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कृषि कानूनों के विरोध में सड़क पर उतरे अधिवक्ता

Wed, 10 Feb 2021 12:53 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 10 Feb 2021 12:53 AM IST
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किसानों के समर्थन में प्रदर्शन करते अधिवक्ता। संवाद - फोटो : Bhiwani
भिवानी। कृषि कानूनों के विरोध में बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने कोर्ट परिसर के गेट नंबर एक पर एकत्रित होकर उपायुक्त कार्यालय तक प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंप कृषि कानून रद्द करने की मांग की। वहीं कितलाना टोल पर चल रहे धरने में किसानों ने प्रधानमंत्री द्वारा आंदोलनजीवी बताए जाने पर रोष जताते हुए उनका पुतला जलाया।
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वकीलों ने किया प्रदर्शन
बार एसोसिएशन प्रधान सत्यजीत पिलानिया के नेतृत्व में कृषि कानूनों को रद्द करने व किसानों की मांगों के समर्थन में सड़कों पर उतर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान प्रदीप बजाड़ ने की। प्रधान ने कहा कि तीनों कृषि कानून गलत हैं। इनके रद्द होने तक वो किसानों के साथ खड़े हैं और हर संभव मदद के लिए तैयार हैं। बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान प्रदीप बजाड़ ने संबोधित किया। बार एसोसिएशन के सदस्यों ने कृषि कानूनों को जल्द रद्द करने की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर उप प्रधान सोमबीर भाटिया सह सचिव विनय तंवर, भूपेंद्र ढांडा प्रदीप बजाड़, पियूष वर्मा, अनिल साहू, पूर्व सचिव कृष्ण मलिक, पूर्व उप प्रधान मुकेश गुलिया, अमित ढुल, अंत दहिया, रमेश सांगवान, ओमपाल पोटलिया ,देशांत गुलिया, सौरभ पंडित, पुनीत सांगवान, अरविंद बैरान, सतेंद्र घणघस ,सुमित श्योराण ,कुलदीप अत्री, प्रवीन अत्री, पवन गौतम, राजीव पंघाल, अविनाश तंवर, रविंद्र ग्रेवाल, विजय, रवि रॉय मौजूद थे।
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आंदोलनजीवी कहने पर किसानों में रोष, फूंका पुतला
संसद में प्रधानमंत्री ने धरने लोगों को आंदोलनजीवी कहने पर किसानों में रोष है। किसानों ने रोष जताते प्रधानमंत्री का पुतला जलाया। किसान नेताओं ने इसे किसान और जवानों का अपमान बताया है।
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वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री भूल रहे है कि देश को आजादी आंदोलनकारियों ने ही दिलाई थी। आज देश के नागरिक जिस खुली हवा में सांस ले रहे हैं ये भी उन्हीं की देन है। प्रधानमंत्री ने संसद में जो भाषण दिया उससे किसान ही नहीं उसके जवान बेटे जो देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं उनका भी अपमान हुआ है। उन्हें अविलंब इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। दादरी से निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान ने कहा कि किसान आंदोलन को भाजपा जाति, धर्म या क्षेत्र के हिसाब से बांटने का षड्यंत्र रच रही थी, जब वह कामयाब नहीं हुआ तो प्रधानमंत्री मैदान में आए। धरने के 47वें दिन की अध्यक्षता नरसिंह डीपीई, बिजेंद्र बेरला, धर्मपाल महराणा, रणधीर कुंगड़, सज्जन कुमार सिंगला, सुभाष यादव, महेंद्र पंच कितलाना ने संयुक्त रूप से की। मंच संचालन कामरेड ओमप्रकाश और रणधीर घिकाड़ा ने किया। इस अवसर पर राजू मान, बलबीर बजाड़, कमल प्रधान, दिलबाग ग्रेवाल, बीरमति, पूर्व सरपंच नरेंद्र फतेहगढ़, पूर्व सरपंच समुन्द्र सिंह, सूबेदार सत्यवीर, रत्तन सिंह घिकाड़ा, राजेश प्रहलादगढ़, जमात अली, राजबीर बोहरा, मेहर सिंह धनाना, मास्टर विजयपाल, दिलबाग ढुल, जागेराम बोहरा, नरदेव अटेला, राजबीर गौरीपुर, रणधीर अटेला, सरोज श्योराण आदि मौजूद थे।

कितलाना टोल पर केंद्र सरकार का पुतला फूंकते किसान। संवाद

कितलाना टोल पर केंद्र सरकार का पुतला फूंकते किसान। संवाद- फोटो : Bhiwani

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