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गायों को अत्यधिक गोग्रास और तली चीज न खिलाकर नागरिक अपनी धार्मिक भूमिका निभाएं : नरेंद्र बिजारणिया
Sat, 28 Sep 2024 10:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 28 Sep 2024 10:47 PM IST
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भिवानी के एसपी नरेंद्र बिजरानिया।
भिवानी। पुलिस अधीक्षक भिवानी नरेंद्र बिजारणिया ने कहा कि दो अक्तूबर को श्राद्ध अमावस्या पर जिलावासी लावारिस गायों को अत्यधिक तला हुआ भोजन खिला देते हैं, जिससे गायों की हालत खराब हो जाती है और हर वर्ष कुछ गायों की मौत भी हो जाती है। इसलिए इस बार अमावस्या पर गायों को हरा चारा खिलाएं वहीं गायों को अत्यधिक तली हुई चीज खाने के लिए न दें।
पुलिस अधीक्षक ने अमावस्या के दिन जिलावासी गायों को विशेष रूप से खीर, पूड़ी, हलवा, रोटी आदि पकवान अधिक मात्रा में न खिलाने का आह्वान किया है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे दान स्वरूप गायों का भोजन ही गायों को खिलाएं। उन्होंने कहा कि यही गायों के लिए सर्वोत्तम आहार है। वहीं आम नागरिक गायों के बीमार होने की स्थिति में पशु चिकित्सक राजेश जाखड़ के मोबाइल नंबर 94161 94344 और डॉ. विजय के मोबाइल नंबर 94161 75 736 पर संपर्क कर सकते हैं।
पिता के श्राद्ध पर गोशाला में लगाई सवामणी
भिवानी। गोसेवा का हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्व है। गाय को माता के बराबर दर्जा दिया जाता है। गोसेवा का धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से कई लाभ है। आचार्य सुरेश शास्त्री ने अपने पिता डॉ. जगदीश शर्मा के श्राद्ध के अवसर पर गांव जुई की गोशाला में गायों के लिए सवामणी लगाने के उपरांत कही। उन्होंने कहा कि उनके पिता गोसेवक थे तथा इस दिशा में कार्य करने के लिए अन्य लोगों को प्रेरित करते थे। इसीलिए उनका श्राद्ध गोसेवा कर मनाया है। आचार्य सुरेश शास्त्री ने कहा कि पिता के श्राद्ध के अवसर पर गोसेवा का विशेष महत्व होता है।
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पितृपक्ष पर मोनिका भारद्वाज ने एक त्रिवेणी सहित 51 पौधों का किया रोपण
भिवानी। पितृपक्ष में पौधरोपण के महत्व को समझते हुए पुराना पटवार खाना निवासी मोनिका भारद्वाज ने अपनी सास रेखा भारद्वाज की स्मृति में लाल अखाड़ा वाला मंदिर के नजदीक स्थित सेठ मूलचंद झील पर एक त्रिवेणी सहित 51 पौधों का रोपण किया। इस दौरान पंडित आनंद शास्त्री ने मंत्र उच्चारण के साथ पौधे रोपित करवाएं। इस मौके पर मोनिका भारद्वाज ने कहा कि पितृपक्ष में पौधरोपण का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसे हमारे पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का एक पवित्र कार्य माना जाता है। भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण को धार्मिक और आध्यात्मिक क्रियाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में पौधों का रोपण न सिर्फ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए, बल्कि हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का एक प्रयास भी है। इस अवसर पर स्नेह लता शर्मा, सुनीता शर्मा, शिवानी शर्मा, अंकित शर्मा मौजूद रहे।
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पुलिस अधीक्षक ने अमावस्या के दिन जिलावासी गायों को विशेष रूप से खीर, पूड़ी, हलवा, रोटी आदि पकवान अधिक मात्रा में न खिलाने का आह्वान किया है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे दान स्वरूप गायों का भोजन ही गायों को खिलाएं। उन्होंने कहा कि यही गायों के लिए सर्वोत्तम आहार है। वहीं आम नागरिक गायों के बीमार होने की स्थिति में पशु चिकित्सक राजेश जाखड़ के मोबाइल नंबर 94161 94344 और डॉ. विजय के मोबाइल नंबर 94161 75 736 पर संपर्क कर सकते हैं।
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पिता के श्राद्ध पर गोशाला में लगाई सवामणी
भिवानी। गोसेवा का हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्व है। गाय को माता के बराबर दर्जा दिया जाता है। गोसेवा का धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से कई लाभ है। आचार्य सुरेश शास्त्री ने अपने पिता डॉ. जगदीश शर्मा के श्राद्ध के अवसर पर गांव जुई की गोशाला में गायों के लिए सवामणी लगाने के उपरांत कही। उन्होंने कहा कि उनके पिता गोसेवक थे तथा इस दिशा में कार्य करने के लिए अन्य लोगों को प्रेरित करते थे। इसीलिए उनका श्राद्ध गोसेवा कर मनाया है। आचार्य सुरेश शास्त्री ने कहा कि पिता के श्राद्ध के अवसर पर गोसेवा का विशेष महत्व होता है।
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पितृपक्ष पर मोनिका भारद्वाज ने एक त्रिवेणी सहित 51 पौधों का किया रोपण
भिवानी। पितृपक्ष में पौधरोपण के महत्व को समझते हुए पुराना पटवार खाना निवासी मोनिका भारद्वाज ने अपनी सास रेखा भारद्वाज की स्मृति में लाल अखाड़ा वाला मंदिर के नजदीक स्थित सेठ मूलचंद झील पर एक त्रिवेणी सहित 51 पौधों का रोपण किया। इस दौरान पंडित आनंद शास्त्री ने मंत्र उच्चारण के साथ पौधे रोपित करवाएं। इस मौके पर मोनिका भारद्वाज ने कहा कि पितृपक्ष में पौधरोपण का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसे हमारे पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का एक पवित्र कार्य माना जाता है। भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण को धार्मिक और आध्यात्मिक क्रियाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में पौधों का रोपण न सिर्फ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए, बल्कि हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का एक प्रयास भी है। इस अवसर पर स्नेह लता शर्मा, सुनीता शर्मा, शिवानी शर्मा, अंकित शर्मा मौजूद रहे।