लोहारू की लड़ाई: जेपी दलाल और राजबीर फरटिया के बीच टक्कर, सरकार के कामों या सामाजिक मुद्दों पर लगेगी मुहर
लोहारू हरियाणा के दक्षिणी छोर पर भिवानी में स्थित है। भिवानी से यह करीब 60 किलोमीटर दूर है। इसका नाम लोहारों (के नाम पर पड़ा है जो तत्कालीन जयपुर राज्य के लिए सिक्के बनाने का काम करते थे। क्षेत्रफल व जनसंख्या के लिहाज से लोहारू छोटा जरूर है, मगर इसका इतिहास बहुत समृद्ध है।
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राजस्थान की सीमा से मात्र पांच किलोमीटर दूरी पर स्थित लोहारू सीट पर सियासी गर्मी ने सभी के पसीने छुड़ा रखे हैं। इस सीट का चुनाव शेयर मार्केट की तरह है। कभी ऊपर तो कभी नीचे। भाजपा ने राज्य के वित्त मंत्री जेपी दलाल पर दोबारा से दांव खेला है, वहीं 1996 से लगातार हार रही कांग्रेस ने इस बार मैदान में राजबीर फरटिया को मैदान में उतारा है। दोनों ने चुनाव जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोक दी है।
मनोहर सरकार में कृषि और फिर वित्त मंत्री रहे जेपी दलाल के विकास कार्यों की खूब चर्चा है तो लोग फरटिया के सामाजिक कार्यों की काफी तारीफ करते हैं। क्षेत्र में जितने भी लोगों से मुलाकात करेंगे तो आधे लोग दलाल की बात करेंगे तो आधे फरटिया के बारे में। दोनों ही उम्मीदवारों के कामों की जनता में खूब चर्चा है। मगर जीतना सिर्फ एक को। हालांकि कुछ ऐसे समीकरण हैं, जो चुनाव में काफी अहम रखते हैं। ये समीकरण जिसकी तरफ गए तो वह चुनाव निकाल ले जाएगा।
भाजपा ने सिर्फ एक बार खिलाया कमल
पूरे हरियाणा में चर्चा का विषय बनी लोहारू सीट कभी कांग्रेस का गढ़ था। अब तक 13 चुनाव में से सात चुनाव कांग्रेस ने ही जीते हैं, मगर पिछले छह चुनाव में उसे करारी हार भी झेलनी पड़ी है। भाजपा ने सिर्फ एक बार कमल खिलाया है। पिछला चुनाव भाजपा के टिकट पर जेपी दलाल लड़े और कांग्रेस उम्मीदवार सोमबीर को 17 हजार वोटों से हराया।
पहला चुनाव जीतते ही भाजपा ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया। 2014 में वह चुनाव हार गए थे। इसके बावजूद वह इलाके में सक्रिय रहे। लोहारू के भगत सिंह चौक मार्केट के दुकानदार रोहित कहते हैं कि इस इलाके में नहरी पानी की बड़ी समस्या थी, जिसे जेपी दलाल ने दूर करवाया है। खेतों में पहली बार पानी पहुंचा है। इस इलाके में बंसीलाल के बाद यदि किसी ने काम करवाए हैं तो वह दलाल हैं।
बिजली व्यवस्था भी हुई ठीक
फसलों का मुआवजा भी खूब मिला है। सुहासणा गांव के धर्मवीर सिंह कहते हैं कि जेपी दलाल ने काम करवाते वक्त जात-पात का भेदभाव नहीं किया। इलाके में एक सामान कार्य करवाए हैं। सड़कों का निर्माण हुआ है। बिजली व्यवस्था भी ठीक हुई है। उधर, फरटिया गांव के राम अवतार इससे इत्तेफाक नहीं रखते। नाराजगी भरे लहजे में वह कहते हैं कि भले ही जेपी ने काम करवाए हैं, मगर भाजपा की सरकार में लोगों को लाइन में लगना पड़ा है। फैमिली आईडी के लिए खूब चक्कर काटने पड़े। अब लोग बदलाव चाहते हैं।
