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एसपी ऑफिस ने नहीं दिया आरटीआई का सहीं जवाब, राज्य सूचना आयोग ने आवेदक को दिया थाने के निरीक्षण का अधिकार

Thu, 13 Dec 2018 12:28 AM IST
Updated Thu, 13 Dec 2018 12:28 AM IST
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एसपी ऑफिस ने नहीं दिया आरटीआई का सहीं जवाब, राज्य सूचना आयोग ने आवेदक को दिया थाने के निरीक्षण का अधिकार

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भिवानी। आम तौर पर जिला प्रशासन के आला अधिकारी ही किसी ना किसी सरकारी दफ्तर या विभागीय कार्यालय का निरीक्षण कर रिकार्ड जांचते आए हैं, मगर अब राज्य सूचना आयोग के एक आदेश देकर स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल परमार को इसकी अनुमति दी है। परमार ने पांच माह पहले जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय से संबंधित मांगी गई थी। जिसका सहीं जवाब नहीं दिया गया तो राज्य सूचना आयोग ने नया फैसला सुनाया। राज्य सूचना आयोग ने आदेश जारी करते हुए आरटीआई मांगने वाले स्वास्थ्य, शिक्षा, सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार को ही जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के साथ-साथ जिले भर के सभी पुलिस थानों का निरीक्षण कर रिकार्ड जांचने के लिए अधिकृत किया। ये निर्देश पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अधिकारियों को सूचनार्थ भेज दिया।
बृजपाल परमार ने बताया कि उन्होंने 26 जून को जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आरटीआई के जरिए यह सूचना मांगी थी कि एसपी कार्यालय के साथ-साथ पुलिस थानों में कितने कक्ष वातानुकूलित हैं और इनमें कितने एसी लगे हुए हैं। पिछले दो साल के बिजली बिलों का विवरण मांगा गया था। इसी के साथ पुलिस विभाग के पास कितने वातानुकूलित वाहन हैं। इस सूचना का जवाब एक माह बाद 26 जुलाई को आरटीआई कार्यकर्ता के पास भेजा गया। जवाब में कई बिंदुओं को छिपाया गया था। जिस पर आरटीआई के तहत 14 अगस्त को प्रथम अपील अथॉरिटी एसपी के समक्ष की गई। जिस पर 29 अगस्त को सुनवाई की गई, लेकिन एसपी ने भी जवाब देने से मना कर दिया। एसपी ने अपने आदेश में हवाला दिया कि एयर कंडीशन की जानकारी सूचना अधिकार अधिनियम की धारा (2) एफ के तहत प्रदान नहीं की जा सकती। इसी तरह दो साल के बिजली बिलों की सूचना पर जवाब दिया गया कि सूचना अधिकार अधिनियम की धारा (8.1) जे के तहत सूचना उपलब्ध नहीं करवाई जा सकती। इसमें ये सूचनाएं देने में थर्ड पार्टी कहकर जवाब देने से इंकार कर दिया गया। 20 अक्टूबर को मामला राज्य जन सूचना आयोग के समक्ष भेजा गया। जिस पर मुख्य सूचना आयुक्त व हरियाणा के पूर्व डीजीपी यशपाल सिंगल ने 29 नवंबर को आदेश दिए कि सभी बिंदुओं की सूचना आरटीआई कार्यकर्ता को उपलब्ध कराई जाए और साथ में स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार को निरीक्षण भी कराया जाए। मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंगल ने यह भी आदेश दिया कि आदेश जारी होने के उपरांत 15 दिन के अंदर मांगी गई सूचनाएं देने व दो दिन के अंदर आरटीआई कार्यकर्ता को एसपी कार्यालय से लिखित में पत्र जारी कर निरीक्षण के लिए बुलाया जाएगा। एसपी कार्यालय द्वारा ये सभी सूचनाएं भी नि:शुल्क उपलब्ध करानी होंगी।
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राज्य सूचना आयोग ने किया जिला उपायुक्त को भी तलब
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल ने बताया कि इसी मामले में जिला उपायुक्त कार्यालय में भी एक आरटीआई लगाई गई थी। जिसके लिए राज्य सूचना आयोग ने 25 फरवरी 2019 को सुबह जिला उपायुक्त व नगराधीश को तलब किया है। संगठन की ओर से उपायुक्त कार्यालय के अंदर भी वातानुकूलित कक्ष व कमरों के अंदर एसी लगे होने की सूचना मांगी थी।
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