भाजपा नेता बीरेंद्र सिंह ने कहा: भारत बंद से साबित हो गया किसान आंदोलन से हर वर्ग जुड़ा, सरकार को करनी चाहिए वार्ता
तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को दस माह से अधिक समय हो चुका है। भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने सरकार से किसानों के साथ वार्ता कर विवाद के समाधान की मांग की है।
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किसान आंदोलन बहुत ज्यादा लंबा खिंच गया है। संवाद ही इसका हल है। सरकार को पहल करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री को समय निर्धारित कर किसानों से बातचीत करनी चाहिए। यह बात पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने शनिवार को भिवानी सेक्टर-13 में एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान कही। उन्होंने कहा कि 27 सितंबर के भारत बंद ने भी यह साबित कर दिया है कि यह आंदोलन केवल किसानों का नहीं है। अब हर वर्ग इससे जुड़ गया है। सरकार को जल्द इसका समाधान निकालना चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह शनिवार को सेक्टर-13 निवासी पूर्व रजिस्ट्रार आत्म प्रकाश शर्मा के निवास स्थान पर पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र में हर मसले का समाधान संवाद से ही संभव है। अगर सरकार को लगता है कि किसान अपनी जिद पर अड़े हैं तो सरकार को पहल कर किसानों से बातचीत कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तो बातचीत के लिए किसानों के केवल नौ संगठनों को ही बुलाना है, पहले तो उनकी संख्या भी 40 थी। दिन और स्थान निर्धारित कर किसानों के साथ बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अगर आंदोलन अपना रस्ता भटक गया तो यह सामाजिक तौर पर भारी नुकसान पहुंचाने वाली घटना होगी। इसलिए सरकार को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। मेघालय के राज्यपाल सतपाल मलिक की बयानबाजी पर उन्होंने कहा कि देश के काफी लोगों की भावनाएं अब ऐसी हो गई हैं।
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भावांतर भरपाई योजना को बताया अव्यवहारिक
पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने राज्य सरकार द्वारा किसानों को लाभ देने के उद्देश्य से चलाई जा रही भावांतर भरपाई योजना को अव्यवहारिक बताया। उन्होंने कहा कि भावांतर भरपाई योजना सब्जियों व फलों के लिए उपयुक्त हो सकती है, परंतु अनाज की फसलों के लिए बेहतरीन नहीं है। फल व सब्जियों के भाव प्रतिदिन के आधार पर कम-ज्यादा होते रहते हैं, जबकि अनाज की फसलों के भावों में प्रतिदिन के हिसाब से बहुत बड़ा अंतर नहीं होता। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य का जिक्र करते हुए कहा कि एमएसपी को सिर्फ एक बेंच मार्क मानना चाहिए, जबकि एमएसपी से ऊपर फसलें बाजार में बिकनी चाहिए।