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कोरोना ने पिता छीना, अब सरकार से उम्मीद
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भिवानी। कोरोना ने शहर के जैन चौक निवासी एक हंसते-खेलते परिवार को परेशान कर दिया है। परिवार के मुखिया की मौत के बाद अब कोई कमाने वाला नहीं है। मृतक का एक लड़का व एक लड़की है। पत्नी भी ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं है, जिसके कारण अब परिवार की आमदनी का कोई साधन नहीं बचा है।
जैन चौक के सैनी मोहल्ला निवासी ललित एक दुकान पर नौकरी कर अपने परिवार का गुजारा चला रहा था। उसके परिवार में पत्नी के अलावा दो बच्चे हैं। बेटा 15 साल का कार्तिक और बेटी 17 साल की कीर्ति है। पत्नी ममता सिर्फ 10वीं पास है। 10 नवंबर 2020 को कोरोना के चलते ललित की मौत हो गई थी। तब से परिवार पूरी तरह टूट गया है। कम पढ़ी-लिखी होने के कारण ममता कहीं नौकरी नहीं कर सकती है, वहीं बच्चे भी नाबालिग हैं। ममता के सामने बच्चों को खाना खिलाने से लेकर स्कूल फीस देने तक की चुनौती है। विपरीत हालात होने के बावजूद अभी तक परिवार को सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है।
स्कूल बंद है तो बेटा जाता है काम पर
ममता ने बताया कि जेठ और देवर उनकी मदद करते हैं, मगर फिर भी जो ललित करता था, उतना भला कोई कैसे कर पाएगा। ममता ने कहा कि परिवार की आमदनी का कोई साधन नहीं है। स्कूल बंद होने के कारण बेटा कार्तिक ही कई बार काम पर चला जाता है। जिस बेटे के दिन खेलने-कूदने के थे, उसको काम पर जाता देख कलेजा फट जाता है, मगर परिवार के पास कोई विकल्प भी तो नहीं है।
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बयान ---
जिले में ऐसे बच्चों के बारे में पता किया जा रहा है। अभी तक इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। जल्द ही डाटा एकत्र कर पीड़ितों को हर संभव मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
- नरेंद्र, जिला बाल संरक्षण अधिकारी।
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जैन चौक के सैनी मोहल्ला निवासी ललित एक दुकान पर नौकरी कर अपने परिवार का गुजारा चला रहा था। उसके परिवार में पत्नी के अलावा दो बच्चे हैं। बेटा 15 साल का कार्तिक और बेटी 17 साल की कीर्ति है। पत्नी ममता सिर्फ 10वीं पास है। 10 नवंबर 2020 को कोरोना के चलते ललित की मौत हो गई थी। तब से परिवार पूरी तरह टूट गया है। कम पढ़ी-लिखी होने के कारण ममता कहीं नौकरी नहीं कर सकती है, वहीं बच्चे भी नाबालिग हैं। ममता के सामने बच्चों को खाना खिलाने से लेकर स्कूल फीस देने तक की चुनौती है। विपरीत हालात होने के बावजूद अभी तक परिवार को सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है।
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स्कूल बंद है तो बेटा जाता है काम पर
ममता ने बताया कि जेठ और देवर उनकी मदद करते हैं, मगर फिर भी जो ललित करता था, उतना भला कोई कैसे कर पाएगा। ममता ने कहा कि परिवार की आमदनी का कोई साधन नहीं है। स्कूल बंद होने के कारण बेटा कार्तिक ही कई बार काम पर चला जाता है। जिस बेटे के दिन खेलने-कूदने के थे, उसको काम पर जाता देख कलेजा फट जाता है, मगर परिवार के पास कोई विकल्प भी तो नहीं है।
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जिले में ऐसे बच्चों के बारे में पता किया जा रहा है। अभी तक इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। जल्द ही डाटा एकत्र कर पीड़ितों को हर संभव मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
- नरेंद्र, जिला बाल संरक्षण अधिकारी।