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फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंक में रखी बेची हुई संपति रखी गिरवी
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंक में गिरवी रखी संपत्ति और ऑटो कंपनी के नाम बैंक से 30 लाख रुपये की लिमिट कराकर लोन नहीं चुकाने के मामले में सिटी पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।
पुलिस को दी शिकायत में पीएनबी चीफ मैनेजर ने कंपनी के साझेदारों व अधिवक्ता के खिलाफ धोखे से बिक चुकी जमीन को बैंक में गिरवी रखकर धोखाधड़ी करने की शिकायत दी थी। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सिटी पुलिस ने रोहतक निवासी फर्म मालिकों सहित चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
पुलिस को दी शिकायत में लोहारू रोड पीएनबी मुख्य शाखा के चीफ मैनेजर प्रदीप शर्मा ने बताया कि एमएस देशवाल ऑटो कंपनी ने 19 अक्तूबर 2012 को ऑटो मोबाइल की ट्रेडिंग यूनिट चलाने के लिए तीस लाख की बैंक से लिमिट बनवा ली थी। दो लोग गारंटर भी बने थे। जिन्होंने अपनी संपत्ति को भी बैंक में गिरवी रखा था। बैंक के लोन को चुकता नहीं करने पर बैंक ने संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की। इससे पहले बैंक ने नोटिस भी जारी किए थे। इसी दौरान बैंक के सामने आया कि जो संपत्ति बैंक में गिरवी रखी थी, वो पहले ही बिक चुकी हैं। जिसके दस्तावेज फर्जी पाए गए।
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प्रदीप शर्मा ने बताया कि बैंक ने जब नीलामी प्रक्रिया के दौरान रघुबीर सिंह की संपत्ति को नीलाम करने का इरादा किया तो पता चला कि गांव मैना रोहतक की मुकेश देवी का इस जमीन पर मकान बन चुका है। जबकि रघुबीर सिंह अब इस जमीन का मालिक ही नहीं है। इसके अलावा रोहतक के अधिवक्ता मनोज कुमार ने 25 सितम्बर 2012 को प्रमाणित किया था कि यह संपत्ति सभी प्रकार के अतिक्रमणों से मुक्त हैं। जबकि मनोज कुमार ने रुपये की सीसी सीमा को मंजूरी दी थी। इसमें 30 लाख अपने सांझेदारों विजय कुमार देशवाल और यशवीर देशवाल के माध्यम से एमएस देशवाल ऑटो मोबाइल को लिमिट तय कर दी गई। जबकि रोहतक के एडवोकेट मनचंदा ने रिकार्ड का निरीक्षण कर इस संपत्ति के स्वामित्व के बारे में रिपोर्ट बैंक को दी थी। शहर थाना प्रभारी अनिल कुमार ने बताया कि इस मामले में कमला नगर रोहतक निवासी रघुबीर सिंह, एडवोकेट मनोज कुमार मुंजाल, विजय कुमार देशवाल, यशवीर के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर तहकीकात शुरू कर दी है।
पीएनबी मुख्य शाखा के चीफ मैनेजर प्रदीप शर्मा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ अब करीबन चार लाख रुपये बकाया था, मगर बैंक में गिरवी रखी गई सम्पत्ति फर्जी दस्तावेजों के सहारे रखी गई थी, जो वास्तव में पहले ही बेची जा चुकी थी। इस मामले में अब आगे की जांच पुलिस द्वारा की जाएगी।
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भिवानी। फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंक में गिरवी रखी संपत्ति और ऑटो कंपनी के नाम बैंक से 30 लाख रुपये की लिमिट कराकर लोन नहीं चुकाने के मामले में सिटी पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।
पुलिस को दी शिकायत में पीएनबी चीफ मैनेजर ने कंपनी के साझेदारों व अधिवक्ता के खिलाफ धोखे से बिक चुकी जमीन को बैंक में गिरवी रखकर धोखाधड़ी करने की शिकायत दी थी। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सिटी पुलिस ने रोहतक निवासी फर्म मालिकों सहित चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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पुलिस को दी शिकायत में लोहारू रोड पीएनबी मुख्य शाखा के चीफ मैनेजर प्रदीप शर्मा ने बताया कि एमएस देशवाल ऑटो कंपनी ने 19 अक्तूबर 2012 को ऑटो मोबाइल की ट्रेडिंग यूनिट चलाने के लिए तीस लाख की बैंक से लिमिट बनवा ली थी। दो लोग गारंटर भी बने थे। जिन्होंने अपनी संपत्ति को भी बैंक में गिरवी रखा था। बैंक के लोन को चुकता नहीं करने पर बैंक ने संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की। इससे पहले बैंक ने नोटिस भी जारी किए थे। इसी दौरान बैंक के सामने आया कि जो संपत्ति बैंक में गिरवी रखी थी, वो पहले ही बिक चुकी हैं। जिसके दस्तावेज फर्जी पाए गए।
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प्रदीप शर्मा ने बताया कि बैंक ने जब नीलामी प्रक्रिया के दौरान रघुबीर सिंह की संपत्ति को नीलाम करने का इरादा किया तो पता चला कि गांव मैना रोहतक की मुकेश देवी का इस जमीन पर मकान बन चुका है। जबकि रघुबीर सिंह अब इस जमीन का मालिक ही नहीं है। इसके अलावा रोहतक के अधिवक्ता मनोज कुमार ने 25 सितम्बर 2012 को प्रमाणित किया था कि यह संपत्ति सभी प्रकार के अतिक्रमणों से मुक्त हैं। जबकि मनोज कुमार ने रुपये की सीसी सीमा को मंजूरी दी थी। इसमें 30 लाख अपने सांझेदारों विजय कुमार देशवाल और यशवीर देशवाल के माध्यम से एमएस देशवाल ऑटो मोबाइल को लिमिट तय कर दी गई। जबकि रोहतक के एडवोकेट मनचंदा ने रिकार्ड का निरीक्षण कर इस संपत्ति के स्वामित्व के बारे में रिपोर्ट बैंक को दी थी। शहर थाना प्रभारी अनिल कुमार ने बताया कि इस मामले में कमला नगर रोहतक निवासी रघुबीर सिंह, एडवोकेट मनोज कुमार मुंजाल, विजय कुमार देशवाल, यशवीर के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर तहकीकात शुरू कर दी है।
पीएनबी मुख्य शाखा के चीफ मैनेजर प्रदीप शर्मा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ अब करीबन चार लाख रुपये बकाया था, मगर बैंक में गिरवी रखी गई सम्पत्ति फर्जी दस्तावेजों के सहारे रखी गई थी, जो वास्तव में पहले ही बेची जा चुकी थी। इस मामले में अब आगे की जांच पुलिस द्वारा की जाएगी।