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Bhiwani News: तालों में कैद सुलभता, खुले में शौच मजबूरी
Sun, 13 Jul 2025 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 13 Jul 2025 01:15 AM IST
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बवानीखेड़ा में शौचालय पर लगा ताला।
बवानीखेड़ा। कस्बे के नागरिक अस्पताल के सामने सार्वजनिक सुविधा के लिए बनाए गए सुलभ शौचालयों पर ताले लगे होने से राहगीरों और कस्बावासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नगर पालिका कार्यालय के ठीक सामने बने इन शौचालयों में महिला व पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था है, लेकिन लंबे समय से ताले लगे होने के कारण लोग मजबूरी में खुले में शौच करने को विवश हैं।
गंदगी और बदबू से गुजरना मुश्किल
स्थानीय निवासी संजय, अशोक, पवन, नरेंद्र, यश, रीना, मीनाक्षी, सिमरन और नीतू ने बताया कि शौचालयों की हालत बद से बदतर है। अंदर ना तो पानी की कोई व्यवस्था है, और ना ही नियमित सफाई की जाती है। इतनी बदबू होती है कि वहां एक मिनट भी रुक पाना मुश्किल हो जाता है। इन शौचालयों के आस-पास से गुजरते समय भी लोगों को नाक पर रूमाल रखना पड़ता है।
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नगर पालिका को मिल चुका है पुरस्कार, फिर भी लचर व्यवस्था : गौरतलब है कि बीते दिनों नगर पालिका बवानीखेड़ा को सफाई व्यवस्था में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। लाखों रुपये की लागत से बने इन सुलभ शौचालयों का सही तरीके से संचालन ना हो पाना पालिका की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
नगर पालिका सचिव ने दिए कार्रवाई के संकेत : जब इस समस्या को लेकर नगर पालिका सचिव संदीप गर्ग से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। यदि सुलभ शौचालयों पर ताले लगे हैं और सफाई की स्थिति खराब है तो जल्द ही ताले खुलवाकर शौचालयों की सफाई कराई जाएगी। आमजन को कोई परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।
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नगर पालिका कार्यालय के ठीक सामने बने इन शौचालयों में महिला व पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था है, लेकिन लंबे समय से ताले लगे होने के कारण लोग मजबूरी में खुले में शौच करने को विवश हैं।
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गंदगी और बदबू से गुजरना मुश्किल
स्थानीय निवासी संजय, अशोक, पवन, नरेंद्र, यश, रीना, मीनाक्षी, सिमरन और नीतू ने बताया कि शौचालयों की हालत बद से बदतर है। अंदर ना तो पानी की कोई व्यवस्था है, और ना ही नियमित सफाई की जाती है। इतनी बदबू होती है कि वहां एक मिनट भी रुक पाना मुश्किल हो जाता है। इन शौचालयों के आस-पास से गुजरते समय भी लोगों को नाक पर रूमाल रखना पड़ता है।
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नगर पालिका को मिल चुका है पुरस्कार, फिर भी लचर व्यवस्था : गौरतलब है कि बीते दिनों नगर पालिका बवानीखेड़ा को सफाई व्यवस्था में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। लाखों रुपये की लागत से बने इन सुलभ शौचालयों का सही तरीके से संचालन ना हो पाना पालिका की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
नगर पालिका सचिव ने दिए कार्रवाई के संकेत : जब इस समस्या को लेकर नगर पालिका सचिव संदीप गर्ग से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। यदि सुलभ शौचालयों पर ताले लगे हैं और सफाई की स्थिति खराब है तो जल्द ही ताले खुलवाकर शौचालयों की सफाई कराई जाएगी। आमजन को कोई परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।