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चरखी दादरी की बेटी ने यूपीएससी में हासिल की 313वीं रैंक
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Thu, 01 Jun 2017 01:24 AM IST
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चरखी दादरी की बेटी ने उत्तीर्ण की यूपीएससी की परीक्षा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के नतीजे बुधवार को घोषित कर दिए गए हैं। इसमें रोहतक की बहू और चरखी दादरी की बेटी स्वाति सिंह श्योराण ने पहले ही प्रयास में 313वीं रैंक लेकर परीक्षा पास कर ली है। उहोंने साबित कर दिया गया कि अगर सपनों में दम हो तो उन्हें शादी के बाद भी पूरा किया जा सकता है। फिलहाल वे गुरुग्राम के सरकारी स्कूल में मनोविज्ञान की लेक्चर है। उन्हें इनकम टैक्स विभाग में कमिश्नर पद का कार्यभार संभालने की जिम्मेदारी मिल सकती है। चरखी दादरी की बेटी स्वाति सिंह की शादी पिछले साल ही रोहतक की रामगोपाल कॉलोनी निवासी सुनील से हुई है।
उन्होंने कहा कि आईएएस ऑफिसर बनने के लक्ष्य को पाने के लिए पिछले चार साल से तैयारी कर रही थी। शादी के बाद इस तैयारी में पति सुनील श्योराण और ससुर धर्मवीर सिंह का काफी सहयोग रहा है। उन्होंने बहू नहीं बल्कि बेटी की तरह उसे प्यार किया गया है। उनके ससुर ने उसे घर की जिम्मेदारियों से मुक्त कर सिर्फ पढ़ाई करने को कहा। इसके अलावा पति ने भी एक अच्छे मार्गदर्शक के रूप में सहयोग किया। स्वाति ने बताया कि उसकी सफलता से मां नीलम सांगवान और पिता सुरेंद्र सांगवान भी बहुत खुश है।
4 साल पहले बनी लेक्चर
स्वाति सिंह 2013 से भिवानी के सरकारी राजकीय उच्च विद्यालय में बतौर लेक्चरार कार्य कर रहीं हैं। 2016 में शादी के बाद उनका गुरुग्राम ट्रांसफर हो गया। अब वह गुरुग्राम के कनहाई गांव के सरकारी उच्च विद्यालय में 9वीं और 10वीं कक्षा को पढ़ाती है। स्वाति ने कहा कि संघर्ष से यह सोचकर कभी न हटे कि एक लड़की हो। लड़की होने के नाते दूसरों से सहानुभूति लेने की कभी कोशिश न करे। ये समाज आपकी इज्जत तभी करेगा जब आप खुद को साबित कर देंगे। फिर चाहे वह घर हो या ससुराल और कार्यक्षेत्र।
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उन्होंने कहा कि आईएएस ऑफिसर बनने के लक्ष्य को पाने के लिए पिछले चार साल से तैयारी कर रही थी। शादी के बाद इस तैयारी में पति सुनील श्योराण और ससुर धर्मवीर सिंह का काफी सहयोग रहा है। उन्होंने बहू नहीं बल्कि बेटी की तरह उसे प्यार किया गया है। उनके ससुर ने उसे घर की जिम्मेदारियों से मुक्त कर सिर्फ पढ़ाई करने को कहा। इसके अलावा पति ने भी एक अच्छे मार्गदर्शक के रूप में सहयोग किया। स्वाति ने बताया कि उसकी सफलता से मां नीलम सांगवान और पिता सुरेंद्र सांगवान भी बहुत खुश है।
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4 साल पहले बनी लेक्चर
स्वाति सिंह 2013 से भिवानी के सरकारी राजकीय उच्च विद्यालय में बतौर लेक्चरार कार्य कर रहीं हैं। 2016 में शादी के बाद उनका गुरुग्राम ट्रांसफर हो गया। अब वह गुरुग्राम के कनहाई गांव के सरकारी उच्च विद्यालय में 9वीं और 10वीं कक्षा को पढ़ाती है। स्वाति ने कहा कि संघर्ष से यह सोचकर कभी न हटे कि एक लड़की हो। लड़की होने के नाते दूसरों से सहानुभूति लेने की कभी कोशिश न करे। ये समाज आपकी इज्जत तभी करेगा जब आप खुद को साबित कर देंगे। फिर चाहे वह घर हो या ससुराल और कार्यक्षेत्र।
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