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Bhiwani News: पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के हुनर से ही निखरेगी भारत में उन्नत खेती
Sun, 06 Aug 2023 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 06 Aug 2023 12:40 AM IST
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बहल (भिवानी)। हरियाणा प्रदेश का किसान मेहनती है, पैदावार भी अच्छी लेता है पर वह अपने उत्पाद की मार्केटिंग नहीं कर पाता है। जापान जैसे विकसित देशों के किसान कम जमीन में कम पैदावार लेकर भी अपने उत्पाद की बेहतर कीमत उठाते हैं। पैकेजिंग, प्रोसेसिंग व उन्नत मशीनरी के बल पर आज जापान का हर किसान साधन संपन्न है, जबकि हमारे देश के किसान की एक ही सोच होती है कि फसल खेत से निकालने के बाद उसे जल्दी से जल्दी बाजार में बेच सके। जिस दिन देश का किसान अपने उत्पाद को सही प्रोसेसिंग व पैकेजिंग कर उसे बेचना सीख जाएगा, उस दिन न तो खेती घाटे का सौदा रहेगी और न किसान आर्थिक रूप से कमजोर रहेगा।
यह कहना है सिरसी गांव के प्रगतिशील किसान अमित स्वामी का जो प्रदेश कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल के साथ कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों का अध्ययन करने जापान गए आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। अमित ने बताया कि हमारे देश में किसान जिन तकनीकों व मशीनरी का प्रयोग कर रहे हैं, वो जापान के किसान आज से 40 से 50 साल पहले कर चुके हैं। इसके अलावा जापान के किसान न केवल खेती को सामूहिक तौर पर करते हैं और वे अपने पैदा किए गए उत्पादों की मार्केटिंग व्यक्तिगत तौर पर न करके उसे समूह के तौर पर (किसान उत्पादक संघ) पर ही बाजार में लाते हैं। इसके अलावा वे उत्पाद की प्रोसेसिंग भी समूह के तौर पर करते हैं जिससे हर किसान को बाजार में अच्छी आमदनी हासिल कर सकता है। संवाद
प्राइस वार नहीं, क्वालिटी पर फोकस है जापान के किसानों का
अमित ने बताया कि जापान के खेतिहर किसानों की एक बड़ी खासियत यह है कि उनमें भारत सहित दूसरे देशों की तरह उत्पाद की बिक्री के लिए प्राइस वार जैसा ट्रेंड नहीं है। वहां, हर किसान अपने उत्पाद की क्वालिटी पर फोकस रखता है। किसान की उस क्वालिटी को जापान के बाजार में उसकी मनमाफिक कीमत मिलती है। जापान का किसान प्राइस वार जैसी प्रतिस्पर्धा से कोसों दूर है। जहां बढ़ती महंगाई के चलते प्राइस वार की लड़ाई में प्रोडक्ट की क्वालिटी से समझौता कर लिया जाता है। अमित ने बताया कि वहां फार्मिंग में आर्गेनिक का ट्रेंड भी नहीं है पर वो अपनी क्वालिटी से खुश है।
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पैकेजिंग, प्रोसेसिंग में बहुत आगे है जापानी किसान
अमित ने बताया कि जापान में किसान खेत से ही अपने प्रोडक्ट को पैकेजिंग कर लाते हैं। अधिकतर किसान एफपीओ के पास ऐसी उन्नत मशीनें है जो कम लागत और कम समय में उत्पाद की पैकिंग करती है। वहीं, वहां के किसान प्रोसेसिंग तकनीक को अपनाकर अपने उत्पाद को खराब नहीं जाने देते हैं। किसान अपने उत्पाद की डिहाइड्रेशन, फ्रोजन, प्रोसेस फूड (ग्रेवी, पेस्ट आदि) प्रक्रिया से अच्छी कीमत हासिल कर रहे हैं। भारत में भी किसान अगर कंवेयर डिहाइड्रेटर जैसी यूनिट लगाकर अपने उत्पाद की प्रोसेसिंग करें तो अच्छा लाभ कमा सकते हैं।
मेहनती भारत का किसान, पर तकनीक में बहुत पीछे है
अमित स्वामी ने बताया कि जापान जैसे देश के लोग अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठावान है और देश के प्रति कृतज्ञ है। ईमानदारी, नैतिकता और राष्ट्रवाद की सोच ने वहां के नागरिकों को इस तरह से संबल किया है कि वो जिस काम को हाथ में लेते हैं, उसमें सफलता हासिल करते हैं। भारत का किसान पैदावार बढ़ाने के लिए नए तरीकों की सोच, मेहनत और फसली सुरक्षा में जापान के किसान से बहुत आगे हैं। पर, वो उत्पाद की सही मार्केटिंग व उसके स्टोर हाउसिंग के तौर तरीकों से आज भी अनभिज्ञ है। जापान की विकसित फल, फूल और सब्जी की मंडी में किसान को उसके उत्पाद के अच्छे भाव मिल जाते हैं, वैसी व्यवस्था की हमारे देश कमी है। अमित ने बताया कि जिस दिन जापान जैसी मशीनरी और पैकेजिंग, प्रोसेसिंग के तरीके भारत के किसान सीख लेगा उस दिन भारत का किसान विश्व में सबसे अग्रणी किसान होगा।
प्रगतिशील किसान है अमित, छह एकड़ के फार्म का है मालिक
