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सिर चढ़ बोल रही गांव में चौधर की खुमारी, पहले आप अब पत्नी की बारी
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भिवानी। गांव की चौधर की जंग में सब कुछ जायज है, इसी सोच के साथ सरपंच और पंच के चुनावी दंगल में अखाड़ा तैयार हो गया है। इसमें पहलवानों की बजाए ऐसे धुरंधर कूद गए हैं, जिन्होंने दूसरी बार भी सरपंची अपने ही घर में रखने की ठानी है। कई गांवों में पहले पति सरपंच बने, अब महिला सीट आई तो पत्नी को चुनावी मैदान में उतारा है। गांव की चौधरी की खुमारी ऐसी की पहले आप अब पत्नी की बारी। बड़े गांवों में भी धुरंधरों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बना है। इसमें धुरंधरों को खुद की सीट बचाने के लिए भी पसीने छूटे हैं।
पंचायती चुनावों में पंच और सरपंच का चुनावी प्रचार भी थम चुका है। ऐसे में गांव की चौधर हासिल करने के लिए प्रत्याशी भी अब शाम, दाम, दंड भेद की नीति पर चल पड़े हैं। चुनावी आचार संहिता का चाबुक न चले इससे बचने की भी हर कोशिश हो रही है और नियमों के दायरे से भी बाहर झांक मतदाताओं को हर संभव प्रलोभन देने में जुटे हैं। भिवानी जिले के 312 गांवों में 18 गांवों के सरपंच को छोड़कर 294 गांवों में सरपंच और 874 वार्डों में पंचों के बीच सीधा मुकाबला है। कई गांव तो ऐसे हैं, जिनमें एक-दो नहीं बल्कि तीन-तीन दिग्गज चुनावी मैदान में हैं, जिसकी वजह से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। दिलचस्प बात तो यह भी है कि पिछली योजना में जीत से महज चंद वोट दूर रहने वाले भी इस बार जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। क्योंकि उन्हें विश्वास है कि इस बार वे मतों के महज एक दो के गणित में पास हो जाएंगे। बवानीखेड़ा के दुर्जनपुर, कुंगड़, बलियाली गांवों में कड़े मुकाबले की उम्मीद है। दुर्जनपुर में दूसरी बार महिला उम्मीदवार मैदान में है। जबकि कुुंगड़ में पहले पुरुष सरपंच था अब उसकी पत्नी चुनावी मैदान में है। बहल में भी सरपंच रह चुका गजानंद अग्रवाल तीसरी बार दावेदारी ठोक रहा है। जबकि उसी के मुकाबले में साधुराम पणिहार व समाजसेवी सुशील केडिया कड़े मुकाबले में हैं। इसी तरह सरपंची के चार अन्य दावेदार भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं। तोशाम क्षेत्र में भी कई बड़े गांव ऐसे हैं, जहां चुनावी मैदान में नए चेहरे हैं। लेकिन ये धुरंधरों पर काफी भारी पड़ रहे हैं। लोहारू क्षेत्र में भी सरपंची के लिए कई गांवों में कांटे की टक्कर बनी है।
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सरपंची में पार्टियों की साख भी दाव पर लगी
भले ही इस बार बड़ी पार्टियों ने सरपंची के दावेदार पार्टी चुनाव निशान पर मैदान में नहीं उतारे, लेकिन पार्टियां अंदर खाते सरपंची के उम्मीदवारों को पूरा समर्थन कर रही हैं। इन चुनावों में पार्टियों की साख भी दाव पर लगी है। भले ही गांव का ये छोटा चुनाव हैं, लेकिन पार्टियों के लिए ये चुनाव काफी महत्वपूर्ण भी बना है, क्योंकि विधानसभा चुनावों में गांव में जनाधार बढ़ाने के लिए सरपंची ही काम आएगी।
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रूठों की मनाने, वोटों का जोड़तोड़, शीश झुका आशीष लेने में जुटे प्रत्याशी
मतदान से चौबीस घंटे पहले थमा चुनावी प्रचार भले ही प्रत्याशियों के चुनावी मिशन में एक पड़ाव जैसा है। लेकिन फिर भी प्रत्याशी अब रूठों की मनाने और वोटों के जोड़तोड़ के साथ घर-घर पहुंचकर शीश नवा कर मतदाताओं का आशीष लेने में जुटे हैं। देर रात तक प्रत्याशी और प्रत्याशियों के समर्थक घर-घर पहुंचकर वोट जुटाने में लगे हैं। वहीं कई ठोलों व मोहल्लों में भी समर्थन जुटाया जा रहा है। ताकी एक ही तीर से कई निशाने साधे जा सकें।
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छह लाख 58 हजार 530 मतदाता होंगे निर्णायक
