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भूमिगत पानी ने दिया अनेक परिवारों को कैंसर का दर्द

Mon, 24 Feb 2020 12:54 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 24 Feb 2020 12:54 AM IST
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Cancer given to many families in underground water
गांव हालुवास देवसर माजरा के स्टोरेज टैंक में गंदा पानी । संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : Bhiwani
भिवानी से स्टे गांव हालुवास देवसर माजरा में भूमिगत पीने के पानी से 35 हजार की आबादी पर गंभीर बीमारियों के संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। इतना ही नहीं पीने के पानी से कैंसर की वजह से गांव में करीब 10 मौतें भी हो चुकी हैं। गांव में पीने के पानी का टीडीएस 11 हजार का आंकड़ा पार कर चुका है। यही वजह है कि ग्रामीण अब भूमिगत पानी के नाम से ही डरे हुए हैं। जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी मंत्री के समक्ष भी मामला उठा था। ग्रामीणों ने पीने के पानी से कैंसर और इससे हो चुकी मौतों का आंकड़ा रखते हुए नहरी पानी की मांग की कर रहे हैं। इसी को लेकर रविवार को हालुवास देवसर माजरा में प्रबुद्ध लोगों की पंचायत भी हुई। जिसमें भूमिगत पानी के दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई और भविष्य में समाधान खोजने की दिशा में आगामी रणनीति भी बनाई। गांव में अभी भी कुछ कैंसर पीड़ित है, जिनका इलाज चल रहा है।
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गांव हालुवास देवसर माजरा में 1999 तक गांव बापोड़ा के जलघर से पानी की सप्लाई दी जाती थी। गांव बापोड़ा में काफी बड़ा जलघर हैं जो अपने दौर में आसपास के 25 गांवों को पानी की आपूर्ति देता था लेकिन बापोड़ा जलघर का दायरा छोटा कर दिया और आसपास के गांवों को पानी की आपूर्ति बंद कर दी। इसके बाद से ही गांव हालुवास देवसर माजरा की पेयजल आपूर्ति देवसर और निगाना फीडर नहर के समीप भूमिगत बोरवेल के जरिये पीने के पानी की सप्लाई दी जा रही है।
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ये है समस्या की जड़ : गांव हालुवास देवसर माजरा की पेयजल आपूर्ति के लिए देवसर माइनर के पास ट्यूबवेल लगाकर पाइप लाइन के जरिए इस पानी को स्टोरेज टैंक में डाला जा रहा है। फिर इसी पानी को सीधा घरों में पंपिंग कर पेयजल सप्लाई में दिया जा रहा है। जबकि इस पानी का क्लोरिनेशन तक नहीं किया जा रहा है। यही वजह है कि भूमिगत जल का टीडीएस भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। भूमि के नीचे से दोहन हो रहे इस पानी में काफी घातक तत्व भी पीने के दौरान मानव शरीर में पहुंच रहे हैं।
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हमने खो दिया अपनों को, हमारे ऊपर भी मंडरा रहा खतरा
मैं 68 साल का हो चुका हूं, मेरे दो छोटे भाई कैंसर से मर चुके हैं। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें कैंसर पानी की वजह से हुआ था। मैं तो अपने दो भाई खो चुका हूं लेकिन पूरे गांव में अब पीने का पानी से ही बीमारियों के रूप में बड़े खतरे के तौर पर मंडरा रहा है। इस समस्या को लेकर हम हर दरवाजे पर जा चुके हैं, कोई समाधान नहीं हुआ है। -बृजलाल शर्मा, बुजुर्ग।
मेरे भाई को कैंसर है, जिसका इलाज चल रहा है। डॉक्टर ने सलाह दी है कि जो पानी पी रहे हैं, उसे ना पीये, क्योंकि इसी वजह से उन्हें भी कैंसर हो सकता है। तभी से पूरा परिवार खरीद कर पानी पी रहा है। गांव में पानी भूमिगत दिया जा रहा है, जिसे पीना तो दूर किसी कार्य में भी इस्तेमाल नहीं कर सकते। - बजरंगलाल, बुजुर्ग।
मैं 80 साल की हो चुकी हूं। बुढ़ापे में पानी दूर से नहीं ला सकती। इसलिए गांव के ही एक टैंपू वाले से भिवानी शहर से कैन में पीने का पानी मंगवाती हूं। गांव में जो पानी दिया जा रहा है,उसे पीते ही पेट में दर्द और घबराहट होने लगती है। पानी को लेकर पूरा गांव परेशान है। - शांति देवी, बुजुर्ग महिला।
मेरे गांव में पीने का पानी इतना खराब है कि चाय भी नहीं बनती। पूरा परिवार जिस पानी का इस्तेमाल करता है, उसे शहर से मंगवा रहे हैं। कपड़े तक इस पानी में नहीं धो सकते। बुजुर्ग अवस्था होने के कारण पानी दूर से नहीं ला सकते, इसलिए खरीद कर पानी पी रहे हैं। - बर्फी देवी, बुजुर्ग महिला।
मैने गांव में पीने के पानी की समस्या जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में मंत्री अनूप के समक्ष रखी थी। गांव में कैंसर पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पानी ही ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन गया है। हमें भूमिगत की जगह नहरी पानी पीने के लिए उपलब्ध कराया जाए। इसलिए गांव में भी पंचायत कर नहरी पानी की मांग पर विचार विमर्श हुआ है। - रामकिशन हलवासिया, सामाजिक कार्यकर्ता।
मेरे गांव मेें पंचायत ने जमीन पब्लिक हेल्थ विभाग को दी हैं, मगर पांच साल से अधिकारी उस पर बजट मंजूर होने के बाद भी जलघर नहीं बनवा रहे हैं। गांव में ट्यूबवेल से भूमिगत पानी सीधा सप्लाई किया जा रहा है। जिसका टीडीएस भी बहुत खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। - संदीप तंवर, सरपंच, हालुवास देवसर माजरा।

गांव में जलघर निर्माण के लिए पंचायत द्वारा जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। जैसे ही जमीन पब्लिक हेल्थ विभाग के पास आ जाएगी, तुरंत जलघर निर्माण का काम शुरू करा देंगे। इसके बाद गांव में नहरी पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। -बलविंद्र जैन, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग।
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