सिरसी गांव का अमित छह एकड़ में फार्मिंग करता है। खेती को वह एक हर सीजन में चैलेंज मानकर काम करता है। कॉमर्स संकाय में ग्रेजुएट अमित के फार्म में फिलहाल रंगीन शिमला मिर्च, हरी मिर्च, घीया, प्याज, तरबूज, खरबूजा सहित अन्य फल और सब्जियां लगी हैं। अमित को जापान जाने का अवसर प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल की पहल पर मिला है। अमित का कहना है कि कृषि मंत्री जेपी दलाल की विदेशी दौरों में किसानों को साथ ले जाने की सोच सकारात्मक है। कारण कि किसान को फसल की जमीनी हकीकत से पता होता है और जो कुछ वो वहां सीखकर आता है, उसका फायदा केवल उसे ही नहीं, उस प्रदेश व क्षेत्र के अनेक किसानों को होता है।
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यह कहना है सिरसी गांव के प्रगतिशील किसान अमित स्वामी का जो प्रदेश कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल के साथ कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों का अध्ययन करने जापान गए आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। अमित ने बताया कि हमारे देश में किसान जिन तकनीकों व मशीनरी का प्रयोग कर रहे हैं, वो जापान के किसान आज से 40 से 50 साल पहले कर चुके हैं। इसके अलावा जापान के किसान न केवल खेती को सामूहिक तौर पर करते हैं और वे अपने पैदा किए गए उत्पादों की मार्केटिंग व्यक्तिगत तौर पर न करके उसे समूह के तौर पर (किसान उत्पादक संघ) पर ही बाजार में लाते हैं। इसके अलावा वे उत्पाद की प्रोसेसिंग भी समूह के तौर पर करते हैं जिससे हर किसान को बाजार में अच्छी आमदनी हासिल कर सकता है। संवाद
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प्राइस वार नहीं, क्वालिटी पर फोकस है जापान के किसानों का
अमित ने बताया कि जापान के खेतिहर किसानों की एक बड़ी खासियत यह है कि उनमें भारत सहित दूसरे देशों की तरह उत्पाद की बिक्री के लिए प्राइस वार जैसा ट्रेंड नहीं है। वहां, हर किसान अपने उत्पाद की क्वालिटी पर फोकस रखता है। किसान की उस क्वालिटी को जापान के बाजार में उसकी मनमाफिक कीमत मिलती है। जापान का किसान प्राइस वार जैसी प्रतिस्पर्धा से कोसों दूर है। जहां बढ़ती महंगाई के चलते प्राइस वार की लड़ाई में प्रोडक्ट की क्वालिटी से समझौता कर लिया जाता है। अमित ने बताया कि वहां फार्मिंग में आर्गेनिक का ट्रेंड भी नहीं है पर वो अपनी क्वालिटी से खुश है।
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पैकेजिंग, प्रोसेसिंग में बहुत आगे है जापानी किसान
अमित ने बताया कि जापान में किसान खेत से ही अपने प्रोडक्ट को पैकेजिंग कर लाते हैं। अधिकतर किसान एफपीओ के पास ऐसी उन्नत मशीनें है जो कम लागत और कम समय में उत्पाद की पैकिंग करती है। वहीं, वहां के किसान प्रोसेसिंग तकनीक को अपनाकर अपने उत्पाद को खराब नहीं जाने देते हैं। किसान अपने उत्पाद की डिहाइड्रेशन, फ्रोजन, प्रोसेस फूड (ग्रेवी, पेस्ट आदि) प्रक्रिया से अच्छी कीमत हासिल कर रहे हैं। भारत में भी किसान अगर कंवेयर डिहाइड्रेटर जैसी यूनिट लगाकर अपने उत्पाद की प्रोसेसिंग करें तो अच्छा लाभ कमा सकते हैं।
मेहनती भारत का किसान, पर तकनीक में बहुत पीछे है
अमित स्वामी ने बताया कि जापान जैसे देश के लोग अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठावान है और देश के प्रति कृतज्ञ है। ईमानदारी, नैतिकता और राष्ट्रवाद की सोच ने वहां के नागरिकों को इस तरह से संबल किया है कि वो जिस काम को हाथ में लेते हैं, उसमें सफलता हासिल करते हैं। भारत का किसान पैदावार बढ़ाने के लिए नए तरीकों की सोच, मेहनत और फसली सुरक्षा में जापान के किसान से बहुत आगे हैं। पर, वो उत्पाद की सही मार्केटिंग व उसके स्टोर हाउसिंग के तौर तरीकों से आज भी अनभिज्ञ है। जापान की विकसित फल, फूल और सब्जी की मंडी में किसान को उसके उत्पाद के अच्छे भाव मिल जाते हैं, वैसी व्यवस्था की हमारे देश कमी है। अमित ने बताया कि जिस दिन जापान जैसी मशीनरी और पैकेजिंग, प्रोसेसिंग के तरीके भारत के किसान सीख लेगा उस दिन भारत का किसान विश्व में सबसे अग्रणी किसान होगा।
प्रगतिशील किसान है अमित, छह एकड़ के फार्म का है मालिक
सिरसी गांव का अमित छह एकड़ में फार्मिंग करता है। खेती को वह एक हर सीजन में चैलेंज मानकर काम करता है। कॉमर्स संकाय में ग्रेजुएट अमित के फार्म में फिलहाल रंगीन शिमला मिर्च, हरी मिर्च, घीया, प्याज, तरबूज, खरबूजा सहित अन्य फल और सब्जियां लगी हैं। अमित को जापान जाने का अवसर प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल की पहल पर मिला है। अमित का कहना है कि कृषि मंत्री जेपी दलाल की विदेशी दौरों में किसानों को साथ ले जाने की सोच सकारात्मक है। कारण कि किसान को फसल की जमीनी हकीकत से पता होता है और जो कुछ वो वहां सीखकर आता है, उसका फायदा केवल उसे ही नहीं, उस प्रदेश व क्षेत्र के अनेक किसानों को होता है।