।
कुसुम लता के पास किसी तरह की कोई डिग्री या डिप्लोमा नहीं है, जिसके तहत वह प्रेक्टिस कर सके। वह अपने घर में ही गर्भपात करती थी। वह आठ से 10 हजार रुपये प्रति मरीज वसूलती थी। महिला को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है।
डॉ. रणदीप पूनिया, सिविल सर्जन
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मामला बुधवार सुबह करीब आठ बजे का है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को लगातार सूचना मिल रही थी कि कृष्णा कॉलोनी में गर्भपात का खेल चल रहा है। एक शिकायत पर बुधवार सुबह सिविल सर्जन डॉ. रणदीप पूनिया ने एक टीम का गठन किया। टीम ने सुबह करीब आठ बजे साढ़े तीन माह की गर्भवती डम्मी मरीज को गर्भपात कराने के बहाने उक्त फर्जी डाक्टर के पास घर में भेजा। फर्जी डाक्टर ने मरीज से गर्भपात के लिए आठ हजार रुपये की मांग की। सिविल सर्जन के हस्ताक्षर वाले नोट डम्मी महिला मरीज को पहले ही दिए जा चुके थे। फर्जी डाक्टर ने गर्भपात से पहले दी जाने वाली दवाएं मरीज को दी। इसी दौरान मरीज ने डाक्टर को मिस कॉल की और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अचानक छापा मार फर्जी डाक्टर कुसुमलता को दबोच लिया। घर पर जांच की तो वहां गर्भपात में प्रयोग होने वाली एमटीपी किट, दवाइयां, इंजेक्शन मिले। जिन्हें स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सील किया।
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करीब दो घंटे जांच के बाद महिला को सिटी थाना लाया गया। इस दौरान शहर थाना पुलिस भी मौजूद रही। महिला को घर से पुलिस जिप में बैठाते समय गली में देखने वालों की भीड़ लग गई। स्वास्थ्य विभाग की छापेमार टीम में डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. मीना बरबर, डिप्टी सिविल सर्जन डा. सुनील कुमार, एसएमओ डा. अनीता गुलिया, जिला औषधि नियंत्रक अधिकारी संदीप हुड्डा, संजय वत्स, पुलिस टीम मौजूद रही।
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15 साल प्राइवेट अस्पताल में काम किया और फिर खुद शुरू किया
महिला बिना किसी डिग्री-डिप्लोमा के गर्भपात के अलावा मरीजों की जांच करती थी। चिकित्सकों की टीम ने इसकी जांच की और पाया कि महिला ने 15 वर्ष तक एक प्राइवेट अस्पताल में काम किया था। वहां के बाद पिछले कुछ वर्षों से घर में ही गर्भपात का खेल चला रही थी।
आठ महीने पहले बची, फिर भी नहीं लिया सबक
स्वास्थ्य विभाग की टीम को करीब आठ महीने पहले भी उक्त फर्जी महिला चिकित्सक और गर्भपात किए जाने की शिकायत मिली थी। उस समय विभाग की टीम ने दो जगह छापेमारी की। कुसुमलता तो बच गई मगर उस समय कांता नामक महिला को टीम ने गर्भपात के मामले में पकड़ा। यहां बचने के बाद भी महिला ने सबक नहीं लिया और गर्भपात का खेल जारी रखा। आखिरकार बुधवार को पकड़ी गई। गर्भपात कराने के आरोप में पकड़ी गई फर्जी डाक्टर महिला के स्वयं को दो बेटियां है।
सुबह और मंगलवार शाम को किया गर्भपात
छापेमार टीम की जांच में सामने आया कि फर्जी महिला डाक्टर ने बुधवार सुबह और मंगलवार सायं को भी दो महिलाओं का गर्भपात करवाया है। महज आठ से 10 हजार रुपये में गर्भपात का खेल चल रहा था। राशि मरीज की आर्थिक हालत देखकर तय की जाती थी।
दवाइयां व उपकरण बरामद
जिला औषधि नियंत्रण अधिकारी संदीप हुड्डा ने बताया कि जब उन्होंने छापा मारा, उस समय मिजोपोस्ट नामक दो गोलियां महिला के शरीर में रखने के लिए दी गई थी। इनके अलावा दस तरह की दवाएं व दो-तीन उपकरण भी बरामद किए गए हैं। इस मामले में एमटीपी, आईएमसी, ड्रग एक्ट व आईपीसी के तहत मामला दर्ज करवाया गया है।
कुसुम लता के पास किसी तरह की कोई डिग्री या डिप्लोमा नहीं है, जिसके तहत वह प्रेक्टिस कर सके। वह अपने घर में ही गर्भपात करती थी। वह आठ से 10 हजार रुपये प्रति मरीज वसूलती थी। महिला को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है।
डॉ. रणदीप पूनिया, सिविल सर्जन