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Bhiwani News: दूषित पेयजल बढ़ा रहा उल्टी दस्त और पेट का संक्रमण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 12:35 AM IST
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Contaminated drinking water is increasing cases of vomiting, diarrhea, and stomach infections.
भिवानी मेडिकल कॉलेज में लगी  मरीजों की भीड़। 
भिवानी। मानसून की शुरुआत के साथ ही जिले में जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। पेयजल आपूर्ति में दूषित और मटमैला पानी आने से उल्टी-दस्त, पेट संक्रमण और अन्य जलजनित बीमारियों के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 200 ऐसे मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
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इनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक है। चिकित्सकों के अनुसार दूषित पानी के सेवन से पेट संबंधी संक्रमण तेजी से फैल रहे हैं इसलिए लोग पेयजल की शुद्धता को लेकर विशेष सावधानी बरतें। जिला नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार बारिश के मौसम में जलजनित रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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दूषित पानी के सेवन से पेट संबंधी संक्रमण तेजी से फैल रहे हैं। अस्पताल में पहुंचने वाले अधिकांश मरीज उल्टी-दस्त और पेट संक्रमण की शिकायत लेकर आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर उपचार और साफ पेयजल का इस्तेमाल कर इन बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
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तेज पेट दर्द और ऐंठन के दिखाई दे रहे लक्षण
जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में आने वाले जलजनित बीमारियों से पीड़ित मरीजों में तेज पेट दर्द, पेट में ऐंठन, उल्टी और दस्त की शिकायत सबसे अधिक मिल रही है। इसके अलावा बुखार और कमजोरी भी शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं। चिकित्सक एहतियात के तौर पर मरीजों की टाइफाइड और पीलिया की शुरुआती जांच भी करा रहे हैं। फिलहाल किसी भी मरीज की स्थिति गंभीर नहीं है।

बारिश के पानी में तेजी से पनपते हैं बैक्टीरिया
जिला नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. यतिन गुप्ता ने बताया कि बारिश के मौसम में जल स्रोतों और पेयजल आपूर्ति लाइनों में लीकेज होने से सीवेज का पानी मिल जाने की आशंका बढ़ जाती है। नमी और तापमान के कारण पानी में हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। यही बैक्टीरिया पेट के गंभीर संक्रमण का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है।


खुले में बिकने वाले चाट-पकौड़े न खाएं
फिजिशियन डॉ. यतिन गुप्ता ने बताया कि पीने के पानी को कम से कम 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह उबालकर ही इस्तेमाल करें। यदि ऐसा संभव न हो तो वाटर प्यूरीफायर या क्लोरीन टैबलेट का उपयोग करें। खुले में बिकने वाले चाट-पकौड़े और कटे हुए फलों के सेवन से बचें। भोजन करने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। यदि किसी व्यक्ति को उल्टी, दस्त या पेट दर्द की शिकायत हो तो घरेलू उपचार में समय न गंवाएं और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से संपर्क करें।
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