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24 फरवरी के धमाके के बाद लगा था अब शायद ही जान बचे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 12:47 AM IST
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After the blast of 24 February, it was felt that now hardly any lives are left
सुजाता लाखलाण। - फोटो : Bhiwani
बहल (भिवानी)। आंखों में पांच दिन की नींद, बेजान शरीर और मौत के मंजर को नजदीक देखने वाला बहल क्षेत्र के सलेमपुर गांव का अभिषेक बुधवार को दिन में घर सकुशल आ गया। रोमानिया बॉर्डर पर अभिषेक दिन और रात सो नहीं पाया। बस एक ही ख्वाहिश थी कि किसी तरह अपने वतन लौट जाएं।
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डॉक्टर बनने का सपना लेकर यूक्रेन के इवानो शहर गया अभिषेक अभी भी डर के साये में है। वह न ठीक से बात कर रहा है और न ही अभी सामान्य हुआ है। बस एक ही बात उसके मुंह से निकल रही है कि किसी तरह भारत का हर बच्चा वहां से सुरक्षित वापस आ जाए। अभिषेक ने बताया कि उसने दिसंबर 2021 में इवानो फ्रैंकिव्स्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया था। यह तो पता था कि सीमाओं पर सेना का भारी जमावड़ा है, पर यह नहीं पता था कि ऐसा युद्ध छिड़ेगा कि उनको वहां से निकलने तक का मौका नहीं मिलेगा। अभिषेक ने बताया कि जब 24 फरवरी को सुबह 7:12 पर जोरदार धमाका हुआ तो लगा कि अब कोई भी सुरक्षित नहीं बचेगा। वह मिलिट्री एरिया में ही एक फ्लैट में रहता है और जहां धमाका हुआ वह महज उससे एक किमी की दूरी पर ही है।
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धमाके से हिल गई सारी बिल्डिंग, ऐसा लगा कि पूरा शहर खत्म हो गया है
जब रूसी सेना ने यूक्रेन के एयरपोर्ट को ध्वस्त कर दिया और 24 फरवरी को बमबारी की तो उसके साथ अन्य सभी विद्यार्थी भयभीत हो गए और फ्लैट छोड़कर पास में बने बंकर में जा छुपे। एक दिन बंकर में रहने के बाद वे 26 फरवरी को सुबह साढ़े नौ बजे वे एक बस से निकले और करीब 6 बजे रोमानिया बॉर्डर से पहले उतरे। वहां से पैदल चलकर 27 फरवरी को सुबह पांच बजे रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। वहां तीन दिन बाद एक मार्च को रोमानिया एयरपोर्ट पहुंचे और आठ घंटे के सफर के बाद रात 11 बजे दिल्ली पहुंचे। एक-एक पल चिंता में गुजारने के बाद अब अभिषेक के पिता रूपेंद्र, माता सुनील, भाई अरविंद, बहन पूनम, पूजा की आंखों में खुशी के आंसू है।
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सुजीता को अब भी फ्लाइट मिलने का इंतजार
बहल क्षेत्र के सुरपुरा कलां गांव की बेटी सुजीता लाखलाण भी यूक्रेन के कीव शहर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। रूसी हमले के बाद सुजीता के परिजन लगातार उससे संपर्क बनाए हुए हैं और उसकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं। सुजीता के पिता जगदीश लाखलाण ने बताया कि उनकी बेटी से बुधवार को दिन में भी बात हुई थी, वह पूरी तरह से सुरक्षित है। उसकी बेटी ने बताया कि उसने 28 फरवरी को दिन में दो बजे कीव शहर छोड़ दिया था। वहां से टैक्सी में दो अन्य स्टूडेंट्स के साथ वह कीव से निकली। टैक्सी चालक पहले उनको स्लोवाकिया बॉर्डर पर ले गया, जहां भीड़ ज्यादा होने की वजह से वह उनको हंगरी बॉर्डर पर लेकर आया। अभी उसकी बेटी हंगरी बॉर्डर पर ही दिल्ली आने के लिए फ्लाइट के इंतजार में है।
चिराग दो दिन से रोमानिया बॉर्डर पर कर रहे फ्लाइट का इंतजार
तोशाम। भाजपा के मंडल अध्यक्ष विक्की महता का बेटा चिराग महता दो दिन से रोमानिया बॉर्डर पर घर आने के लिए इंतजार कर रहा है। परिजन बार-बार फोन कर अपने बेटे का हाल चाल पूछ रहे हैं। वह दो दिन पहले ही ल्वीव शहर से 480 किलोमीटर का सफर कर रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे। ल्वीव शहर से रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचने के लिए एक मिनी बस किराये पर की और बस में उन्होंने अपने देश का तिरंगा झंडा लगाया। इस दौरान चार जगह चेकिंग की। रोमानिया बॉर्डर पर वाहनों की लंबी लाइन लगी हुई थी, जिसकी वजह से वे करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चले। अब दो दिन से चिराग महता रोमानिया बॉर्डर पर ही है। वहीं पर उन्हें खाना पीना मिल रहा है।
पोलैंड के बॉर्डर पर पहुंचा पंकज
वहीं, यूक्रेन के खारकीव में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए गए पिंजोखरा निवासी छात्र पंकज खारकीव से निकलकर पोलैंड बॉर्डर पर पहुंच गया है, जिसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है। छात्र पंकज के चाचा डॉ. जयबीर बूरा व पिता राजेंद्र सिंह ने बताया कि युद्ध के दौरान वे खारकीव के बंकरों में रह रहे थे और मंगलवार को ही वहां से निकले हैं। संवाद

यूक्रेन गए बच्चों के परिजनों से मिल रहे अधिकारी
चांग। जिले के प्रशानिक अधिकारी यूक्रेन पढ़ने गए बच्चों के परिजनों से मिल रहे हैं। प्रशानिक टीम परिजनों से पासपोर्ट, रजिस्ट्रेशन नंबर सहित अन्य प्रकार की जानकारी एकत्रित कर रहे हैं। बुधवार को गांव चांग के वार्ड नं 20 से यूक्रेन एमबीबीएस करने गए अमरजीत के परिजनों से पटवारी महेंद्र सिंह व नंबरदार पवन कुमार मिले और जानकारी हासिल की। अमरजीत की बहन राखी ने बताया कि बुधवार चार बजे उनके भाई से फोन पर बात हुई है। अमरजीत ने परिजनों को बताया कि वह बिल्कुल सुरक्षित है। कुछ समय बाद एयरपोर्ट से अपने देश के लिए रवाना हो जाएगा। उधर, गांव गुजरानी से यूक्रेन एमबीबीएस करने राहुल पुत्र हवा सिहं के परिजनों से भी बुधवार को प्रशासनिक अधिकारी मिले। राहुल के परिजनो ने बताया कि राहुल रेलगाड़ी से यूक्रेन से मालदोवा देश में जा रहा है।

 चिराग महता।

चिराग महता।- फोटो : Bhiwani

 चांग से यूक्रेन गए अमरजीत के परिजनों से मिलते महेंद्र पटवारी। संवाद

चांग से यूक्रेन गए अमरजीत के परिजनों से मिलते महेंद्र पटवारी। संवाद- फोटो : Bhiwani

सलेमपुर पहुंचने के बाद अपनी माता सुनील के साथ अभिषेक। संवाद

सलेमपुर पहुंचने के बाद अपनी माता सुनील के साथ अभिषेक। संवाद- फोटो : Bhiwani

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