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Bhiwani News: किताबों से नाता, मोबाइल से दूरी...रोजाना 8 घंटे की पढ़ाई बनी सफलता की धुरी
Sat, 10 Oct 2026 02:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 10 Oct 2026 02:36 AM IST
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बैंक कॉलोनी में अतुल को मिठाई खिलाते पिता जितेंद्र जांगड़ा।
भिवानी। किताबों से नाता और मोबाइल से दूरी रखकर रोजाना आठ से दस घंटे की पढ़ाई अतुल कुमार जांगड़ा की सफलता की धुरी बन गई। अतुल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसका पहला प्रयास ही सिविल सर्विसेज में उसे सफलता दिलाकर 13वां रैंक दिला देगा।
अतुल की माता सुमन देवी ने कहा कि बेटे को घर के अंदर पढ़ाई का माहौल दिया तो लाल ने कमाल कर दिया। उसे पढ़ाई के दौरान हर वो चीज मुहैया कराई जाती, जिसकी उसे जरूरत होती थी। बस अतुल ने अपने लक्ष्य पर ही ध्यान केंद्रित रखा, जिसका नतीजा सुखद निकला।
हरियाणा लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विसेज परीक्षा में अतुल द्वारा 13वां रैंक प्राप्त किए जाने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है और हर कोई बधाई देने पहुंच रहा है।
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वहीं जेबीटी शिक्षक पिता जितेंद्र जांगड़ा ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर अपनी अभिलाषाएं और इच्छाएं ना थोपें बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए खुले माहौल में प्रोत्साहित करें तो सफलता जरूर मिलेगी।
प्रारंभिक शिक्षा से ही अतुल ने प्रथम का नहीं तोड़ा क्रम
अतुल जांगड़ा के पिता जितेंद्र ने बताया कि बेटा प्रारंभिक शिक्षा में हमेशा अव्वल आता था। उसने प्रथम आने का क्रम दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में भी नहीं टूटने दिया। इसी का नतीजा रहा कि बेटे ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई थी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की और फिर सिविल सर्विसेज के पहले प्रयास में ही सफलता को छू लिया। अतुल के पिता जितेंद्र गांव हालुवास देवसर माजरा के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में बतौर प्राथमिक शिक्षक तैनात हैं। जितेंद्र करीब 25 सालों से बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने का पाठ पढ़ाते आ रहे हैं, जबकि उनके बेटे ने सफलता की नई कहानी लिख डाली है, परिवार में कोई एचसीएस नहीं है। ये पहला मौका है जब उनके परिवार में एक एचसीएस अधिकारी भी बन गया है।
अतुल से सफलता के कुछ सीधे सवाल:
पहले प्रयास में सिविल सर्विसेज की परीक्षा कैसे पास की?
उत्तर: मैंने हिंदू कॉलेज से 2025 में राजनीतिक विज्ञान से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। इस बीच मैंने हरियाणा लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विसेज के लिए भी परीक्षा दी। मैंने विषय पर आधारित चीजों को बारीकी से समझा और फिर मेरा पहला प्रयास ही सफल रहा।
एचसीएस बनने में परिवार का कितना योगदान है?
उत्तर: मेरी सफलता में मेरे परिवार ने बड़ा साथ दिया। मैं घर पर ही रहकर पढ़ाई करता था। पिता ड्यूटी पर चले जाते और माता घर के कार्य में व्यस्त रहती, भाई बैंक में चला जाता था। घर पर शांत माहौल में पढ़ाई करने में मां ने साथ दिया।
एचसीएस बनने के बाद आगे क्या सोचा?
उत्तर: मेरा सपना आईएएस बनना है। एचसीएस बनने के बाद भी मैं यूपीएससी की तैयारी जारी रखूंगा।
एचसीएच अधिकारी के तौर पर आपकी लोगों के प्रति क्या सोच रहेगी?
उत्तर: मैं एक अधिकारी नहीं बल्कि लोक सेवक के तौर पर खुद को हमेशा दूसरों के सहायतार्थ और आम आदमी के हित में काम करना अपनी प्राथमिकता रखूंगा।
आप अपना आदर्श किसे मानते हैं?
