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Bhiwani News: समर्पण और संघर्ष की बदौलत कांस्य पदक जीत पैरा ताइक्वांडो के फलक पर चमकीं अरुणा
Mon, 23 Oct 2023 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 23 Oct 2023 11:58 PM IST
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भिवानी।
अरुणा तंवर ने खेल के प्रति समर्पण, संघर्ष और कौशल की बदाैलत पैरा एशियन खेलों में कांस्य पदक प्राप्त कर देश की पहली महिला पैरा ताइक्वांडो खिलाड़ी होने का गौरव हासिल किया है। अरुणा ने चीन के हांग्जो में आयोजित 43 से 47 किलो भार वर्ग में यह कामयाबी हासिल की है। ताइक्वांडो में बेटी के कांस्य पदक जीतने पर भिवानी जिले के गांव दिनोद निवासी नरेश तंवर ने बताया कि बेटी के पैर में चोट की वजह से गोल्ड मेडल से चूक गई है। अब उसका अगला लक्ष्य 2024 में पेरिस में होने वाले पैरा ओलंपिक खेलों में गोल्ड जीतने का रहेगा।
नरेश ने कहना है कि उनकी बेटी ने बेहतर तैयारी की थी, मगर पैर में चोट का असर अब भी बना है। दरअसल अरुणा तंवर के पैर में 2021 में अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के दौरान पैर में चोट लग गई थी। जिसका उपचार भी अभी चल रहा है। अरुणा के पिता का कहना है कि बेटी के वापस आने के बाद चोट का बेहतर इलाज कराया जाएगा। इसी के बाद आगे की तैयारी होगी। भिवानी जिले के गांव दिनोद निवासी अरुणा तंवर दो भाइयों में इकलौती बहन है। पिता नरेश ने बताया कि बेटी अरुणा ने हाल ही में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से बीपीईएड की परीक्षा
उत्तीर्ण की है और अब वह एमपीईडी की तैयारी कर रही है। माता सोनिया गृहिणी है। चाचा पूर्व सरपंच विनोद ने भी बेटी की जीत पर खुशी जताई है। अरुणा की उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, साई समेत कई संगठनों ने बधाई दी है।
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बेटी के सपने की खातिर पिता ने लिया था कर्ज
अरुणा की सफलता के पीछे उसके स्वयं और परिवार का संघर्ष भी छिपा है। बेटी की सफलता के लिए प्राइवेट कंपनी में चालक दिनोद वासी नरेश ने न केवल कर्ज लिया, बल्कि परिवार के गहने तक बेचे। अनेक दफा परिस्थितियों के साथ समझौता किया, मगर हार नहीं मानी। परिवार की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए बेटी ने अब पदक हासिल किया है। 2016 में अपने खेल कॅरिअर की शुरुआत करने वाली अरुणा सात साल की अथक मेहनत से यह सफर तय किया। अरुणा ने स्वराज सिंह, सुखदेवराज और अशोक तीनों कोचों से प्रशिक्षण लिया।
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अरुणा तंवर ने खेल के प्रति समर्पण, संघर्ष और कौशल की बदाैलत पैरा एशियन खेलों में कांस्य पदक प्राप्त कर देश की पहली महिला पैरा ताइक्वांडो खिलाड़ी होने का गौरव हासिल किया है। अरुणा ने चीन के हांग्जो में आयोजित 43 से 47 किलो भार वर्ग में यह कामयाबी हासिल की है। ताइक्वांडो में बेटी के कांस्य पदक जीतने पर भिवानी जिले के गांव दिनोद निवासी नरेश तंवर ने बताया कि बेटी के पैर में चोट की वजह से गोल्ड मेडल से चूक गई है। अब उसका अगला लक्ष्य 2024 में पेरिस में होने वाले पैरा ओलंपिक खेलों में गोल्ड जीतने का रहेगा।
नरेश ने कहना है कि उनकी बेटी ने बेहतर तैयारी की थी, मगर पैर में चोट का असर अब भी बना है। दरअसल अरुणा तंवर के पैर में 2021 में अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के दौरान पैर में चोट लग गई थी। जिसका उपचार भी अभी चल रहा है। अरुणा के पिता का कहना है कि बेटी के वापस आने के बाद चोट का बेहतर इलाज कराया जाएगा। इसी के बाद आगे की तैयारी होगी। भिवानी जिले के गांव दिनोद निवासी अरुणा तंवर दो भाइयों में इकलौती बहन है। पिता नरेश ने बताया कि बेटी अरुणा ने हाल ही में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से बीपीईएड की परीक्षा
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उत्तीर्ण की है और अब वह एमपीईडी की तैयारी कर रही है। माता सोनिया गृहिणी है। चाचा पूर्व सरपंच विनोद ने भी बेटी की जीत पर खुशी जताई है। अरुणा की उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, साई समेत कई संगठनों ने बधाई दी है।
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बेटी के सपने की खातिर पिता ने लिया था कर्ज
अरुणा की सफलता के पीछे उसके स्वयं और परिवार का संघर्ष भी छिपा है। बेटी की सफलता के लिए प्राइवेट कंपनी में चालक दिनोद वासी नरेश ने न केवल कर्ज लिया, बल्कि परिवार के गहने तक बेचे। अनेक दफा परिस्थितियों के साथ समझौता किया, मगर हार नहीं मानी। परिवार की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए बेटी ने अब पदक हासिल किया है। 2016 में अपने खेल कॅरिअर की शुरुआत करने वाली अरुणा सात साल की अथक मेहनत से यह सफर तय किया। अरुणा ने स्वराज सिंह, सुखदेवराज और अशोक तीनों कोचों से प्रशिक्षण लिया।