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नया चिकित्सक नहीं मिला तो 30 सितंबर के बाद नागरिक अस्पताल में नहीं होगा आंखों का इलाज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 08 Sep 2021 12:53 AM IST
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after 30 September may be problem for eye patients in Bhiwani civil hospital  due to without doctor
नवनीत शर्मा
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भिवानी। नागरिक अस्पताल पहले से ही चिकित्सकों की कमी झेल रहा है। अब स्वास्थ्य विभाग के एसीएस राजीव अरोड़ा के आदेशों ने अस्पताल प्रशासन और जिले के नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। एसीएस की ओर से जारी आदेशानुसार प्रदेश के 116 कंसलटेंट चिकित्सकों सहित जिले के तीन चिकित्सकों को पद मुक्त किया जा रहा है। फिलहाल जिले में महज एक ही नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। डॉ. हेमंत सिंह के पद मुक्त होने के बाद अगर नया चिकित्सक नहीं मिला तो नागरिक अस्पताल में आंखों का उपचार नहीं हो पाएगा। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के फैसले के कारण नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
सरकार एक ओर कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका जता रही है, वहहं अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने में असमर्थ नजर आ रही है। अन्य जिलों की तरह भिवानी का नागरिक अस्पताल की चिकित्सकों की कमी का शिकार हो गया है। इसकी वजह से मरीजों को उचित उपचार नहीं मिला पाता। मजबूरी में उन्हें पीजीआईएमएस रोहतक या फिर निजी अस्पतालों में उपचार करवाना पड़ रहा है। जिले में फिलहाल तीन कंसलटेंट चिकित्सक कार्यरत हैं, जोकि 30 सितंबर के बाद पदमुक्त हो जाएंगे।
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ओपीडी में नेत्र रोग के पहुुंचे रहे रोजाना 200 से 250 मरीज
नागरिक अस्पताल की ओपीडी में नेत्र रोग से संबंधित रोजाना 200 से 250 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनके उपचार के लिए महज एक कंसलटेंट चिकित्सक डॉ. हेमंत सिंह सेवाएं दे रहे हैं। वे सप्ताह में तीन दिन ओपीडी में चेकअप करते है और तीन दिन ऑपरेशन थियेटर में मरीजों का ऑपरेशन करते हैं। इनके अलावा सेवानिवृत्त प्रधान चिकित्सा अधिकारी कम हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र सिंह पूनिया और सेवानिवृत्त उपसिविल सर्जन कम महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मीना बरबर फिलहाल बवानीखेड़ा के उपस्वास्थ्य केंद्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उन चिकित्सकों के पद मुक्त होने के बाद नई भर्ती नहीं हुई तो सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था डगमगा जाएगी।
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बार-बार मिली शिकायत तो की कार्रवाई
सरकार को शिकायतें मिल रही थीं कि सेवानिवृत्त होने के बाद दोबारा से सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे चिकित्सक अपने कार्य को गंभीरता से नहीं कर रहे हैं। ओपीडी में बैठने की बजाए इधर-उधर बैठकर समय गुजार रहे हैं। इसलिए सरकार ने ऐसे चिकित्सकों को पद मुक्त करने का निर्णय लिया है। दोबारा से नियुक्त को लेकर विभाग ने कुछ शर्तें भी तय की हैं। इनमें एमबीबीएस चिकित्सकों की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, एमडी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व नागरिक अस्पताल में सेवाएं दी जाएंगी।
10 साल की एसीआर के आधार पर होगा चयन
30 सितंबर तक ही कंसलटेंट चिकित्सक अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे सकेंगे। इसके बाद दोबारा से नौकरी पर रखने के लिए 15 अक्टूबर तक आवेदन मांगे जाएंगे। विभाग दोबारा से उन्हीं चिकित्सकों को नौकरी पर रखेगा, जिनकी कार्यशैली बेहतर होगी। नई भर्ती के लिए इच्छुक चिकित्सक का एक महीने पहले आवेदन करना होगा। तैनाती सिर्फ उन्हीं चिकित्सकों की होगी, जिनकी एसीआर पिछले 10 में से कम से कम सात साल से बेहतरीन होगी। (संवाद)

जल्द नए चिकित्सक मिलेंगे
स्वास्थ्य विभाग के एसीएस के आदेशानुसार जिले के तीन कंसलटेंट चिकित्सक पद मुक्त हो जाएंगे। इन पदों पर फिर से सेवानिवृत्त चिकित्सकों की भर्ती की जाएगी। इसके लिए सेवानिवृत्त चिकित्सकों की पिछले 10 वर्षों की एसीआर देखी जाएगी। नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के बारे में कई पर उच्च अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है, उम्मीद है नागरिक अस्पताल को जल्द ही नए चिकित्सक मिलेंगे।
- डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन।
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