उत्तर: मैंने 2015 में आईएएस बनी टीना डाबी को अपना आदर्श मानकर आईएएस बनने की सोची थी, मेरा ये प्रयास जारी रहेगा।
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दादी ओमपति देवी ने दिया आशीर्वाद, ताई ने खिलाई मिठाई
अतुल के घर जश्न का माहौल है। दादी ओमपति देवी ने पोते को आशीर्वाद दिया वहीं ताई रेखा देवी ने अतुल को मिठाई खिलाई। मां सुमन देवी और पिता जितेंद्र जांगड़ा ने भी बेटे का मुंह मीठा कराया। बहन सुशीला जांगड़ा ने भी भाई के अफसर बनने पर खुशी जताई। ताऊ रविंद्र जांगड़ा ने अतुल ने 21 साल की उम्र में एचसीएस बनकर ना केवल परिवार का सपना पूरा किया है बल्कि भविष्य में युवाओं के लिए भी प्रेरणा की राह प्रशस्त की है।
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अतुल की माता सुमन देवी ने कहा कि बेटे को घर के अंदर पढ़ाई का माहौल दिया तो लाल ने कमाल कर दिया। उसे पढ़ाई के दौरान हर वो चीज मुहैया कराई जाती, जिसकी उसे जरूरत होती थी। बस अतुल ने अपने लक्ष्य पर ही ध्यान केंद्रित रखा, जिसका नतीजा सुखद निकला।
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हरियाणा लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विसेज परीक्षा में अतुल द्वारा 13वां रैंक प्राप्त किए जाने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है और हर कोई बधाई देने पहुंच रहा है।
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वहीं जेबीटी शिक्षक पिता जितेंद्र जांगड़ा ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर अपनी अभिलाषाएं और इच्छाएं ना थोपें बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए खुले माहौल में प्रोत्साहित करें तो सफलता जरूर मिलेगी।
प्रारंभिक शिक्षा से ही अतुल ने प्रथम का नहीं तोड़ा क्रम
अतुल जांगड़ा के पिता जितेंद्र ने बताया कि बेटा प्रारंभिक शिक्षा में हमेशा अव्वल आता था। उसने प्रथम आने का क्रम दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में भी नहीं टूटने दिया। इसी का नतीजा रहा कि बेटे ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई थी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की और फिर सिविल सर्विसेज के पहले प्रयास में ही सफलता को छू लिया। अतुल के पिता जितेंद्र गांव हालुवास देवसर माजरा के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में बतौर प्राथमिक शिक्षक तैनात हैं। जितेंद्र करीब 25 सालों से बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने का पाठ पढ़ाते आ रहे हैं, जबकि उनके बेटे ने सफलता की नई कहानी लिख डाली है, परिवार में कोई एचसीएस नहीं है। ये पहला मौका है जब उनके परिवार में एक एचसीएस अधिकारी भी बन गया है।
अतुल से सफलता के कुछ सीधे सवाल:
पहले प्रयास में सिविल सर्विसेज की परीक्षा कैसे पास की?
उत्तर: मैंने हिंदू कॉलेज से 2025 में राजनीतिक विज्ञान से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। इस बीच मैंने हरियाणा लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विसेज के लिए भी परीक्षा दी। मैंने विषय पर आधारित चीजों को बारीकी से समझा और फिर मेरा पहला प्रयास ही सफल रहा।
एचसीएस बनने में परिवार का कितना योगदान है?
उत्तर: मेरी सफलता में मेरे परिवार ने बड़ा साथ दिया। मैं घर पर ही रहकर पढ़ाई करता था। पिता ड्यूटी पर चले जाते और माता घर के कार्य में व्यस्त रहती, भाई बैंक में चला जाता था। घर पर शांत माहौल में पढ़ाई करने में मां ने साथ दिया।
एचसीएस बनने के बाद आगे क्या सोचा?
उत्तर: मेरा सपना आईएएस बनना है। एचसीएस बनने के बाद भी मैं यूपीएससी की तैयारी जारी रखूंगा।
एचसीएच अधिकारी के तौर पर आपकी लोगों के प्रति क्या सोच रहेगी?
उत्तर: मैं एक अधिकारी नहीं बल्कि लोक सेवक के तौर पर खुद को हमेशा दूसरों के सहायतार्थ और आम आदमी के हित में काम करना अपनी प्राथमिकता रखूंगा।
आप अपना आदर्श किसे मानते हैं?
उत्तर: मैंने 2015 में आईएएस बनी टीना डाबी को अपना आदर्श मानकर आईएएस बनने की सोची थी, मेरा ये प्रयास जारी रहेगा।
दादी ओमपति देवी ने दिया आशीर्वाद, ताई ने खिलाई मिठाई
अतुल के घर जश्न का माहौल है। दादी ओमपति देवी ने पोते को आशीर्वाद दिया वहीं ताई रेखा देवी ने अतुल को मिठाई खिलाई। मां सुमन देवी और पिता जितेंद्र जांगड़ा ने भी बेटे का मुंह मीठा कराया। बहन सुशीला जांगड़ा ने भी भाई के अफसर बनने पर खुशी जताई। ताऊ रविंद्र जांगड़ा ने अतुल ने 21 साल की उम्र में एचसीएस बनकर ना केवल परिवार का सपना पूरा किया है बल्कि भविष्य में युवाओं के लिए भी प्रेरणा की राह प्रशस्त की है।