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बिजली बिलों की डिलीवरी में देरी, हजारों उपभोक्ता परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Sep 2016 12:36 AM IST
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बिजली निगम की कार्यप्रणाली से शहर के हजारों उपभोक्ताओं परेशान हैं। बिलों की डिलीवरी में देरी उपभोक्ताओं के लिए आफत बनी है। बिल के भुगतान की अंतिम तिथि से दो-तीन दिन पहले लोगों तक बिजली बिल पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में आखिरी तारीख से पहले बिल भरने में उपभोक्ताओं के पसीने छूट रहे हैं। यदि भुगतान नहीं कर पाए तो जुर्माना राशि चुकानी पड़ रही है।
बिजली निगम ने अगस्त माह से शहरी क्षेत्र मेें हर माह बिजली बिल भरवाने की कवायद शुरू की, लेकिन उपभोक्ताओं तक समय पर बिल भेजने में निगम फेल साबित हुआ। बिल बनने व अंतिम तिथि के बीच दस दिन का अंतर होने के बावजूद उपभोक्ता को बिल भरने में मामूली समय मिलता है।
शहर में डिवीजन-वन, डिवीजन-टू, सब-डिवीजन क्षेत्र के अंतर्गत करीबन 90 हजार उपभोक्ता हैं। अगस्त माह में मंथली बिलिंग शुरू करने से पूर्व उपभोक्ताओं को दो महीने का बिल भरने के लिए 15 दिनों का समय मिलता था। लेकिन मंथली बिलिंग होने के बाद बिना जुर्माना बिल जमा करवाने के लिए दस दिन की समय सीमा मिलती है। परंतु बिल बनने व प्रिंट होकर आने व उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते सप्ताह भर का समय जाया होने से हजारों उपभोक्ताओं को खामियाजा भुगतना पड़ता है।
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ये है बिलिंग की प्रक्रिया
मंथली बिलिंग के लिए हर महीने फील्ड कर्मचारी रीडिंग लेकर आते हैं। उसके बाद कंप्यूटर पर सॉफ्टवेयर के जरिए उपभोक्ता के अकाउंट नंबर में रीडिंग अपडेट की जाती है। फिर सॉफ्टवेयर के माध्यम से बिल जनरेट कर हिसार व नोएडा मुख्यालय भेजे जाते हैं। बिल जनरेट होने वाले समय से ही दस दिन बाद की अंतिम तिथि अंकित हो जाती है। मुख्यालय से अगले दिन बिल बनकर वापस डिवीजन ऑफिस कर्मचारियों को मिल जाते है। लेकिन यहां से सभी बिलों को प्रिंट करवाने के लिए सर्कल ऑफिस फॉरवर्ड किया जाता है। जहां पर रातभर बिलों के प्रिंट निकाले जाते हैं। उसके बाद फील्ड कर्मचारी अलग-अलग एरिया के मुताबिक बिल पहुंचाने के लिए जाते हैं। लेकिन हजारों की संख्या में बिल होने के कारण चार से पांच दिन में बिल बंट पाते है। ऐसे में उपभोक्ताओं को बिल मिलने पर जमा करवाने के लिए दो से तीन दिन का समय बमुश्किल मिल पाता है।
दो दिन का समय मिला
ढाणा रोड निवासी गोरखनाथ, प्रवीन, रामनिवास, प्रमोद का कहना है कि मंथली बिलिंग के बाद बिल भरने के लिए महज दो दिन का समय मिलता है। इस बार बिजली कर्मचारी 27 तारीख को बिल देकर गए। जब अंतिम तारीख पर नजर डाली तो 29 सितंबर अंकित मिली। ऐसे में अंतिम दो दिन में बिना जुर्माना लगे बिल भरवाने के लिए लंबी लाइनों में घंटों इंतजार करना पड़ता है। निगम को उपभोक्ताओं की परेशानी को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
दो महीने की बिलिंग पर उपभोक्ताओं को बिल भरने को 15 दिनों का समय मिलता था। लेकिन मंथली बिलिंग होने के बाद से सॉफ्टवेयर ऑटोमेटिक बिल जनरेट करते ही दस दिन बाद की अंतिम तिथि अंकित कर देता है। लेकिन बिल बनने, प्रिंट होने व हजारों की संख्या में होने के कारण उपभोक्ताओं तक देरी से पहुंचते है। निगम उपभोक्ताओं की परेशानी को दूर करने का प्रयास कर रहा है। जल्द ही कोई न कोई समाधान निकाला जाएगा।
