{"_id":"588cf0d64f1c1b1335cf3b76","slug":"bhiwani-news-two-lakh-expense-thirty-nine-percent-panch-training","type":"story","status":"publish","title_hn":"पौने दो लाख खर्च, फिर भी 39% पंचों ने नहीं ली ट्रेनिंग ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पौने दो लाख खर्च, फिर भी 39% पंचों ने नहीं ली ट्रेनिंग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Feb 2017 12:36 AM IST
विज्ञापन
training
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गांवों को मिलने वाली सुविधाओं व विकास कार्यों के जरिये पंचायत को मजबूती प्रदान करने के टिप्स लेने में जिले के पंचों में कोई खास दिलचस्पी नहीं है। पंचायत विभाग कार्यालय में शनिवार को संपन्न हुए पंच ट्रेनिंग कैंप से इस बात की पुष्टि हो रही है। एक माह तक चले शिविर में करीब पौने दो लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन 39 फीसदी पंचों ने इसका कतई लाभ नहीं उठाया। शिविर में भाग लेने वाले 91 प्रतिशत पंचों में महिला पंचों की तादाद ज्यादा रही। 12 गांव तो ऐसे हैं, जिनके एक भी पंच ने ट्रेनिंग में भाग नहीं लिया। ट्रेनर जहां कुछ खामियों को इस कम संख्या का कारण बता रहे हैं तो वहीं, पंच समय पर सूचना न मिलने का तर्क भी दे रहे हैं। ट्रेनर अब यह रिपोर्ट अपने उच्च अधिकारियों को यह रिपोर्ट सौंपेंगे।
हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी के प्रशिक्षकों द्वारा खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय में पंचों को दिया जा रहा प्रशिक्षण शिविर शनिवार को समाप्त हो गया। शिविर के दौरान ट्रेनरों को कुछ विभाग की तरफ से भी शिविर आयोजन के प्रबंधों में कमियां मिली हैं। ट्रेनरों का तर्क है कि विभाग की तरफ से न तो वीडियोग्राफी करवाई गई और न ही कोई बैनर लगाकर इसका प्रचार किया गया। ऐसे में कैंप में शामिल न होने के कारण बहुत से पंचों को सरकार द्वारा गांव के विकास में सहायक जानकारियों से वंचित रहना पड़ेगा। शिविर के दौरान पुरुषों की तुलना में महिला पंचों की भागीदारी ज्यादा देखने को मिली। प्रशिक्षण के दौरान खंड द्वितीय के गांव अखत्यारपुरा, दाढीबाना, दुधवा, घिकाड़ा, खेड़ी बत्तर, पांडवान, साहुवास, फतेहगढ़, नौरंगाबास राजपूतान, तिवाला, बालरोड, दातौली आदि से कोई भी पंच ट्रेनिंग लेने के लिए नहीं पहुंचा। इनमें से अधिकतर सरपंचों ने बताया कि पंचायत विभाग से उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई। जिसके कारण पंच कैंप में नहीं पहुंच सके।
प्रथम खंड के 322 तो द्वितीय खंड के 338 पंचों ने ही लिया भाग
टीम ने प्रथम ब्लॉक के गांवों से 532 पंचो को प्रशिक्षित करना था, लेकिन कैंप में 322 ही पंच ट्रेनिंग लेने पहुंचें। खंड के 199 पुरुष तथा 123 महिला पंच ट्रेनिंग में शामिल हुए। इसी तरह खंड द्वितीय से 549 पंचों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य था। इसमें 338 पंचो ने शिविर में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। कैंप 211 पुरुष तथा 127 महिला पंचों ने प्रशिक्षण लिया। द्वितीय ब्लॉक से करीब दर्जन गांवों की पंचायत से कोई भी पंच ट्रेनिंग लेने के लिए नहीं पहुंचा। इनमें से कुछ सरपंचों का कहना है कि खंड पंचायत कार्यालय से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। वहीं, कैंप में चांगरोड, नरसिंहवास तथा नौरंगाबास जाटान के सभी पंच उपस्थित हुए।
