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खुले में डाला जा रहा फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 Jan 2017 12:30 AM IST
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भिवानी में इंडस्ट्रीज एरिया की विभिन्न फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी इन दिनों खुले में डाला जा रहा है। फैक्ट्री के कर्मचारी रात को चुपचाप पानी को इंडस्ट्रीज एरिया की ग्रीन बेल्ट या साथ लगते पालुवास गांव के खेतों में डाल रहे है। शिकायतों के बाद हुडा अधिकारियों ने छह फैक्ट्री मालिकों को इस बारे में नोटिस दिया है। साथ ही एफआईआर दर्ज कराने की भी बात चल रही है। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में भी इसकी शिकायत की गई है।
इंडस्ट्रीज एरिया की विभिन्न फैक्ट्रियों में प्लास्टिक बारदाना, निवार, बैग, मेडिकल उपकरण, लोहे की ब्लेड, चद्दर, टीन, धागा, कपड़ा आदि का निर्माण कार्य होता है। निर्माण सामग्री में केमिकल का प्रयोग किया जाता है। केमिकल प्रयोग के बाद केमिकल युक्त पानी को गली या ग्रीन बेल्ट में छोड़ा जा रहा है। हुडा अधिकारियों ने आपत्ति जताई तो फैक्ट्री संचालकों ने गुपचुप तरीके से पालुवास गांव की ओर से इस गंदे पानी को छोड़ना शुरू कर दिया। कुछ फैक्ट्री मालिक तो इसे सीवर में छोड़ने लगे। केमिकल होने के कारण यह जमता है, जिस कारण सीवर लाइन में ब्लॉकेज की समस्या बनती है।
पालुवास गांव के ग्रामीणों ने इसकी शिकायत हुडा अधिकारियों को की तो विभाग अधिकारियों ने निरीक्षण के बाद छह फैक्ट्री मालिकों को केमिकल युक्त पानी खुले में डाले जाने पर नोटिस भेजा है। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। हुडा अधिकारियों ने नोटिस देने के अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी शिकायत की है।
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घातक है हाइड्रोकार्बन
केमिकल वाले पानी में हाइड्रोकार्बन होता है, जो मानव शरीर, पशुओं सभी के लिए घातक है। मानव शरीर में एलर्जी व अन्य तरह की बीमारियां हो सकती है। अगर यह भवन के पास है तो भवन को भी खराब कर देता है।
आखिर डाले कहां केमिकल युक्त पानी
फैक्ट्री मालिकों के समक्ष समस्या यह भी है कि आखिर केमिकल युक्त पानी डाले कहा। इंडस्ट्रीज एरिया में सीवर लाइन 1974 में डली थी जो कि आधा इंची है। ढाई साल पहले मुख्यमंत्री ने इंडस्ट्रीज एरिया के लिए सीएसीपीटी प्लांट की घोषणा की। अब इसके पांच करोड़ रुपये भी आ चुके है मगर प्लांट का निर्माण नहीं होने तक यह केमिकल का पानी लोगों के लिए परेशानी बना है।
केमिकल युक्त पानी खुले में डाला जा रहा है। इस बाबत छह फैक्ट्री मालिकों को नोटिस भेजे गए है। पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड को भी रिपोर्ट भेजी गई है।
नरेश शर्मा, एसडीओ, हुडा विभाग
केमिकल का पानी फैक्ट्री मालिक खुले में डाल रहे है। लोग जिसे केमिकल का पानी समझ रहे है दरअसल वह सर्फ का पानी है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद आज ही गांव की ओर जा रहा पानी बंद कर दिया गया है। अब सीवर लाइन में पानी चल रहा है। सीएसीपीटी प्लांट बनना है। ढाई साल पहले घोषणा हो चुकी है। अब पांच करोड़ रुपये भी नप के अकाउंट में आ चुके है।
शैलेंद्र जैन, प्रधान, इंस्डट्रीज एरिया एसोसिएशन
