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डेंगू के साथ ही निमोनिया ने बढ़ाई मुसीबत, प्रतिदिन आ रहे 20 मरीज
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बच्चे का चेकअप करते शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राज महता। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। इस साल गर्मी के मौसम में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने जिले में हालत बेकाबू कर दिए थे। वहीं सितंबर से डेंगू डंक मा रहा है। अब इन दोनों रोगों के बाद निमोनिया भी गंभीर होता जा रहा है। जिले में हर रोज नागरिक अस्पताल सहित शहर के निजी अस्पतालों में निमोनिया के 20 से अधिक मरीज सामने आ रहे हैं।
हल्की सर्दी में ही निमोनिया के मामले आने शुरू हो गए हैं तो कड़ाके की ठंड में हालत बिगड़ सकते हैं। वहीं लगातार बिगड़ती जा रही शहर की हवा भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती जा रही है, जिसका नुकसान फेफड़ों को हो रहा है।
निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है। यह मुख्य रूप से विषाणु या जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है। इसके अलावा निमोनिया सूक्ष्म जीव, कुछ दवाओं और अन्य रोगों के संक्रमण से भी हो सकता है। निमोनिया की चपेट में बच्चे, युवा और बुजुर्ग यानी हर आयुवर्ग के लोग आ सकते है। ऐसे में स्वास्थ्य का ध्यान रखना अति आवश्यक है। आज विश्व निमोनिया दिवस है।
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निमोनिया के लक्षण
निमोनिया होने पर फ्लू जैसे लक्षण महसूस होते हैं। ये लक्षण धीरे-धीरे या फिर तेजी से विकसित हो सकते हैं। निमोनिया का मुख्य लक्षण खांसी है। रोगी कमजोर और थका हुआ महसूस करता है। बलगम वाली खांसी से ग्रस्त होना। रोगी को बुखार के साथ पसीना और कंपकंपी भी हो सकती है। रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है या फिर वह तेजी से सांस लेने लगता है। सीने में दर्द होना। बेचैनी महसूस होना और भूख कम लगना।
छोटे बच्चों में निमोनिया के लक्षण
- छोटे बच्चों को बुखार के साथ पसीना व कंपकंपी होने लगती है।
- जब बच्चों को बहुत ज्यादा खांसी हो रही हो।
- वह अस्वस्थ दिख रहा हो।
- उसे भूख ना लग रही हो।
घर के अंदर रखें साफ सफाई
निमोनिया किसी भी मौसम में हो सकता है, लेकिन सर्दी के मौसम में इसकी आशंका ज्यादा बढ़ जाती है। बच्चों को उतने ही कपड़े पहनाएं, जिससे उसका शरीर गर्म रहे। अगर एंटी-बायोटिक दी जाती हैं तो पूरा कोर्स करें, नहीं तो बीमारी वापस आ सकती है। घर के अंदर या आसपास के प्रदूषण को कम करके और साफ-सफाई का पूरा खयाल रखें।
निमोनिया के दौरान परहेज
अगर किसी को खांसी है तो उससे थोड़ा दूर रहें। खांसते समय मुंह पर रुमाल रखें, ताकि मुंह से कीटाणु निकलकर दूसरों पर हमला ना करें। रोगी जिन आहारों के प्रति एलर्जिक है उसे रोगी को न दें। शक्कर व शक्कर के उत्पाद, और अत्यंत मीठे फलों से परहेज रखें। शीतल पेय या खाद्य पदार्थों और व्यावसायिक रूप से प्रोसेस्ड आहार का सेवन न करें।
विशेषज्ञ की सलाह
फिलहाल हल्की सर्दी का मौसम शुरू हो गया है। इस गुलाबी ठंडी में वायरल के अधिक मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें से कुछ मरीज निमोनिया के भी मिल रहे हैं। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें। बच्चों को ठंड से बचाए रखें और उन्हें सांस लेने में कोई दिक्कत या फिर अन्य कोई लक्षण मिल रहे हैं तो तुरंत प्रभाव से रोग विशेषज्ञ चिकित्सक से दिखाएं। निमोनिया बिगड़ने के बाद बच्चे की हालत गंभीर हो सकती है, ऐसे में बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