विज्ञापन
पंचायतों को सक्षम बनाने के लिए लगाते है शिविर
प्रशिक्षण संयोजक डॉ. आरसी पूनिया व ट्रेनर धर्मदेव ने बताया कि सभी पंचों को शिविर के दौरान गांव के विकास के लिए विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाती है। इसमें स्वशासन निर्णय लेने, नेतृत्व के गुण विकसित करने तथा क्षमता वर्धन के बारे में बताया जाता है। इसके अलावा पंचायती राज एक्ट, ग्राम पंचायत, ग्राम सभा कार्य, बैठक बुलाने की विधि, समितियां बनाना, पंचों के अधिकार व कर्त्तव्य, ग्राम विकास निधि का संचालन, आय के स्त्रोत का लेखा, रिकार्ड का रखरखाव, बजट केंद्र व राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं, मनरेगा, प्रधान मंत्री आवास योजना, जनधन, सामाजिक मुद्दे, सूचना का अधिकार, ई पंचायत आदि के बारे में विस्तार से बताया जाता है।
विभागीय कर्मचारी भी रहे नदारद
ट्रेनरों के मुताबिक पंचों को प्रशिक्षण शिविर के दौरान विभाग की अनेक खामियां भी रही। जिससे कैंप में आने वाले सभी पंचों को परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। प्रशिक्षण के दौरान ग्राम सचिव तथा कोई संबंधित कर्मचारी इस दौरान उपस्थित रहना आवश्यक होता हैं, लेकिन विभाग को कोई भी कर्मचारी या अधिकारी प्रशिक्षण में नहीं पहुंचा। लेखन व पठन सामग्री सभी को वितरित नहीं की गई। वीडियोग्राफी तथा फोटो कैंप के दौरान अहम होती हैं, लेकिन विभाग ने कोई भी इंतजाम नहीं किए। ट्रेनिंग देने वाले प्रशिक्षकों के मुताबिक करीब छह माह पूर्व खंड कार्यालयों को प्रशिक्षण की सूचना भेज दी जाती हैं जिसकी जानकारी बीडीओ द्वारा सरपंचों को देनी होती हैं, लेकिन टीम सदस्यों ने बताया कि कुछ गांव के सरपंचों का यह आरोप है कि कार्यालय से उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई।
हमने समय रहते सूचना दे दी थी, लेकिन पता नहीं पंच रुचि क्यों नहीं ले रहें। विभाग ने तैयारियां लगभग पूरी कर रखी थी। मेरे पास लोहारू का चार्ज भी है, इसलिए में उपस्थित नहीं हो सका। अन्य कर्मचारियों की अगर लापरवाही की बात सामने आने पर कोई आदेश मिलते है तो उस अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इकबाल राठी, बीडीपीओ, दादरी द्वितीय खंड
विज्ञापन
हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी के प्रशिक्षकों द्वारा खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय में पंचों को दिया जा रहा प्रशिक्षण शिविर शनिवार को समाप्त हो गया। शिविर के दौरान ट्रेनरों को कुछ विभाग की तरफ से भी शिविर आयोजन के प्रबंधों में कमियां मिली हैं। ट्रेनरों का तर्क है कि विभाग की तरफ से न तो वीडियोग्राफी करवाई गई और न ही कोई बैनर लगाकर इसका प्रचार किया गया। ऐसे में कैंप में शामिल न होने के कारण बहुत से पंचों को सरकार द्वारा गांव के विकास में सहायक जानकारियों से वंचित रहना पड़ेगा। शिविर के दौरान पुरुषों की तुलना में महिला पंचों की भागीदारी ज्यादा देखने को मिली। प्रशिक्षण के दौरान खंड द्वितीय के गांव अखत्यारपुरा, दाढीबाना, दुधवा, घिकाड़ा, खेड़ी बत्तर, पांडवान, साहुवास, फतेहगढ़, नौरंगाबास राजपूतान, तिवाला, बालरोड, दातौली आदि से कोई भी पंच ट्रेनिंग लेने के लिए नहीं पहुंचा। इनमें से अधिकतर सरपंचों ने बताया कि पंचायत विभाग से उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई। जिसके कारण पंच कैंप में नहीं पहुंच सके।
विज्ञापन
प्रथम खंड के 322 तो द्वितीय खंड के 338 पंचों ने ही लिया भाग
टीम ने प्रथम ब्लॉक के गांवों से 532 पंचो को प्रशिक्षित करना था, लेकिन कैंप में 322 ही पंच ट्रेनिंग लेने पहुंचें। खंड के 199 पुरुष तथा 123 महिला पंच ट्रेनिंग में शामिल हुए। इसी तरह खंड द्वितीय से 549 पंचों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य था। इसमें 338 पंचो ने शिविर में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। कैंप 211 पुरुष तथा 127 महिला पंचों ने प्रशिक्षण लिया। द्वितीय ब्लॉक से करीब दर्जन गांवों की पंचायत से कोई भी पंच ट्रेनिंग लेने के लिए नहीं पहुंचा। इनमें से कुछ सरपंचों का कहना है कि खंड पंचायत कार्यालय से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। वहीं, कैंप में चांगरोड, नरसिंहवास तथा नौरंगाबास जाटान के सभी पंच उपस्थित हुए।
विज्ञापन
पंचायतों को सक्षम बनाने के लिए लगाते है शिविर
प्रशिक्षण संयोजक डॉ. आरसी पूनिया व ट्रेनर धर्मदेव ने बताया कि सभी पंचों को शिविर के दौरान गांव के विकास के लिए विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाती है। इसमें स्वशासन निर्णय लेने, नेतृत्व के गुण विकसित करने तथा क्षमता वर्धन के बारे में बताया जाता है। इसके अलावा पंचायती राज एक्ट, ग्राम पंचायत, ग्राम सभा कार्य, बैठक बुलाने की विधि, समितियां बनाना, पंचों के अधिकार व कर्त्तव्य, ग्राम विकास निधि का संचालन, आय के स्त्रोत का लेखा, रिकार्ड का रखरखाव, बजट केंद्र व राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं, मनरेगा, प्रधान मंत्री आवास योजना, जनधन, सामाजिक मुद्दे, सूचना का अधिकार, ई पंचायत आदि के बारे में विस्तार से बताया जाता है।
विभागीय कर्मचारी भी रहे नदारद
ट्रेनरों के मुताबिक पंचों को प्रशिक्षण शिविर के दौरान विभाग की अनेक खामियां भी रही। जिससे कैंप में आने वाले सभी पंचों को परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। प्रशिक्षण के दौरान ग्राम सचिव तथा कोई संबंधित कर्मचारी इस दौरान उपस्थित रहना आवश्यक होता हैं, लेकिन विभाग को कोई भी कर्मचारी या अधिकारी प्रशिक्षण में नहीं पहुंचा। लेखन व पठन सामग्री सभी को वितरित नहीं की गई। वीडियोग्राफी तथा फोटो कैंप के दौरान अहम होती हैं, लेकिन विभाग ने कोई भी इंतजाम नहीं किए। ट्रेनिंग देने वाले प्रशिक्षकों के मुताबिक करीब छह माह पूर्व खंड कार्यालयों को प्रशिक्षण की सूचना भेज दी जाती हैं जिसकी जानकारी बीडीओ द्वारा सरपंचों को देनी होती हैं, लेकिन टीम सदस्यों ने बताया कि कुछ गांव के सरपंचों का यह आरोप है कि कार्यालय से उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई।
हमने समय रहते सूचना दे दी थी, लेकिन पता नहीं पंच रुचि क्यों नहीं ले रहें। विभाग ने तैयारियां लगभग पूरी कर रखी थी। मेरे पास लोहारू का चार्ज भी है, इसलिए में उपस्थित नहीं हो सका। अन्य कर्मचारियों की अगर लापरवाही की बात सामने आने पर कोई आदेश मिलते है तो उस अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इकबाल राठी, बीडीपीओ, दादरी द्वितीय खंड