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जिला टूटने के बाद भी प्रदेश में कम नहीं हुआ भिवानी का वर्चस्व

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 01 Nov 2021 12:12 AM IST
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Bhiwani's dominance in the state did not decrease even after the divide of the district
भिवानी शहर का घंटाघर। संवाद - फोटो : Bhiwani
आदेश चौधरी
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भिवानी। खेल, शिक्षा या राजनीति चाहे कोई भी क्षेत्र हो भिवानी जिले ने देशभर में प्रदेश का नाम रोशन किया है। यहां की प्रतिभाओं ने देश को हमेशा गौरव की अनुभूति कराई है। चरखी दादरी को भिवानी से तोड़कर अलग जिला बनाए जाने के बावजूद प्रदेश में जिले का वर्चस्व कम नहीं हुआ। चरखी दादरी क्षेत्र के युवाओं द्वारा हासिल की जाने वाली उपलब्धियां, अब भिवानी जिले में नहीं गिनी जाती हैं। इसके बावजूद जिले के युवा हर क्षेत्र में प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। 1 नवंबर को हरियाणा दिवस है।
दिसंबर 2016 से पहले चरखी दादरी जिला भिवानी का ही हिस्सा होता था। 18 सितंबर 2016 को प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने चरखी दादरी को जिला बनाए जाने की घोषणा की थी। एक दिसंबर 2016 को सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर चरखी दादरी को अलग जिला बना दिया। भिवानी का क्षेत्रफल 4800 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा था। विभाजन के बाद जिले का क्षेत्रफल 3442 वर्ग किलोमीटर रह गया। अब क्षेत्रफल के मामले में जिला प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। भिवानी ने प्रदेश को तीन मुख्यमंत्री दिए हैं। वहीं एक मुख्यमंत्री देश की राजधानी दिल्ली को भी दिया है। इनमें चौधरी बंसीलाल, बनारसीदास गुप्ता और मास्टर हुकम सिंह शामिल हैं। दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी भिवानी जिले के सिवानी से हैं। चरखी दादरी जिला अलग होने के बाद मास्टर हुकम सिंह चरखी दादरी के हिस्से में चले गए हैं।
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विधानसभा सीटें घटने के बावजूद कम नहीं हुई राजनीतिक चौधर
चरखी दादरी अलग होने से पहले जिले में छह विधानसभा सीटें होती थीं। अब जिले में केवल चार विधानसभा क्षेत्र हैं। चरखी दादरी और बाढड़ा भिवानी से अलग हो गए हैं। इसके बाव भी जिले की राजनीतिक चौधर भी प्रदेश में बरकरार है। लोहारू विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने जेपी दलाल को प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री बनाया गया है। दूसरी ओर तोशाम से विधायक किरण चौधरी विपक्षी दल कांग्रेस की दिग्गज नेता हैं।
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अलग से गिनी जाने लगी चरखी दादरी की प्रतिभा
कुछ दिन पहले जारी किए गए यूपीएससी के रिजल्ट में भिवानी की निशा ग्रेवाल ने 51वीं रैंक हासिल की है। वहीं चरखी दादरी के अंकित तक्षक ने 562वीं रैंक हासिल की। मगर अब दोनों जिले अलग होने से इनकी उपलब्धियां भी अलग-अलग ही गिनी जा रही हैं। मगर भिवानी की निशा ग्रेवाल ने यूपीएससी में 51वीं रैंक हासिल कर देश में हरियाणा का नाम रोशन किया है।

चरखी दादरी को मिला फायदा
अलग जिला बनने से चरखी दादरी क्षेत्र को फायदा जरूर हुआ है। जिला मुख्यालय होने के कारण विकास की ग्रांट ज्यादा पहुंच रही है। बड़े स्तर के अधिकारी बैठने के कारण व्यवस्थाएं पहले से दुरुस्त हुई हैं। दूसरी ओर चरखी दादरी के कई विभागों का कार्यभार भिवानी के ही अधिकारियों को दिया गया है। भिवानी में तैनात अधिकारी ही चरखी दादरी के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं। (संवाद)
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