रणबीर सिंह, एक्सईन, बिजली निगम
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बिजली निगम ने अगस्त माह से शहरी क्षेत्र मेें हर माह बिजली बिल भरवाने की कवायद शुरू की, लेकिन उपभोक्ताओं तक समय पर बिल भेजने में निगम फेल साबित हुआ। बिल बनने व अंतिम तिथि के बीच दस दिन का अंतर होने के बावजूद उपभोक्ता को बिल भरने में मामूली समय मिलता है।
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शहर में डिवीजन-वन, डिवीजन-टू, सब-डिवीजन क्षेत्र के अंतर्गत करीबन 90 हजार उपभोक्ता हैं। अगस्त माह में मंथली बिलिंग शुरू करने से पूर्व उपभोक्ताओं को दो महीने का बिल भरने के लिए 15 दिनों का समय मिलता था। लेकिन मंथली बिलिंग होने के बाद बिना जुर्माना बिल जमा करवाने के लिए दस दिन की समय सीमा मिलती है। परंतु बिल बनने व प्रिंट होकर आने व उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते सप्ताह भर का समय जाया होने से हजारों उपभोक्ताओं को खामियाजा भुगतना पड़ता है।
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ये है बिलिंग की प्रक्रिया
मंथली बिलिंग के लिए हर महीने फील्ड कर्मचारी रीडिंग लेकर आते हैं। उसके बाद कंप्यूटर पर सॉफ्टवेयर के जरिए उपभोक्ता के अकाउंट नंबर में रीडिंग अपडेट की जाती है। फिर सॉफ्टवेयर के माध्यम से बिल जनरेट कर हिसार व नोएडा मुख्यालय भेजे जाते हैं। बिल जनरेट होने वाले समय से ही दस दिन बाद की अंतिम तिथि अंकित हो जाती है। मुख्यालय से अगले दिन बिल बनकर वापस डिवीजन ऑफिस कर्मचारियों को मिल जाते है। लेकिन यहां से सभी बिलों को प्रिंट करवाने के लिए सर्कल ऑफिस फॉरवर्ड किया जाता है। जहां पर रातभर बिलों के प्रिंट निकाले जाते हैं। उसके बाद फील्ड कर्मचारी अलग-अलग एरिया के मुताबिक बिल पहुंचाने के लिए जाते हैं। लेकिन हजारों की संख्या में बिल होने के कारण चार से पांच दिन में बिल बंट पाते है। ऐसे में उपभोक्ताओं को बिल मिलने पर जमा करवाने के लिए दो से तीन दिन का समय बमुश्किल मिल पाता है।
दो दिन का समय मिला
ढाणा रोड निवासी गोरखनाथ, प्रवीन, रामनिवास, प्रमोद का कहना है कि मंथली बिलिंग के बाद बिल भरने के लिए महज दो दिन का समय मिलता है। इस बार बिजली कर्मचारी 27 तारीख को बिल देकर गए। जब अंतिम तारीख पर नजर डाली तो 29 सितंबर अंकित मिली। ऐसे में अंतिम दो दिन में बिना जुर्माना लगे बिल भरवाने के लिए लंबी लाइनों में घंटों इंतजार करना पड़ता है। निगम को उपभोक्ताओं की परेशानी को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
दो महीने की बिलिंग पर उपभोक्ताओं को बिल भरने को 15 दिनों का समय मिलता था। लेकिन मंथली बिलिंग होने के बाद से सॉफ्टवेयर ऑटोमेटिक बिल जनरेट करते ही दस दिन बाद की अंतिम तिथि अंकित कर देता है। लेकिन बिल बनने, प्रिंट होने व हजारों की संख्या में होने के कारण उपभोक्ताओं तक देरी से पहुंचते है। निगम उपभोक्ताओं की परेशानी को दूर करने का प्रयास कर रहा है। जल्द ही कोई न कोई समाधान निकाला जाएगा।
रणबीर सिंह, एक्सईन, बिजली निगम
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