दोनों उम्मीदवार चुनाव में खूब पैसा खर्च कर रहे
राजबीर फरटिया उम्मीदवार के तौर पर नया चेहरा हो सकते हैं, मगर इलाके वह जाना पहचाना चेहरा हैं। क्षेत्र में उनकी पहचान दानवीर की तौर पर है। उन्होंने कॉलेज जाने वाली लड़कियों के लिए बसों की मुफ्त सेवा उपलब्ध करवा रखी है। हर लड़की की शादी में वह न्यूनतम 51 सौ रुपये का शगुन देते हैं। गौशालाओं को भी उन्होंने खूब ग्रांट दे रखी है। फरटिया गांव के शेर सिंह कहते हैं कि राजबीर कई सामाजिक कार्य करवाए हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत पहचान बनी है। वह कुछ ही समय में लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए हैं। ऐसा लगता है कि इस बार कांग्रेस इस सीट से बाजी मार ले जाएगी। धनबल से मजबूत होने की वजह दोनों ही उम्मीदवार चुनाव में खूब पैसा भी खर्च कर रहे हैं।
क्या हैं समीकरण
1.करीब दो लाख की आबादी वाली लोहारू जाट बाहुल्य क्षेत्र है। दोनों ही उम्मीदवार जाट समुदाय से हैं। जाट वोटरों का विभाजन दोनों ही उम्मीदवारों के बीच होगा। ऐसे में गैर जाट वोट काफी अहमियत रखेंगे। यह वोट जिस तरह गया, वह चुनाव निकालने की स्थिति में होगा।
2.कांग्रेस उम्मीदवार राजबीर फरटिया को भितरघात का खतरा है। इस सीट से कांग्रेस के टिकट के लिए सोमबीर और नरेंद्र राज गागड़वास भी दावेदार थे। पार्टी ने सोमबीर को बाढड़ा से टिकट दे दी है। अब उनके समर्थक किस ओर जाते हैं, यह देखने वाली बात होगी। गागड़वास के समर्थकों पर भी लोगों की नजरें हैं।
3.लोहारू हलके में श्योराण खाप के 52 गांव हैं। बताया जाता है कि हलके में उनके करीब 60 हजार गांव है। इनका समर्थन भी चुनाव में हार-जीत के लिए काफी मायने रखेगा।
4. कुछ समय पहले आंदोलनकारी किसानों के लिए जेपी की ओर से दिया गया बयान भी चुनाव में वायरल हो रहा है। भाजपा का आरोप है कि सिर्फ कांग्रेस समर्थक इसकी चर्चा कर रहे हैं।
5.मतदाताओं का एक वर्ग साइलेंट है। जो यह अभी तक तय नहीं कर पाया है कि वह किसकी तरफ जाए। वह देखना चाहता है कि अंतिम समय हवा किसकी तरफ है। जिसकी तरफ हवा होगी, यह वर्ग उसी को अपना बहुमूल्य मत देगा।
किसके कितने वोट
जाट 68796
ब्राह्मण 23814
वैश्य 9261
राजपूत 21168
गुज्जर 19845
अहीर 10584
सैनी 7938
एससी 29235
इसलिए नाम पड़ा लोहारू
लोहारू हरियाणा के दक्षिणी छोर पर भिवानी में स्थित है। भिवानी से यह करीब 60 किलोमीटर दूर है। इसका नाम लोहारों (के नाम पर पड़ा है जो तत्कालीन जयपुर राज्य के लिए सिक्के बनाने का काम करते थे। क्षेत्रफल व जनसंख्या के लिहाज से लोहारू छोटा जरूर है, मगर इसका इतिहास बहुत समृद्ध है। आजादी से पहले तक लोहारू रियासत (रजवाड़ा) का मुख्यालय था और 1948 में इसका भारत संघ में विलय हुआ। इसमें 119 गांव हैं। इस सीट से बंसीलाल के जमाई सोमबीर सिंह विधायक रहे हैं। लोग उस जमाने में लोग इसे जमाई वाली सीट कहते थे।