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भागवत कथा जीवन जीने की कला सिखाने वाला अमूल्य ग्रंथ है : चरणदास
Wed, 04 Jun 2025 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 04 Jun 2025 11:44 PM IST
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हनुमान जोहड़ी मंदिर में पूजा अर्चना करते चरणदास महाराज व अन्य।
भिवानी। युवा जागृति एवं जनकल्याण मिशन ट्रस्ट द्वारा हनुमान जोहड़ी मंदिर में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा तीसरे दिन भी जारी रही। कथा व्यास श्रीपाल दास महाराज ने कहा कि भागवत कथा जीवन जीने की कला सिखाने वाला अमूल्य ग्रंथ है।
उन्होंने भगवान शिव-पार्वती की कथा का वर्णन किया तथा विवाह की मर्यादाएं एवं दायित्व पर प्रकाश डाला। कथा व्यास श्रीपाल दास महाराज ने माता सती के आत्मत्याग से लेकर पुनर्जन्म में पार्वती के रूप में जन्म, कठोर तपस्या और अंतत: भगवान शिव से विवाह तक की कथा विस्तारपूर्वक सुनाई। उन्होंने बताया कि यह कथा केवल एक दिव्य प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि यह विवाह की मर्यादा, समर्पण, धैर्य और पारिवारिक दायित्वों की सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विवाह केवल एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि आत्मिक और आध्यात्मिक यात्रा है।
शिव-पार्वती विवाह हमें सिखाता है कि समझ, सम्मान और धैर्य के साथ निभाया गया संबंध ही वास्तविक सुख का आधार बनता है। इस मौके पर बालयोगी महंत चरणदास महाराज ने कहा कि भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की कला सिखाने वाला अमूल्य ग्रंथ है। इससे हमें सत्य, प्रेम, करुणा, सेवा और त्याग जैसे संस्कार मिलते हैं। इस अवसर पर राजेंद्र अग्रवाल, मोतीलाल शर्मा, राजेंद्र प्रसाद, रावल सिंह राजपुरोहित, प्रवीण गर्ग, महेश सरपंच, समाजसेवी रमेश सैनी, पर्यावरण प्रहरी विजय सिंहमार, सुशील गुप्ता, संजय गुप्ता मौजूद रहे।
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उन्होंने भगवान शिव-पार्वती की कथा का वर्णन किया तथा विवाह की मर्यादाएं एवं दायित्व पर प्रकाश डाला। कथा व्यास श्रीपाल दास महाराज ने माता सती के आत्मत्याग से लेकर पुनर्जन्म में पार्वती के रूप में जन्म, कठोर तपस्या और अंतत: भगवान शिव से विवाह तक की कथा विस्तारपूर्वक सुनाई। उन्होंने बताया कि यह कथा केवल एक दिव्य प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि यह विवाह की मर्यादा, समर्पण, धैर्य और पारिवारिक दायित्वों की सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विवाह केवल एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि आत्मिक और आध्यात्मिक यात्रा है।
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शिव-पार्वती विवाह हमें सिखाता है कि समझ, सम्मान और धैर्य के साथ निभाया गया संबंध ही वास्तविक सुख का आधार बनता है। इस मौके पर बालयोगी महंत चरणदास महाराज ने कहा कि भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की कला सिखाने वाला अमूल्य ग्रंथ है। इससे हमें सत्य, प्रेम, करुणा, सेवा और त्याग जैसे संस्कार मिलते हैं। इस अवसर पर राजेंद्र अग्रवाल, मोतीलाल शर्मा, राजेंद्र प्रसाद, रावल सिंह राजपुरोहित, प्रवीण गर्ग, महेश सरपंच, समाजसेवी रमेश सैनी, पर्यावरण प्रहरी विजय सिंहमार, सुशील गुप्ता, संजय गुप्ता मौजूद रहे।
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