जिले में सात खंडों में 294 सरपंचों का निर्वाचन करने के लिए छह लाख 58 हजार 530 मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे। भिवानी जिले में 312 गांव हैं। जिनमें बवानीखेड़ा में 33, बहल में 29, भिवानी में 76, कैरू में 35, लोहारू में 45, सिवानी में 37, तोशाम में 55 ग्राम पंचायतें हैं।
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पंचायती चुनावों में पंच और सरपंच का चुनावी प्रचार भी थम चुका है। ऐसे में गांव की चौधर हासिल करने के लिए प्रत्याशी भी अब शाम, दाम, दंड भेद की नीति पर चल पड़े हैं। चुनावी आचार संहिता का चाबुक न चले इससे बचने की भी हर कोशिश हो रही है और नियमों के दायरे से भी बाहर झांक मतदाताओं को हर संभव प्रलोभन देने में जुटे हैं। भिवानी जिले के 312 गांवों में 18 गांवों के सरपंच को छोड़कर 294 गांवों में सरपंच और 874 वार्डों में पंचों के बीच सीधा मुकाबला है। कई गांव तो ऐसे हैं, जिनमें एक-दो नहीं बल्कि तीन-तीन दिग्गज चुनावी मैदान में हैं, जिसकी वजह से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। दिलचस्प बात तो यह भी है कि पिछली योजना में जीत से महज चंद वोट दूर रहने वाले भी इस बार जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। क्योंकि उन्हें विश्वास है कि इस बार वे मतों के महज एक दो के गणित में पास हो जाएंगे। बवानीखेड़ा के दुर्जनपुर, कुंगड़, बलियाली गांवों में कड़े मुकाबले की उम्मीद है। दुर्जनपुर में दूसरी बार महिला उम्मीदवार मैदान में है। जबकि कुुंगड़ में पहले पुरुष सरपंच था अब उसकी पत्नी चुनावी मैदान में है। बहल में भी सरपंच रह चुका गजानंद अग्रवाल तीसरी बार दावेदारी ठोक रहा है। जबकि उसी के मुकाबले में साधुराम पणिहार व समाजसेवी सुशील केडिया कड़े मुकाबले में हैं। इसी तरह सरपंची के चार अन्य दावेदार भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं। तोशाम क्षेत्र में भी कई बड़े गांव ऐसे हैं, जहां चुनावी मैदान में नए चेहरे हैं। लेकिन ये धुरंधरों पर काफी भारी पड़ रहे हैं। लोहारू क्षेत्र में भी सरपंची के लिए कई गांवों में कांटे की टक्कर बनी है।
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सरपंची में पार्टियों की साख भी दाव पर लगी
भले ही इस बार बड़ी पार्टियों ने सरपंची के दावेदार पार्टी चुनाव निशान पर मैदान में नहीं उतारे, लेकिन पार्टियां अंदर खाते सरपंची के उम्मीदवारों को पूरा समर्थन कर रही हैं। इन चुनावों में पार्टियों की साख भी दाव पर लगी है। भले ही गांव का ये छोटा चुनाव हैं, लेकिन पार्टियों के लिए ये चुनाव काफी महत्वपूर्ण भी बना है, क्योंकि विधानसभा चुनावों में गांव में जनाधार बढ़ाने के लिए सरपंची ही काम आएगी।
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रूठों की मनाने, वोटों का जोड़तोड़, शीश झुका आशीष लेने में जुटे प्रत्याशी
मतदान से चौबीस घंटे पहले थमा चुनावी प्रचार भले ही प्रत्याशियों के चुनावी मिशन में एक पड़ाव जैसा है। लेकिन फिर भी प्रत्याशी अब रूठों की मनाने और वोटों के जोड़तोड़ के साथ घर-घर पहुंचकर शीश नवा कर मतदाताओं का आशीष लेने में जुटे हैं। देर रात तक प्रत्याशी और प्रत्याशियों के समर्थक घर-घर पहुंचकर वोट जुटाने में लगे हैं। वहीं कई ठोलों व मोहल्लों में भी समर्थन जुटाया जा रहा है। ताकी एक ही तीर से कई निशाने साधे जा सकें।
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छह लाख 58 हजार 530 मतदाता होंगे निर्णायक
जिले में सात खंडों में 294 सरपंचों का निर्वाचन करने के लिए छह लाख 58 हजार 530 मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे। भिवानी जिले में 312 गांव हैं। जिनमें बवानीखेड़ा में 33, बहल में 29, भिवानी में 76, कैरू में 35, लोहारू में 45, सिवानी में 37, तोशाम में 55 ग्राम पंचायतें हैं।