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पिता का हाथ बंटाने को बबीता ने थामा रोडवेज का स्टेयरिंग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Sep 2016 12:59 AM IST
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युवती
- फोटो : अमर उजाला
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भिवानी के चरखी दादरी में बेटियों को मां-बाप पर बोझ बताने वालों के लिए गांव मौड़ी निवासी बबीता ने नजीर पेश की है। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते पिता का खेती कार्य में हाथ बंटाने के उद्देश्य से बबीता ने तीन साल पहले ट्रैक्टर चलाना सीखा था। हरियाणा पुलिस का फिजिकल पास कर लिखित परीक्षा दे चुकी बबीता ने अब नौकरी की चाह में रोडवेज बस का स्टेरिंग थाम लिया है। हैवी लाइसेंस के लिए चरखी दादरी रोडवेज ट्रेनिंग सेंटर से अब वह 25 दिन की ट्रेनिंग भी पूरी कर चुकी है। दस दिन बाद ट्रेनिंग पूरी हो जाने के बाद बबीता को हैवी
लाइसेंस के लिए हरी झंडी मिल जाएगी। बबीता का सपना है कि रोडवेज या पुलिस विभाग में ही नौकरी करे।
बबीता चार बहन-भाइयों में दूसरे नंबर की है। बड़ी बहन की शादी व भाई के छोटे होने के चलते बबीता ने अपने पिता बदन सिंह की पारिवारिक जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर ले लिया। बीए पास बबीता पिछले तीन सालों से कृषि कार्यों के लिए ट्रैक्टर लेकर खुद खेतों में पहुंच रही है। बकौल बबीता बड़ी बहन की शादी के बाद उसने पिता का हाथ बंटाने की ठान ली थी। जब मां शीला देवी व पिता बदन सिंह से ट्रैक्टर सीखने बारे में बात की तो उन्होंने उसकी सोच को खूब सराहा। इसके बाद पिता ने उसे ट्रैक्टर सिखाया। महज दस दिन के अभ्यास के बाद वह ट्रैक्टर चलाने में निपुण हो गई। इसके बाद कुछ दिनों पहले जब समाचार पत्र में राजस्थान की एक लड़की द्वारा रोडवेज बस दौड़ाने की खबर पढ़ी तो उसके मन में भी ट्रेनिंग करने का ख्याल आया। ताकि रोडवेज व पुलिस विभाग में उसे आसानी से नौकरी मिल सके और वह अपने पैरों पर खड़ी होकर घरेलू खर्च में पिता का हाथ बंटा सके। ट्रेनिंग सेंटर इंचार्ज राजेश रावलधी ने बताया कि बबीता ट्रैक्ट्रर व अन्य वाहन चलाने में पहले से ही एक्सपर्ट थी। थोड़ी बहुत बताने पर ही वह बड़ी आसानी से रोडवेज बस चलाने लगी। वह ट्रेनिंग ले रहे बैच में एकमात्र लड़की है।
प्रदेश सरकार के वैकेंसी निकालने का इंतजार
चरखी दादरी रोडवेज डिपो में ट्रेनिंग लेने वाली बबीता दूसरी युवती है। इससे पहले खेड़ी बत्तर निवासी प्रियंका भी चालक की ट्रेनिंग पूरी कर चुकी है। प्रियंका को जहां अधिकारियों ने बैच की बेस्ट अभ्यार्थी बताया था तो वहीं बबीता के बारे में भी वही राय है। प्रियंका को तो चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट से कुछ समय पहले ऑफर भी मिला था। मगर प्रदेश में ही नौकरी करने की इच्छा के साथ प्रियंका को प्रदेश सरकार की वेकेंसी का इंतजार है। ठीक उसी प्रकार अब बबीता ने भी प्रदेश सरकार से रोडवेज में महिलाओं के लिए पोस्ट निकालने की मांग की है।
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लाइसेंस के लिए हरी झंडी मिल जाएगी। बबीता का सपना है कि रोडवेज या पुलिस विभाग में ही नौकरी करे।
बबीता चार बहन-भाइयों में दूसरे नंबर की है। बड़ी बहन की शादी व भाई के छोटे होने के चलते बबीता ने अपने पिता बदन सिंह की पारिवारिक जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर ले लिया। बीए पास बबीता पिछले तीन सालों से कृषि कार्यों के लिए ट्रैक्टर लेकर खुद खेतों में पहुंच रही है। बकौल बबीता बड़ी बहन की शादी के बाद उसने पिता का हाथ बंटाने की ठान ली थी। जब मां शीला देवी व पिता बदन सिंह से ट्रैक्टर सीखने बारे में बात की तो उन्होंने उसकी सोच को खूब सराहा। इसके बाद पिता ने उसे ट्रैक्टर सिखाया। महज दस दिन के अभ्यास के बाद वह ट्रैक्टर चलाने में निपुण हो गई। इसके बाद कुछ दिनों पहले जब समाचार पत्र में राजस्थान की एक लड़की द्वारा रोडवेज बस दौड़ाने की खबर पढ़ी तो उसके मन में भी ट्रेनिंग करने का ख्याल आया। ताकि रोडवेज व पुलिस विभाग में उसे आसानी से नौकरी मिल सके और वह अपने पैरों पर खड़ी होकर घरेलू खर्च में पिता का हाथ बंटा सके। ट्रेनिंग सेंटर इंचार्ज राजेश रावलधी ने बताया कि बबीता ट्रैक्ट्रर व अन्य वाहन चलाने में पहले से ही एक्सपर्ट थी। थोड़ी बहुत बताने पर ही वह बड़ी आसानी से रोडवेज बस चलाने लगी। वह ट्रेनिंग ले रहे बैच में एकमात्र लड़की है।
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प्रदेश सरकार के वैकेंसी निकालने का इंतजार
चरखी दादरी रोडवेज डिपो में ट्रेनिंग लेने वाली बबीता दूसरी युवती है। इससे पहले खेड़ी बत्तर निवासी प्रियंका भी चालक की ट्रेनिंग पूरी कर चुकी है। प्रियंका को जहां अधिकारियों ने बैच की बेस्ट अभ्यार्थी बताया था तो वहीं बबीता के बारे में भी वही राय है। प्रियंका को तो चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट से कुछ समय पहले ऑफर भी मिला था। मगर प्रदेश में ही नौकरी करने की इच्छा के साथ प्रियंका को प्रदेश सरकार की वेकेंसी का इंतजार है। ठीक उसी प्रकार अब बबीता ने भी प्रदेश सरकार से रोडवेज में महिलाओं के लिए पोस्ट निकालने की मांग की है।
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