- डॉ. राज महता, बाल रोग विशेषज्ञ।
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हल्की सर्दी में ही निमोनिया के मामले आने शुरू हो गए हैं तो कड़ाके की ठंड में हालत बिगड़ सकते हैं। वहीं लगातार बिगड़ती जा रही शहर की हवा भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती जा रही है, जिसका नुकसान फेफड़ों को हो रहा है।
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निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है। यह मुख्य रूप से विषाणु या जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है। इसके अलावा निमोनिया सूक्ष्म जीव, कुछ दवाओं और अन्य रोगों के संक्रमण से भी हो सकता है। निमोनिया की चपेट में बच्चे, युवा और बुजुर्ग यानी हर आयुवर्ग के लोग आ सकते है। ऐसे में स्वास्थ्य का ध्यान रखना अति आवश्यक है। आज विश्व निमोनिया दिवस है।
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निमोनिया के लक्षण
निमोनिया होने पर फ्लू जैसे लक्षण महसूस होते हैं। ये लक्षण धीरे-धीरे या फिर तेजी से विकसित हो सकते हैं। निमोनिया का मुख्य लक्षण खांसी है। रोगी कमजोर और थका हुआ महसूस करता है। बलगम वाली खांसी से ग्रस्त होना। रोगी को बुखार के साथ पसीना और कंपकंपी भी हो सकती है। रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है या फिर वह तेजी से सांस लेने लगता है। सीने में दर्द होना। बेचैनी महसूस होना और भूख कम लगना।
छोटे बच्चों में निमोनिया के लक्षण
- छोटे बच्चों को बुखार के साथ पसीना व कंपकंपी होने लगती है।
- जब बच्चों को बहुत ज्यादा खांसी हो रही हो।
- वह अस्वस्थ दिख रहा हो।
- उसे भूख ना लग रही हो।
घर के अंदर रखें साफ सफाई
निमोनिया किसी भी मौसम में हो सकता है, लेकिन सर्दी के मौसम में इसकी आशंका ज्यादा बढ़ जाती है। बच्चों को उतने ही कपड़े पहनाएं, जिससे उसका शरीर गर्म रहे। अगर एंटी-बायोटिक दी जाती हैं तो पूरा कोर्स करें, नहीं तो बीमारी वापस आ सकती है। घर के अंदर या आसपास के प्रदूषण को कम करके और साफ-सफाई का पूरा खयाल रखें।
निमोनिया के दौरान परहेज
अगर किसी को खांसी है तो उससे थोड़ा दूर रहें। खांसते समय मुंह पर रुमाल रखें, ताकि मुंह से कीटाणु निकलकर दूसरों पर हमला ना करें। रोगी जिन आहारों के प्रति एलर्जिक है उसे रोगी को न दें। शक्कर व शक्कर के उत्पाद, और अत्यंत मीठे फलों से परहेज रखें। शीतल पेय या खाद्य पदार्थों और व्यावसायिक रूप से प्रोसेस्ड आहार का सेवन न करें।
विशेषज्ञ की सलाह
फिलहाल हल्की सर्दी का मौसम शुरू हो गया है। इस गुलाबी ठंडी में वायरल के अधिक मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें से कुछ मरीज निमोनिया के भी मिल रहे हैं। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें। बच्चों को ठंड से बचाए रखें और उन्हें सांस लेने में कोई दिक्कत या फिर अन्य कोई लक्षण मिल रहे हैं तो तुरंत प्रभाव से रोग विशेषज्ञ चिकित्सक से दिखाएं। निमोनिया बिगड़ने के बाद बच्चे की हालत गंभीर हो सकती है, ऐसे में बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
- डॉ. राज महता, बाल रोग विशेषज्ञ।