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Bhiwani News: नहरी पानी पर जनसंवाद में तीखी नोकझोंक, किसानों ने सुनाई खरी-खरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 28 Feb 2026 01:55 AM IST
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A heated debate broke out during the public dialogue on canal water, with farmers speaking out.
गांव लेघा में जनसंवाद कार्यक्रम में किसानों व भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई नोकझोंक
कैरू। नहरी पानी की समस्या को लेकर गांव लेघां हेतवान में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान किसानों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। किसानों ने छह महीने से नहर में पानी न आने का मुद्दा उठाते हुए जिम्मेदारों को खरी-खरी सुनाई। जनसंवाद के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारी पहुंचे थे लेकिन समाधान को लेकर विवाद की स्थिति बन गई।
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शुक्रवार को 19 गांवों में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला उपायुक्त साहिल गुप्ता के दिशा-निर्देश पर विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। राज्यसभा सदस्य किरण चौधरी और कैबिनेट मंत्री श्रुति चौधरी की ओर से अधिकारियों के साथ प्रदीप गोलागढ़ व अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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जनसंवाद शुरू होते ही किसानों ने नहरी पानी की समस्या उठाई। कैबिनेट मंत्री की ओर से भेजे गए जिम्मेदार कार्यकर्ताओं और किसानों के बीच तीखी बहस हो गई। सरपंच प्रतिनिधि राजबीर दुग्गल, मुकेश तंवर, जागेराम, कृष्ण पंच, संजय, भोलू पहलवान, दलीप पंच, सुरेश पंच, बलवान, राम अवतार और लक्ष्मण तंवर ने कहा कि छह महीने से अधिक समय से नहर में पानी नहीं आया है जिससे गेहूं और सरसों की फसल खराब हो चुकी है। किसानों को खेतों में टैंकर से पानी मंगवाना पड़ रहा है, जिस पर 800 से 1000 रुपये प्रति टैंकर खर्च आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना देने के बाद भी जिम्मेदार मौन बैठे हैं। दो बार कैबिनेट मंत्री श्रुति चौधरी के निवास पर पानी की मांग रखी जा चुकी है और आश्वासन भी मिला लेकिन नहरी पाइप अब भी सूखे पड़े हैं।
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गर्मी की शुरुआत होते ही नहरें सूख गईं। इससे नहरों पर निर्भर किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसान पानी आने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा। सिंचाई के अभाव में फसलें सूखने लगी हैं और समस्या कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। संदीप मिस्त्री, किसान।



यदि एक बार नहरी पानी मिल जाता तो फसल की पैदावार ठीक हो जाती लेकिन किसान पानी के लिए तरस रहे हैं। शासन और प्रशासन के चक्कर लगा चुके हैं। पानी के बिना किसान अच्छी फसल की उम्मीद कैसे कर सकता है। जनसंवाद कार्यक्रम औपचारिकता बनकर रह गया है, समाधान नहीं मिल रहा। -मुकेश, किसान
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