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लोहारू में धरना उठवाने के प्रयास के बाद तनाव

Fri, 17 Jun 2016 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 17 Jun 2016 12:18 AM IST
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जाट आरक्षण - फोटो : ANI
आरक्षण की मांग को लेकर जाट समुदाय का धरना लोहारू में भी शुरू हो गया। प्रशासन ने धरने को अवैध बताकर हटाने का प्रयास किया तो तनाव बढ़ गया। धरने पर लोग बोले कि वे गिरफ्तारी से नहीं डरते। डीएसपी कुलदीप सिंह ने जाटों को अपना धरना खत्म करने तथा कानून का पालन करने की सलाह दी। धरनारत जाटों की गिरफ्तारी के लिए मौके पर पुलिस बल तथा गाड़ियों को लाया गया। बाद में धरने की जगह को बदलने पर लोग सहमत हो गए।
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बृहस्पतिवार सुबह करीबन 11 बजे जाट समाज के लोगों ने दादरी मोड़ पर गोरखनाथ मंदिर की खाली पड़ी जगह पर धरना शुरू कर दिया। इसके बाद धरना हटवाने के लिए तहसीलदार को मौके पर पहुंचे तथा इसी दौरान पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। जाट समाज के लोगों का कहना था कि वे शांतिपूर्वक अपना धरना दे रहे हैं तथा धरने में बुजुर्ग लोग ही बैठेंगे। गांवों से युवाओं को धरने पर नहीं आने दिया जाएगा तथा शांति भंग नहीं होने दी जाएगी। मगर प्रशासन धरने को हटवाने पर अड़ गया तथा धरना दे रहे जाट समाज के लोगों को तहसीलदार ने धारा 144 तोड़ने के नोटिस दे दिए।
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इसी दौरान एसडीएम सतबीर सिंह जांगू तथा डीएसपी कुलदीप सिंह मौके पर पहुंच गए तथा कहा कि तुमने गलत जगह पर धरना शुरू किया है। इस पर जाट समाज के लोगों ने साफ कहा कि उन्होंने प्रशासन को जगह मुहैया कराने के लिए निवेदन किया था लेकिन उन्हें जंगल में बदबूदार जगह की अनुमति दी तथा उस जगह पर धरना नहीं दिया जा सकता। वे शांतिपूर्वक अपना धरना चलाना चाहते हैं। इसी दौरान एसडीएम ने उनको गिरफ्तार करने की बात कही तो जाटों ने कहा कि वे गिरफ्तारी से नहीं डरते तथा चाहे तो प्रशासन उनको अभी गिरफ्तार कर ले। इसके बाद तनाव बढ़ गया। मौके पर और फोर्स व वाहन बुलाए गए।
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गर्मागर्मी के बीच प्रशासन के साथ दोबारा बातचीत हुई और धरना दे रहे जाट समाज के लोगों को समझाया। जाटों के साथ बातचीत के बाद हल निकाला गया कि आज के धरने के बाद धरनास्थल बदल लिया जाएगा और यदि 19 जून से धरना दिया जाता है तो उसके लिए प्रशासन से परमिशन ली जाए। परमिशन के लिए जाटों ने इस जगह का चुनाव करने की बात कही।

धरने पर बैठे अखिल भारतीय जाट संघर्ष समिति नेताओं दो टूक जवाब, सिर्फ हमें बुलाएंगे तो ही जाएंगे बातचीत करने
जाट आरक्षण व अन्य मांगों के लिए धनाना पर बैठे जाट नेताओं ने साफ कहा है कि अगर सीएम सिर्फ अखिल भारतीय जाट संघर्ष समिति को ही बातचीत के लिए बुलाएंगे तो ही वे बातचीत के लिए जाएंगे। उधर बृहस्पतिवार को विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेता धरने को समर्थन देने पहुंचे। कुछ अन्य बिरादरी के लोगों और पूर्व सरपंचों ने भी समर्थन दिया। वहीं आरक्षण आंदोलन को लेकर सबकी निगाहें 17 जून के कोर्ट के फैसले पर टिकी है।


बृहस्पतिवार को धरने के दौरान लोगों ने सरकार के ढुलमुल रवैये पर रोष जताया और कहा कि सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहलू नजर नहीं आ रहा है। जाट नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री सिर्फ अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति को बातचीत के लिए बुलाएंगे तो ही वे बातचीत के लिए जाएंगे। धरने में 19 को धनाना में प्रस्तावित रैली में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का भी आह्वान किया गया। धरने में इनेलो नेता बलदेव घनघस, हरिजन सेल के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट ब्रह्मानंद ने पहुंचकर भी समर्थन दिया। इसके अलावा कुछ अन्य बिरादरी के लोग व पूर्व सरपंच भी धरने पर पहुंचे और समर्थन दिया। धरने की अध्यक्षता जाटू खाप 84 के प्रधान राजमल ने की। समिति के जिलाध्यक्ष होशियार सिंह जताई ने बताया कि धरने में सभी का समर्थन मिल रहा है। 19 जून की रैली में 12 गांवों के सभी बिरादरी के लोग भाग लेंगे।
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