पिछले वर्ष कार्रवाई के लिए गए थे तो उस समय के मंत्री घनश्याम सर्राफ के साथ इंडस्ट्रीज के लोगों ने कहा था कि यहां सीआईटीपी प्लांट लगना है और इसी के चलते दिसंबर 2016 तक का समय दिया गया। अब दिया गया समय बीत चुका है और अब इसमें जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
विनय गिल, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
इंडस्ट्रीज एरिया की विभिन्न फैक्ट्रियों में प्लास्टिक बारदाना, निवार, बैग, मेडिकल उपकरण, लोहे की ब्लेड, चद्दर, टीन, धागा, कपड़ा आदि का निर्माण कार्य होता है। निर्माण सामग्री में केमिकल का प्रयोग किया जाता है। केमिकल प्रयोग के बाद केमिकल युक्त पानी को गली या ग्रीन बेल्ट में छोड़ा जा रहा है। हुडा अधिकारियों ने आपत्ति जताई तो फैक्ट्री संचालकों ने गुपचुप तरीके से पालुवास गांव की ओर से इस गंदे पानी को छोड़ना शुरू कर दिया। कुछ फैक्ट्री मालिक तो इसे सीवर में छोड़ने लगे। केमिकल होने के कारण यह जमता है, जिस कारण सीवर लाइन में ब्लॉकेज की समस्या बनती है।
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पालुवास गांव के ग्रामीणों ने इसकी शिकायत हुडा अधिकारियों को की तो विभाग अधिकारियों ने निरीक्षण के बाद छह फैक्ट्री मालिकों को केमिकल युक्त पानी खुले में डाले जाने पर नोटिस भेजा है। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। हुडा अधिकारियों ने नोटिस देने के अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी शिकायत की है।
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घातक है हाइड्रोकार्बन
केमिकल वाले पानी में हाइड्रोकार्बन होता है, जो मानव शरीर, पशुओं सभी के लिए घातक है। मानव शरीर में एलर्जी व अन्य तरह की बीमारियां हो सकती है। अगर यह भवन के पास है तो भवन को भी खराब कर देता है।
आखिर डाले कहां केमिकल युक्त पानी
फैक्ट्री मालिकों के समक्ष समस्या यह भी है कि आखिर केमिकल युक्त पानी डाले कहा। इंडस्ट्रीज एरिया में सीवर लाइन 1974 में डली थी जो कि आधा इंची है। ढाई साल पहले मुख्यमंत्री ने इंडस्ट्रीज एरिया के लिए सीएसीपीटी प्लांट की घोषणा की। अब इसके पांच करोड़ रुपये भी आ चुके है मगर प्लांट का निर्माण नहीं होने तक यह केमिकल का पानी लोगों के लिए परेशानी बना है।
केमिकल युक्त पानी खुले में डाला जा रहा है। इस बाबत छह फैक्ट्री मालिकों को नोटिस भेजे गए है। पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड को भी रिपोर्ट भेजी गई है।
नरेश शर्मा, एसडीओ, हुडा विभाग
केमिकल का पानी फैक्ट्री मालिक खुले में डाल रहे है। लोग जिसे केमिकल का पानी समझ रहे है दरअसल वह सर्फ का पानी है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद आज ही गांव की ओर जा रहा पानी बंद कर दिया गया है। अब सीवर लाइन में पानी चल रहा है। सीएसीपीटी प्लांट बनना है। ढाई साल पहले घोषणा हो चुकी है। अब पांच करोड़ रुपये भी नप के अकाउंट में आ चुके है।
शैलेंद्र जैन, प्रधान, इंस्डट्रीज एरिया एसोसिएशन
पिछले वर्ष कार्रवाई के लिए गए थे तो उस समय के मंत्री घनश्याम सर्राफ के साथ इंडस्ट्रीज के लोगों ने कहा था कि यहां सीआईटीपी प्लांट लगना है और इसी के चलते दिसंबर 2016 तक का समय दिया गया। अब दिया गया समय बीत चुका है और अब इसमें जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
विनय गिल, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड